होम / बिजनेस / 500 रुपये में साझेदारी: अमित शाह ने बताया ‘भारत टैक्सी’ का नया कोऑपरेटिव मॉडल
500 रुपये में साझेदारी: अमित शाह ने बताया ‘भारत टैक्सी’ का नया कोऑपरेटिव मॉडल
भारत टैक्सी का यह मॉडल आने वाले समय में देश के परिवहन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और संरचना, दोनों को नई दिशा दे सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
अमित शाह ने ‘भारत टैक्सी’ से जुड़े ड्राइवरों के साथ बातचीत में इस नए राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म के बिजनेस मॉडल को विस्तार से समझाया. उन्होंने कहा कि यह पहल ड्राइवरों को सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि महज 500 रुपये के शुरुआती निवेश के साथ मालिकाना हक भी देती है. दिल्ली में लॉन्च हुए इस कोऑपरेटिव-बेस्ड प्लेटफॉर्म का उद्देश्य पारंपरिक कमीशन आधारित मॉडल को बदलकर ड्राइवरों को सीधे मुनाफे में हिस्सेदारी देना है.
लॉन्च के बाद ड्राइवरों से सीधा संवाद
5 फरवरी को दिल्ली में ‘भारत टैक्सी’ की औपचारिक शुरुआत दो महीने के सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद की गई थी. शुरुआत में यह सेवा दिल्ली-एनसीआर और गुजरात में शुरू हुई है. सरकार का लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में इसे देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तार दिया जाए. ड्राइवरों से बातचीत के दौरान अमित शाह ने कहा, “जो मेहनत करता है, मुनाफा भी उसी को मिलना चाहिए. अब तक 30 फीसदी तक कमीशन कट जाता था और ड्राइवरों को स्थायित्व नहीं मिलता था. भारत टैक्सी में फर्क सिर्फ इतना है कि मालिक आप खुद हैं.”
500 रुपये का निवेश, मुनाफे में सीधी हिस्सेदारी
इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत, कम निवेश और मालिकाना भागीदारी है. अमित शाह ने समझाया कि ड्राइवरों को सिर्फ 500 रुपये का शुरुआती निवेश करना होगा. तीन साल बाद कंपनी के मुनाफे का वितरण इस आधार पर होगा कि टैक्सी ने कितने किलोमीटर सफर किया.
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि भारत टैक्सी 25 करोड़ रुपये कमाती है, तो उसका 20 प्रतिशत पूंजी के रूप में कंपनी के खाते में रहेगा, जबकि 80 प्रतिशत राशि ड्राइवरों के खातों में उनके काम के अनुपात में जमा की जाएगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ड्राइवरों को तय किराया तो मिलेगा ही, साथ में मुनाफे का हिस्सा भी मिलेगा, हालांकि इसके लिए शुरुआती तीन वर्षों तक धैर्य रखना होगा.
जीरो कमीशन और सर्ज-फ्री मॉडल
उबर (Uber), ओला (Ola) और रैपिडो (Rapido) जैसे बड़े खिलाड़ी फिलहाल देश के राइड-हेलिंग बाजार पर हावी हैं. इन प्लेटफॉर्म्स पर ड्राइवरों से कमीशन लिया जाता है और कई बार सर्ज प्राइसिंग भी लागू होती है. इसके उलट, भारत टैक्सी मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट, 2002 के तहत पंजीकृत है और 6 जून 2025 से संचालन में है. यह प्लेटफॉर्म जीरो-कमीशन और सर्ज-फ्री प्राइसिंग मॉडल पर काम करता है, जिससे ड्राइवरों और ग्राहकों दोनों को फायदा मिलने का दावा किया जा रहा है.
‘देसी’ विकल्प के तौर पर पेश
सरकार इसे विदेशी निवेश आधारित राइड-हेलिंग कंपनियों के विकल्प के रूप में पेश कर रही है. सहकारिता आधारित इस मॉडल का उद्देश्य ड्राइवरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें व्यवसाय में भागीदार बनाना है. अमित शाह ने बातचीत के दौरान दोहराया कि “हमारा मकसद मालिकों को अमीर बनाना है, लेकिन यहां मालिक आप हैं.”
टैग्स