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समय से पहले मानसून की एंट्री से लोगों को राहत, खाने की थाली भी हुई सस्ती!
Crisil की ताजा रिपोर्ट के अनुसार सब्जियों की अच्छी पैदावार और चिकन की कीमतों में गिरावट के चलते मई 2025 में आम आदमी की रसोई पर बोझ थोड़ा कम हुआ है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
इस साल भारत में मानसून समय से पहले ही पहुंच गया, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली. समय से पहले हुई बारिश का सकारात्मक असर किसानों पर भी पड़ा, जिससे सब्जियों और फलों की पैदावार में बढ़ोतरी हुई. इसका सीधा असर लोगों की थाली पर पड़ा है, खाने-पीने की वस्तुएं इस महीने सस्ती हो गई हैं. तो आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
क्रिसिल की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) की रिपोर्ट ‘रोटी राइस रेट’ के अनुसार, मई 2025 में घर में बनने वाली वेज और नॉन-वेज थालियों की लागत में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. रिपोर्ट बताती है कि यह गिरावट मुख्य रूप से सब्जियों की कीमतों में भारी कमी के कारण आई है. पिछले साल के मुकाबले इस बार सब्जियों के दाम काफी कम रहे हैं.
टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में बड़ी गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, टमाटर की कीमतों में लगभग 29 प्रतिशत की गिरावट हुई है. मई 2024 में टमाटर की कीमत 33 रुपये प्रति किलो थी, जो अब घटकर 23 रुपये प्रति किलो रह गई है. इसके अलावा, प्याज की कीमतों में 15 प्रतिशत और आलू की कीमतों में 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. पिछले साल बेमौसम बारिश और बीमारियों के कारण इन फसलों की पैदावार प्रभावित हुई थी, लेकिन इस बार स्थिति बेहतर है. खासकर आलू की फसल को पिछले साल पश्चिम बंगाल में ब्लाइट इन्फेक्शन और बारिश ने नुकसान पहुंचाया था, जबकि प्याज की कमी महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में पानी की किल्लत के चलते हुई थी.
नॉन-वेज थाली ज्यादा सस्ती हुई
क्रिसिल इकोनॉमिक रिसर्च के डायरेक्टर पुषान शर्मा ने बताया कि मई 2025 में नॉन-वेज थाली की कीमत में लगभग 2 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वेज थाली की कीमत स्थिर रही. नॉन-वेज थाली की लागत में गिरावट मुख्य रूप से ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में कमी के कारण आई है. हालांकि, टमाटर और आलू की कीमतें बढ़ीं, लेकिन प्याज के सस्ते होने से वेज थाली की कीमत में कोई खास बदलाव नहीं हुआ.
पुषान शर्मा ने यह भी बताया कि आने वाले महीनों में मौसम में संभावित बदलाव के कारण सब्जियों के दाम फिर से बढ़ सकते हैं. हालांकि, गेहूं और दालों की कीमत में थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इस बार इनका उत्पादन अच्छा हुआ है. वहीं, चावल की कीमतें बढ़ सकती हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ने से भारत का चावल निर्यात 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ सकता है.
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