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नई ग्रामीण रोजगार गारंटी की तैयारी, मनरेगा की जगह आएगा वीबी-जी राम जी विधेयक 2025

वीबी-जी राम जी विधेयक 2025 को सरकार ग्रामीण रोजगार व्यवस्था के नए युग की शुरुआत मान रही है. अधिक गारंटीड काम, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल निगरानी के जरिए यह कानून मनरेगा की कमियों को दूर करने का दावा करता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago

केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है. संसद में पेश होने जा रहा विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक 2025, करीब 20 साल पुराने मनरेगा की जगह लेगा. सरकार का दावा है कि नया कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ रोजगार, पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे को नई दिशा देगा. सरकार का मानना है कि मनरेगा 2005 की ग्रामीण परिस्थितियों के अनुसार बना था. बीते दो दशकों में ग्रामीण आय, कनेक्टिविटी, डिजिटल पहुंच और आजीविका के साधनों में बड़ा बदलाव आया है. ऐसे में पुराने ढांचे की सीमाएं सामने आईं, जिन्हें दूर करने के लिए एक आधुनिक और लक्षित फ्रेमवर्क की जरूरत महसूस हुई.

क्या है वीबी-जी राम जी विधेयक 2025

विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन, जिसे संक्षेप में वीबी-जी राम जी कहा जा रहा है, हर पात्र ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिनों के गारंटीड रोजगार का प्रावधान करता है. यह मनरेगा के 100 दिनों की गारंटी से 25 फीसदी अधिक है. योजना के तहत रोजगार को दीर्घकालिक ग्रामीण विकास से जोड़ा जाएगा.

चार प्राथमिक क्षेत्रों पर फोकस

नए विधेयक में रोजगार सृजन के लिए चार मुख्य क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है.

1. जल सुरक्षा से जुड़े कार्य.
2. कोर ग्रामीण बुनियादी ढांचा जैसे सड़क और कनेक्टिविटी.
3. आजीविका से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे स्टोरेज और बाजार.
4. चरम मौसम और जलवायु प्रभाव को कम करने वाले विशेष कार्य.

इन सभी परिसंपत्तियों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण इंफ्रा स्टैक से जोड़ा जाएगा.

मनरेगा से कैसे अलग और बेहतर

सरकार के मुताबिक यह कानून मनरेगा का अपग्रेडेड वर्जन है. इसमें रोजगार के दिन बढ़ाने के साथ रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर, पंचायत स्तर पर बेहतर योजना और राष्ट्रीय योजनाओं के साथ इंटीग्रेशन शामिल है. डिजिटल अटेंडेंस, डिजिटल पेमेंट और डेटा आधारित निगरानी से पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया गया है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को क्या फायदा

125 दिनों के गारंटीड काम से ग्रामीण परिवारों की आय में बढ़ोतरी होगी. जल और सिंचाई परियोजनाओं से कृषि उत्पादकता सुधरेगी. बेहतर सड़क, स्टोरेज और बाजार पहुंच से ग्रामीण व्यवसाय को बल मिलेगा. साथ ही पलायन में कमी और स्थानीय उपभोग बढ़ने की उम्मीद है.

किसानों और श्रमिकों के लिए क्या बदलेगा

किसानों के लिए बुवाई और कटाई के समय लेबर उपलब्धता सुनिश्चित करने को लेकर खास प्रावधान किए गए हैं. वहीं श्रमिकों को अधिक आय सुरक्षा, तय समय पर डिजिटल भुगतान और काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ते की कानूनी गारंटी मिलेगी.

फंडिंग और जिम्मेदारी का नया मॉडल

नया कानून मांग आधारित फंडिंग से हटकर स्टैंडर्ड फंडिंग मॉडल अपनाएगा. केंद्र और राज्यों के बीच लागत साझा करने की व्यवस्था होगी. सामान्य राज्यों के लिए 60:40, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100 फीसदी केंद्रीय फंडिंग का प्रावधान किया गया है.

पारदर्शिता और निगरानी के कड़े इंतजाम

विधेयक में एआई आधारित धोखाधड़ी पहचान, रियल टाइम एमआईएस डैशबोर्ड, जीपीएस आधारित निगरानी, नियमित सोशल ऑडिट और सार्वजनिक खुलासे जैसे प्रावधान शामिल हैं. इससे गबन और अनियमितताओं पर लगाम लगाने का लक्ष्य रखा गया है.

 


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