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Zee में प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी, 20.94 करोड़ वारंट का हुआ आवंटन
पूरी तरह कन्वर्जन के बाद Zee Entertainment में प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी बढ़कर 17.9% होगी, शेयरधारकों ने 23.79% हिस्सेदारी को मंजूरी दी थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
जी मीडिया (Zee Entertainment Enterprises-ZEEL) ने प्रमोटर ग्रुप की इकाई Sunbright Mauritius Investments Ltd को 126 रुपये प्रति वारंट के इश्यू प्राइस पर 20,94,47,805 पूरी तरह कन्वर्टिबल वारंट आवंटित किए हैं. वारंट का आवंटन 21 अगस्त को शेयरधारकों और स्टॉक एक्सचेंजों से मंजूरी मिलने के बाद पूरा हुआ. यह प्रक्रिया सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) की ओर से दी गई अंतरिम राहत के बाद आगे बढ़ी.
659.76 करोड़ रुपये का भुगतान
Sunbright ने इश्यू प्राइस का 25 फीसदी यानी 31.50 रुपये प्रति वारंट की राशि अग्रिम रूप से चुकाई है. यह रकम करीब 659.76 करोड़ रुपये है. बाकी 75 फीसदी यानी 94.50 रुपये प्रति वारंट का भुगतान आवंटन की तारीख से 18 महीने के भीतर करना होगा. इसके लिए अंतिम तारीख 21 फरवरी 2028 है.
हर वारंट के कन्वर्जन पर धारक को 1 रुपये फेस वैल्यू का एक इक्विटी शेयर हासिल करने का अधिकार होगा. बाकी भुगतान होने और वारंट के इक्विटी शेयरों में कन्वर्जन तक ZEEL की पेड-अप शेयर कैपिटल में कोई बदलाव नहीं होगा.
कन्वर्जन के बाद 17.90 फीसदी होगी हिस्सेदारी
अगर सभी वारंट इक्विटी शेयरों में कन्वर्ट हो जाते हैं, तो पूरी तरह डायल्यूटेड आधार पर ZEEL में Sunbright की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 17.90 फीसदी हो जाएगी. इससे प्रमोटर ग्रुप को प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का महत्वपूर्ण रास्ता मिलेगा.
शेयरधारकों ने इससे पहले प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी बढ़ाकर 23.79 फीसदी तक करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. हालांकि, मौजूदा वारंट के पूरी तरह कन्वर्जन के बाद हिस्सेदारी करीब 17.90 फीसदी तक ही पहुंचेगी.
SAT के आदेश के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया
यह आवंटन 14 अगस्त को SAT की ओर से दिए गए आदेश के बाद हुआ. ट्रिब्यूनल ने ZEEL और पुनीत गोयनका को प्रेफरेंशियल वारंट इश्यू आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी. इसके लिए दोनों अपीलकर्ताओं को एक सप्ताह के भीतर पूरी पेनल्टी जमा करने की शर्त रखी गई थी. ट्रिब्यूनल ने वारंट इश्यू पूरा करने की समयसीमा भी सात दिन बढ़ा दी थी.
SAT ने ZEEL को अपने म्यूचुअल फंड निवेश का इस्तेमाल रोजमर्रा की परिचालन जरूरतों के लिए करने की भी अनुमति दी. हालांकि, इन फंड्स का इस्तेमाल अन्य उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता. इसमें प्रस्तावित डिविडेंड का भुगतान भी शामिल है.
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