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इंफ्रास्ट्रक्चर और उत्पादन विस्तार के साथ भारत में प्रॉफिटेबल औद्योगिक हॉटस्पॉट्स

भारत में औद्योगिक और वेयरहाउसिंग बाजार राष्ट्रीय नीतियों से तेजी से विकसित हो रहा है. प्रमुख पहलें औद्योगिक और फ्रेट कॉरिडोर का विस्तार, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क का निर्माण, स्मार्ट औद्योगिक शहरों का विकास और प्रमुख सागर और एयरपोर्ट विस्तार परियोजनाओं के निर्माण हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

भारत का औद्योगिक और वेयरहाउसिंग बाजार तेजी से बदलाव की दिशा में बढ़ रहा है. नीति समर्थन, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, बदलते उपभोक्ता व्यवहार, सप्लाई चेन में सुधार और तेजी से तकनीक अपनाने के कारण यह सेक्टर उच्च विकास के अवसर प्रस्तुत कर रहा है. साथ ही, भारत के विनिर्माण क्षेत्र का जीडीपी में योगदान लगभग 17% है, जो 2035 तक 25% तक बढ़ने का अनुमान है.

30 हाई-पोटेंशियल शहरों की पहचान

कॉलियर्स की नवीनतम रिपोर्ट ‘India’s Emerging Industrial & Warehousing Corridors: Mapping the Next Growth Frontier’ के अनुसार, अगले कुछ दशकों में कई शहर औद्योगिक और वेयरहाउसिंग विकास के मुख्य केंद्र बन सकते हैं. नीति समर्थन जैसे कॉरिडोर विकास प्रोग्राम, PM गति शक्ति योजना, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति और औद्योगिक कॉरिडोर, स्मार्ट सिटी, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क, ग्रीनफील्ड पोर्ट और एयरपोर्ट के विकास के कारण ये शहर प्रमुख हब बन सकते हैं. कॉलियर्स ने 100 से अधिक शहरों का आकलन किया और 30 उच्च संभावना वाले शहरों की सूची बनाई. इन 30 शहरों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, प्राइम हब्स पहले से स्थापित 8 शहर हैं, इमर्जिंग हब्स 12 उभरते शहर हैं और नेसेंट हब्स 10 नवोदित शहर हैं.

प्राइम, इमर्जिंग और नेसेंट हब्स का वितरण

प्राइम हब्स में अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली NCR, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और पुणे शामिल हैं. ये शहर पहले से ही मजबूत मांग केंद्र हैं और आगे और विकसित होने की संभावना रखते हैं. इमर्जिंग हब्स में भोपाल, भुवनेश्वर, कोयम्बटूर, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, नासिक, पटना, राजपुरा, सूरत और विशाखापत्तनम शामिल हैं. ये शहर अगले कुछ वर्षों में औद्योगिक और वेयरहाउसिंग मांग बढ़ाने की क्षमता रखते हैं. नेसेंट हब्स में अमरावती, गुवाहाटी, होसुर, जम्मू, जमशेदपुर, कानपुर, नागपुर, प्रयागराज, रायपुर और विजयवाड़ा शामिल हैं. इन शहरों में विकास की प्रक्रिया धीरे-धीरे शुरू होगी और नीति समर्थन, आधारभूत ढांचे और निवेशक तैयारियों पर निर्भर करेगी.

इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और रणनीतिक कॉरिडोर

भारत में औद्योगिक और वेयरहाउसिंग बाजार राष्ट्रीय नीतियों से तेजी से विकसित हो रहा है. प्रमुख पहलें औद्योगिक और फ्रेट कॉरिडोर का विस्तार, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क का निर्माण, स्मार्ट औद्योगिक शहरों का विकास और प्रमुख सागर और एयरपोर्ट विस्तार परियोजनाओं के निर्माण हैं. इन पहलों से प्राइम हब्स में ग्रेड ए वेयरहाउसिंग स्पेस की मांग 2030 तक 50 मिलियन स्क्वायर फीट पार कर सकती है और 2047 तक कुल स्टॉक लगभग 2 बिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच सकता है.

घरेलू विनिर्माण और नीति समर्थन

हाल ही में लागू BioPharma SHAKTI Scheme और Semiconductor Mission 2.0 जैसे सेक्टर-विशेष प्रोत्साहन छोटे औद्योगिक हब्स में रियल एस्टेट विकास को गति देंगे. बजट में भी घरेलू विनिर्माण क्षमताओं पर जोर दिया गया है और City Economic Regions (CER) के लिए 5,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. इसके अलावा, जीवन विज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, केमिकल्स, रियर अर्थ मिनरल्स, टेक्सटाइल आदि क्षेत्रों में फोकस्ड हस्तक्षेप लंबे समय तक वेयरहाउसिंग मांग को बढ़ावा देंगे.

औद्योगिक और वेयरहाउसिंग मांग की दिशा

भारत के शीर्ष 8 शहरों (प्राइम हब्स) में 2030 तक ग्रेड ए वेयरहाउसिंग की वार्षिक मांग 50 मिलियन स्क्वायर फीट पार करेगी और लंबी अवधि में स्टॉक लगभग 500 मिलियन स्क्वायर फीट तक बढ़ सकता है. 2047 तक कुल संभावित स्टॉक लगभग 2 बिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच सकता है. इन शहरों के अलावा इमर्जिंग और नेसेंट हब्स में निवेश के नए अवसर बनेंगे और यह संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देंगे.

दीर्घकालीन दृष्टिकोण और प्रवृत्तियाँ

भारत के औद्योगिक और वेयरहाउसिंग बाजार में अगले कुछ दशकों में तेजी से वृद्धि होगी. प्रमुख प्रवृत्तियाँ उच्च दक्षता और ऑटोमेशन, सप्लाई चेन एकीकरण, सतत विकास और टेक्नोलॉजी अपनाना, और क्षेत्रीय संतुलन और छोटे शहरों में अवसर हैं. इस प्रकार, नीति समर्थन, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और घरेलू विनिर्माण पर जोर अगले दशकों में भारत के औद्योगिक और वेयरहाउसिंग सेक्टर को मजबूत और व्यापक रूप से विकसित करेगा.

 


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