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PLI स्कीम से मैन्युफैक्चरिंग में उछाल, दिसंबर 2025 तक 14 लाख से ज्यादा रोजगार सृजित
सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह योजना भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूत स्थान दिलाएगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI स्कीम का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है. दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत 14 सेक्टरों में 28,748 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की जा चुकी है. इससे 2.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आया है और 14.39 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है. सरकार का दावा है कि यह योजना देश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही है.
14 सेक्टरों में 836 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी
सरकार ने वर्ष 2021 में 1.97 लाख करोड़ रुपये के बजट प्रावधान के साथ PLI योजना की शुरुआत की थी. दिसंबर 2025 तक 14 सेक्टरों में 836 आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है. इन प्रोजेक्ट्स के जरिए 2.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित और क्रियान्वित हुआ है.
कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्रालय के अनुसार, इन सेक्टरों ने मिलकर 20.41 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कुल बिक्री दर्ज की है. वहीं 8.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात किया गया है.
इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा में बड़ी छलांग
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में PLI का सबसे बड़ा प्रभाव देखने को मिला है. 2020-21 के बाद मोबाइल फोन आयात में लगभग 77 प्रतिशत की कमी आई है. अब देश की 99 प्रतिशत से अधिक मोबाइल जरूरत घरेलू उत्पादन से पूरी हो रही है.
फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर में पहली बार 191 जरूरी दवाओं के कच्चे पदार्थों का घरेलू उत्पादन शुरू हुआ है. इससे करीब 1,785 करोड़ रुपये के आयात में कमी आई है और घरेलू हिस्सेदारी 83.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है.
ऑटो और टेलीकॉम सेक्टर को मिला बूस्ट
ऑटो सेक्टर में इलेक्ट्रिक वाहनों, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस सेफ्टी सिस्टम में निवेश बढ़ा है. वर्ष 2025-26 में 32,879 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई है. टेलीकॉम और नेटवर्किंग प्रोडक्ट्स की बिक्री 2019-20 के मुकाबले छह गुना से ज्यादा बढ़ी है. निर्यात बढ़कर 21,033 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में भी 9,200 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश वाले प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है.
घरेलू कंपोनेंट निर्माण पर फोकस
PLI योजना के तहत अब कंप्रेसर, मोटर, कॉपर ट्यूब और LED ड्राइवर जैसे अहम कंपोनेंट्स का निर्माण देश में ही होने लगा है. सरकार ने 2028-29 तक घरेलू वैल्यू एडिशन को 75 से 80 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है.
सोलर मॉड्यूल निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 48 गीगावाट उत्पादन क्षमता विकसित करने की योजना है. इसके लिए करीब 52,942 करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया गया है.
रोजगार और निर्यात में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत कुल 14.39 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं. बढ़ते निवेश और निर्यात के आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि PLI स्कीम भारत को आत्मनिर्भर और निर्यात-प्रधान अर्थव्यवस्था बनाने में अहम भूमिका निभा रही है.
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