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सरकारी हिस्सेदारी में बड़ी कटौती की तैयारी, LIC और बैंक शेयर बाजार में उतरेंगे
मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार बड़ा डिसइनवेस्टमेंट प्लान लेकर आ रही है, मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
सरकार एक बार फिर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. इस बार फोकस भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और पांच सरकारी बैंकों पर है, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी 75% से कहीं ज्यादा है. नियामकीय नियमों का पालन करते हुए और हालिया तिमाही में सरकारी बैंकों द्वारा दर्ज किए गए रेकॉर्ड मुनाफे को देखते हुए केंद्र सरकार इस अवसर का उपयोग विनिवेश के जरिए पूंजी जुटाने के लिए करना चाहती है.
सेबी नियमों के अनुरूप हिस्सेदारी घटाना जरूरी
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के अनुसार, किसी भी लिस्टेड कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी अधिकतम 75% तक ही हो सकती है. लेकिन LIC और कुछ बैंकों में यह हिस्सेदारी काफी अधिक है. इस नियम का पालन सुनिश्चित करने के लिए सरकार को अगले कुछ महीनों में अपनी हिस्सेदारी घटानी होगी.
LIC में 96.5% हिस्सेदारी, अब और हिस्सेदारी बेचने की योजना
सरकार की अभी LIC में 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है. तीन साल पहले मई 2022 में सरकार ने LIC का IPO लाकर 3.5% हिस्सेदारी बेची थी. SEBI ने LIC को कम से कम 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग की सीमा पूरी करने के लिए मई 2024 तक का समय दिया था, जिसे बाद में बढ़ाकर मई 2027 कर दिया गया. फिलहाल LIC का मार्केट कैप लगभग 5.66 लाख करोड़ रुपये है. सोमवार को बीएसई पर इसका शेयर 1.86% की गिरावट के साथ 895.60 रुपये पर ट्रेड कर रहा था.
सरकारी बैंकों ने जून तिमाही में दिया रेकॉर्ड प्रॉफिट
सरकार के इस डिसइनवेस्टमेंट प्लान के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि सरकारी बैंकों ने हाल की तिमाही में बेहतरीन प्रदर्शन किया है. जून तिमाही में सरकारी बैंकों का कुल मुनाफा 44,218 करोड़ रुपये रहा. यह पिछले साल की तुलना में 11% अधिक है. सरकार इस लाभप्रद माहौल का फायदा उठाकर अपनी हिस्सेदारी बाजार में बेचने का इरादा रखती है.
ये बैंक हैं सरकार की लिस्ट में?
नीचे दिए गए पांच बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी अभी 75% से काफी ऊपर है.
बैंक का नाम सरकार की हिस्सेदारी
इंडियन ओवरसीज बैंक 94.61%
यूको बैंक 90.95%
पंजाब एंड सिंध बैंक 93.85%
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया 89.27%
बैंक ऑफ महाराष्ट्र 79.60%
SEBI के नियमों के मुताबिक, सरकार को अगस्त 2026 तक इन बैंकों में हिस्सेदारी घटाकर 75% तक लानी होगी. फिलहाल केवल बैंक ऑफ महाराष्ट्र ही इस लक्ष्य को समय पर पूरा करने की स्थिति में दिखाई दे रहा है, जबकि अन्य बैंकों के एक साल के विस्तार की मांग करने की संभावना है.
मर्चेंट बैंकर होंगे नियुक्त, बाजार में बढ़ेगी हलचल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार इस हिस्सेदारी बिक्री को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए मर्चेंट बैंकर हायर करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है. मर्चेंट बैंकर बाजार की स्थितियों का आकलन कर सही समय और रणनीति के तहत शेयर बिक्री में मदद करेंगे.
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