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सब्जियों और खाद्यान्न की महंगाई से बढ़ा दबाव, जनवरी में थोक महंगाई 1.81% पर पहुंची
जनवरी के आंकड़े संकेत देते हैं कि थोक स्तर पर महंगाई का दबाव फिर से उभर रहा है. खासकर सब्जियों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी ने स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
जनवरी में थोक महंगाई दर 10 महीनों के उच्चतम स्तर 1.81 प्रतिशत पर पहुंच गई. सब्जियों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी, साथ ही मुख्य महंगाई दर में उछाल ने थोक मूल्य सूचकांक को ऊपर धकेला है. विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक जिंस कीमतों और विनिमय दर के प्रभाव से आगे भी दबाव बना रह सकता है.
खाद्य महंगाई में तेज उछाल
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में स्थिर रहने के बाद जनवरी में खाद्य वस्तुओं की महंगाई बढ़कर 1.4 प्रतिशत हो गई, जो पिछले आठ महीनों का उच्च स्तर है. खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी ने समग्र थोक महंगाई को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
मुख्य महंगाई 38 महीने के उच्च स्तर पर
खाद्य और ईंधन को छोड़कर मापी जाने वाली मुख्य महंगाई दर जनवरी में बढ़कर 3.2 प्रतिशत हो गई, जो 38 महीनों का उच्च स्तर है. दिसंबर में यह दर 2 प्रतिशत थी. वैश्विक जिंस कीमतों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने उत्पादन लागत पर दबाव बढ़ाया है.
इक्रा के वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल के अनुसार, “वैश्विक जिंसों की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी से मुख्य सूचकांक पर दबाव बढ़ा है. जनवरी 2026 में यह क्रमिक आधार पर 1.4 प्रतिशत बढ़ा, जो 45 महीनों की सबसे तेज वृद्धि है.”
सब्जियों और अन्य खाद्य वस्तुओं का असर
आंकड़ों के मुताबिक प्राथमिक खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर में तेजी आई है. सब्जियों की कीमतों में 6.78 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. धान की कीमतें 0.89 प्रतिशत और अंडे, मांस तथा मछली की कीमतें 3.66 प्रतिशत बढ़ीं.
करीब एक साल तक गिरावट के बाद सब्जियों की महंगाई दर फिर से सकारात्मक क्षेत्र में पहुंची है. जनवरी 2025 में इसमें 8.11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी. बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार, सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण आपूर्ति की कमी और आधार प्रभाव है.
हालांकि दालों में 11.05 प्रतिशत और प्याज में 33.42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे कुल महंगाई पर कुछ हद तक संतुलन बना रहा.
खुदरा महंगाई से तुलना
इसी अवधि में नए आधार वर्ष 2024 श्रृंखला के अनुसार जनवरी में खुदरा महंगाई दर 2.75 प्रतिशत रही, जबकि उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक 2.13 प्रतिशत पर पहुंच गया. इससे स्पष्ट है कि थोक स्तर पर कीमतों का दबाव खुदरा स्तर की तुलना में अधिक तेज है.
विशेषज्ञों का अनुमान है कि प्रतिकूल आधार प्रभाव और वैश्विक जिंस कीमतों में तेजी के चलते खाद्य महंगाई में और बढ़ोतरी हो सकती है. इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव से आयात लागत भी बढ़ सकती है, जिससे आने वाले महीनों में महंगाई पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है.
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