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प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक एआई मानक और ओपन कोड साझा करने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां कुछ देश और कंपनियां एआई को रणनीतिक संपत्ति मानकर बंद कमरों में विकसित कर रही हैं, वहीं भारत का मानना है कि यह तकनीक तभी मानवता के लिए लाभकारी होगी जब इसे साझा किया जाए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को डीपफेक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित दुष्प्रचार से निपटने के लिए वैश्विक मानक तय करने की जोरदार वकालत की. उन्होंने देशों से अपील की कि एआई द्वारा तैयार की गई सामग्री के लिए वॉटरमार्किंग और प्रामाणिकता संबंधी स्पष्ट नियम बनाए जाएं, ताकि डिजिटल दुनिया में भरोसा कायम रखा जा सके.
प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का उद्घाटन करते हुए कहा कि 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, जिनमें राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, बहुपक्षीय संस्थानों के प्रमुख और प्रौद्योगिकी जगत के नेता शामिल हैं, इस शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं. उन्होंने इसे दुनिया का सबसे बड़ा एआई-केंद्रित सम्मेलन बताया. फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों और यूएन के महासचिव भी इस अवसर पर उपस्थित थे.
एआई एक सभ्यतागत मोड़
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव सभ्यता के लिए वैसा ही निर्णायक मोड़ है जैसा लेखन और वायरलेस संचार का आगमन था. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इसकी तेज गति और व्यापकता को देखते हुए तत्काल सुरक्षा उपाय (गार्डरेल्स) आवश्यक हैं.
डीपफेक और फर्जी सामग्री के खुले समाजों पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि डिजिटल कंटेंट पर ‘प्रामाणिकता लेबल’ लगाए जाएं—जैसे पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर पोषण संबंधी जानकारी दी जाती है.
उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे एआई टेक्स्ट, तस्वीरें और वीडियो तैयार कर रहा है, तकनीक में शुरुआत से ही भरोसा शामिल करना होगा. वॉटरमार्किंग और स्पष्ट स्रोत मानकों से उपयोगकर्ता असली और एआई-निर्मित सामग्री में फर्क कर सकेंगे.”
ओपन कोड और साझा विकास की वकालत
प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां कुछ देश और कंपनियां एआई को रणनीतिक संपत्ति मानकर बंद कमरों में विकसित कर रही हैं, वहीं भारत का मानना है कि यह तकनीक तभी मानवता के लिए लाभकारी होगी जब इसे साझा किया जाए.
उन्होंने कहा, “ओपन कोड और साझा विकास से लाखों युवा मस्तिष्क एआई को बेहतर और सुरक्षित बना सकेंगे.” उन्होंने एआई को “ग्लोबल कॉमन गुड” के रूप में विकसित करने का आह्वान किया.
एम.ए.एन.ए.वी. दृष्टिकोण
मोदी ने एआई प्रशासन के लिए भारत का M.A.N.A.V. विजन प्रस्तुत किया.
M : Moral and Ethical Systems (नैतिक एवं आचार आधारित प्रणाली).
A : Accountable Governance (जवाबदेह शासन).
N : National Sovereignty (राष्ट्रीय संप्रभुता).
A : Accessible and Inclusive Systems (सुलभ और समावेशी प्रणाली).
V : Valid and Legitimate Frameworks (वैध और प्रमाणिक ढांचा).
उन्होंने कहा कि डेटा अपने वास्तविक स्वामी का है और एआई को कानूनसम्मत, सत्यापन योग्य और पारदर्शी निगरानी के अधीन होना चाहिए.
‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ थीम
प्रधानमंत्री ने सम्मेलन की थीम ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’, अर्थात सबके हित और सबकी खुशी बताते हुए कहा कि एआई विकास का भारतीय मानदंड समावेशन और सशक्तिकरण होगा, विशेषकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए.
उन्होंने चेतावनी दी कि व्यक्तियों को “सिर्फ डेटा बिंदु या कच्चा माल” बनाकर नहीं देखा जाना चाहिए. अंतिम नियंत्रण मानव के हाथों में ही रहना चाहिए, भले ही तकनीक को “खुला आकाश” दिया जाए.
भारत बनेगा वैश्विक एआई हब
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विश्व की एक-छठी आबादी और सबसे बड़ी युवा जनसंख्या वाला भारत एआई के भविष्य को आकार देने के लिए विशिष्ट स्थिति में है. उन्होंने देश की विशाल तकनीकी प्रतिभा और डिजिटल तकनीकों को तेजी से अपनाने की क्षमता को प्रमुख ताकत बताया.
समिट की प्रदर्शनी में कृषि, सुरक्षा, दिव्यांगजनों की सहायता और बहुभाषी सेवाओं से जुड़े एआई समाधान प्रदर्शित किए गए. प्रधानमंत्री ने इसे “मेड इन इंडिया” नवाचार का प्रमाण बताया. उन्होंने कहा कि तीन भारतीय कंपनियों ने इस अवसर पर नए एआई मॉडल और एप्लिकेशन लॉन्च किए.
रोजगार में संभावित बदलावों को लेकर चिंताओं पर उन्होंने कहा कि जैसे इंटरनेट ने दशकों पहले अकल्पनीय नौकरियां पैदा की थीं, वैसे ही एआई भी उच्च-मूल्य और रचनात्मक अवसर प्रदान करेगा. इसके लिए बड़े पैमाने पर कौशल विकास, पुनः कौशल प्रशिक्षण और आजीवन सीखने की आवश्यकता होगी.
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत सेमीकंडक्टर, चिप निर्माण और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बना रहा है, जिसे सुरक्षित डेटा केंद्रों, सशक्त आईटी ढांचे और गतिशील स्टार्टअप इकोसिस्टम का समर्थन प्राप्त है.
उन्होंने कहा, “जो भी एआई मॉडल भारत में सफल होगा, वह वैश्विक स्तर पर लागू किया जा सकता है.”
अंत में उन्होंने वैश्विक डेवलपर्स और निवेशकों को आमंत्रित करते हुए आह्वान करते हुए कहा, “भारत में डिजाइन और डेवलप करें, दुनिया को पहुँचाएँ, मानवता तक पहुँचाएँ.”
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