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प्री-बजट 2026: शिक्षा और स्किलिंग पर टिकी उम्मीदें, विकसित भारत के लिए इंडस्ट्री-रेडी टैलेंट पर जोर
प्री-बजट चर्चाओं से साफ है कि शिक्षा और स्किलिंग अब सिर्फ सामाजिक निवेश नहीं, बल्कि आर्थिक रणनीति बन चुकी है.
रितु राणा 3 months ago
आगामी केंद्रीय बजट 2026 से पहले शिक्षा और कौशल विकास को लेकर उद्योग जगत की उम्मीदें तेज़ होती जा रही हैं. डिजिटल इकॉनमी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तेजी से बदलते जॉब मार्केट के बीच यह सवाल अहम हो गया है कि क्या बजट भारत की युवा आबादी को भविष्य के लिए तैयार करने में निर्णायक भूमिका निभा पाएगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब फोकस केवल नामांकन बढ़ाने का नहीं, बल्कि परिणाम-उन्मुख शिक्षा, रोजगार से जुड़ी स्किलिंग और लाइफ-लॉन्ग लर्निंग का होना चाहिए.
कौशल विकास को मिले रणनीतिक प्राथमिकता
Jaro Education के सीईओ डॉ. संजय सलुंखे का कहना है कि शिक्षा को भारत की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि और विकसित भारत के विज़न के केंद्र में रखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा,
“जैसे-जैसे भारत आगामी संघीय बजट की तैयारी कर रहा है, हम उम्मीद करते हैं कि शिक्षा को देश की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि और विकसित भारत के विज़न में अहम माना जाएगा. परिणाम-उन्मुख कौशल विकास, इंडस्ट्री-संरेखित सीखने और व्यावहारिक क्षमताओं के माध्यम से कार्यबल की तैयारी बहुत जरूरी होगी.”
उनके मुताबिक, भारत की युवा और कार्यरत आबादी एक कौशल-प्रेरित और अत्यधिक प्रतिस्पर्धी जॉब मार्केट का सामना कर रही है. ऐसे में डिजिटल और ऑनलाइन शिक्षा को मजबूत समर्थन मिलने से वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए उच्च और कार्यकारी शिक्षा तक पहुंच आसान हो सकती है.
हायर एजुकेशन में ग्लोबल स्टैंडर्ड और रिसर्च की जरूरत
डॉ. सलुंखे ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए रिसर्च-आधारित लर्निंग और विश्वविद्यालय-इंडस्ट्री सहयोग को बढ़ावा देना जरूरी है. उन्होंने कहा कि, “वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पाठ्यक्रम, रिसर्च-आधारित सीखना और विश्वविद्यालय-इंडस्ट्री सहयोग बेहद जरूरी होगा, ताकि भविष्य के लिए तैयार प्रतिभा बड़े पैमाने पर विकसित हो सके.” यह दृष्टिकोण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से भी मेल खाता है, जिसमें मल्टी-डिसिप्लिनरी एजुकेशन, फ्लेक्सिबल लर्निंग और इंडस्ट्री लिंक्ड कोर्सेज पर जोर दिया गया है.
सरकारी प्रशिक्षण से आगे बढ़ने की जरूरत
Masai के सीईओ प्रतीक शुक्ला का मानना है कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकारी प्रशिक्षण योजनाओं से पूरा नहीं होगा.
उन्होंने कहा, “विकसित भारत सिर्फ सरकारी प्रशिक्षण प्रोग्राम्स से नहीं बनता. यह तभी बनता है जब कंपनियां और शैक्षणिक संस्थान अलग काम करना छोड़कर मिलकर काम करें.”
उनके अनुसार, बजट 2026 में ऐसे निवेश होने चाहिए जो वास्तविक रोजगार से जुड़े परिणाम दें. इंडस्ट्री और अकादमिक संस्थानों के बीच सह-निवेश से ऐसे कोर्स तैयार किए जा सकते हैं, जो सीधे नियोक्ताओं की जरूरतों से मेल खाते हों.
फंडिंग का आधार बदले, रिजल्ट पर हो फोकस
प्रतीक शुक्ला ने यह भी सुझाव दिया कि सरकारी फंडिंग का मॉडल बदला जाना चाहिए. उनके मुताबिक, “सरकारी फंडिंग अब सिर्फ नामांकन पर नहीं बल्कि परिणाम, प्लेसमेंट दर, वेतन प्रगति और कौशल प्रमाणन के आधार पर मिलनी चाहिए.”
यह सुझाव ऐसे समय में आया है, जब इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2024 के अनुसार भारत में केवल करीब 50 फीसदी ग्रेजुएट्स ही सीधे रोजगार योग्य माने जाते हैं.
AI, क्षेत्रीय भाषाएं और समावेशिता पर जोर
प्रतीक शुक्ला का कहना है कि बड़े पैमाने पर स्किल डिलीवरी के लिए AI-आधारित प्लेटफॉर्म्स, क्षेत्रीय भाषा कंटेंट और कम-बैंडविड्थ समाधान बेहद जरूरी हैं. खासतौर पर महिला टेक प्रोफेशनल्स, फ्रेशर्स और टियर-II व टियर-III शहरों की प्रतिभा को नए कौशल देना सिर्फ विविधता का सवाल नहीं, बल्कि देश की आर्थिक ताकत बढ़ाने का जरिया है.
रिपोर्ट्स क्या कहती हैं
आर्थिक सर्वे 2024-25 के मुताबिक, भारत की 65 फीसदी से ज्यादा आबादी कामकाजी उम्र की है. विश्व आर्थिक मंच का अनुमान है कि 2027 तक भारत में 40 फीसदी से ज्यादा स्किल्स बदल जाएंगी. वहीं, नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के अनुसार, अगले पांच साल में भारत को AI, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में करोड़ों स्किल्ड प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी.
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