कंपनी का घाटा मार्च 2022 के बाद के वर्ष के लिए अपने बैंकरों द्वारा उपलब्ध कराए गए Addendum के अनुसार घटकर 18.9 बिलियन रुपये रह गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
नई दिल्लीः हॉस्पिटेलिटी एंड ट्रैवल टेक फर्म, ओयो (OYO) ने सोमवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के साथ अपने पहले जमा किए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में एक परिशिष्ट (Addendum) दाखिल किया है. इसमें कंपनी ने लागत के बाद अपने शेयर बाजार की शुरुआत के लिए अपनी योजनाओं को पुनर्जीवित करने के बारे में डिटेल्स दी हैं. क्योंकि लोगों द्वारा यात्रा करने और होटल बुकिंग में सुधार की वजह से घाटे में कमी आई है.
इतना रह गया है कंपनी का घाटा
अपने आईपीओ फाइलिंग Addendum में, ओयो ने वित्त वर्ष 23 की जून तिमाही के लिए नुकसान और बिक्री में संशोधन दिखाते हुए नए नंबर्स जारी किए हैं. कंपनी का घाटा मार्च 2022 के बाद के वर्ष के लिए अपने बैंकरों द्वारा उपलब्ध कराए गए Addendum के अनुसार घटकर 18.9 बिलियन रुपये रह गया है.
वित्त वर्ष 2020 में समायोजित सकल लाभ मार्जिन 9.7 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2021 में 33.2 प्रतिशत हो गया. इसके अलावा, वित्त वर्ष 2020 से 2021 तक इसके EBITDA घाटे में 79 प्रतिशत की कमी आई है. वित्तीय वर्ष 2023 की जून तिमाही के दौरान EBITDA को और कम किया गया और अपनी पहली सकारात्मक मुनाफे को रजिस्टर किया है. जबकि वित्तीय वर्ष 2021 से 2022 में, परिचालन से Oyo का राजस्व 2021 में 3,961.6 करोड़ रुपये से 21 फीसदी बढ़कर 4,781.4 करोड़ रुपये हो गया था.
अक्टूबर में आएगा आईपीओ
इससे पहले, Oyo ने अक्टूबर में अपनी आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) के लिए अपना DRHP दाखिल किया था. DRHP के अनुसार, कंपनी के प्रस्तावित इश्यू में 7,000 करोड़ रुपये तक के इक्विटी शेयरों के साथ-साथ 1,430 करोड़ रुपये की बिक्री की पेशकश की गई थी.
कंपनी ने कहा कि सार्वजनिक निर्गम से प्राप्त राशि का उपयोग पूर्व भुगतान या पुनर्भुगतान के लिए किया जाएगा. ओयो जिसे 2012 में शुरू किया गया था, अब 2023 की शुरुआत में एक प्रारंभिक शेयर बिक्री का विकल्प चुनेगी. यह स्टार्टअप वर्तमान में चार मुख्य क्षेत्रों: भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया और यूरोप में केंद्रित है और इसने अमेरिका और चीन जैसे बाजारों में अपने संचालन को रोक दिया है.
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मई के 5% के मुकाबले जून में औद्योगिक वृद्धि तेज, बाजार अनुमान 5.6% से भी बेहतर रहा आंकड़ा; इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और ऑटो सेक्टर ने दिया बड़ा योगदान
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की औद्योगिक गतिविधियों में जून 2026 में जोरदार तेजी देखने को मिली है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून में भारत का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) 7.3 फीसदी की दर से बढ़ा है. यह वृद्धि मई में दर्ज 5 फीसदी की ग्रोथ के मुकाबले काफी बेहतर है और बाजार के 5.6 फीसदी के अनुमान से भी ऊपर रही है.
औद्योगिक उत्पादन में इस तेज उछाल के पीछे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन और बिजली व गैस आपूर्ति क्षेत्र में आई तेजी प्रमुख कारण रहे. आंकड़े बताते हैं कि देश में घरेलू मांग और औद्योगिक गतिविधियों में लगातार मजबूती बनी हुई है.
मैन्युफैक्चरिंग और पावर सेक्टर ने संभाली कमान
NSO के आंकड़ों के अनुसार, जून में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 7.8 फीसदी रही. वहीं, बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र ने 10.6 फीसदी की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की. इसके अलावा वाटर सप्लाई, सीवरेज और वेस्ट मैनेजमेंट सेक्टर में 6.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि खनन और उत्खनन (Mining & Quarrying) क्षेत्र में 1 फीसदी की मामूली वृद्धि दर्ज की गई.
23 में से 19 उद्योग समूहों में रही बढ़त
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के प्रदर्शन पर नजर डालें तो जून 2026 में 23 प्रमुख उद्योग समूहों में से 19 ने जून 2025 की तुलना में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की. इस दौरान इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट निर्माण क्षेत्र ने सबसे शानदार प्रदर्शन किया और इसमें 34 फीसदी की रिकॉर्ड ग्रोथ दर्ज की गई. इसके बाद मोटर वाहन, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर उद्योग में 17.5 फीसदी की वृद्धि रही. वहीं, फूड प्रोडक्ट सेक्टर में 10.8 फीसदी की तेजी दर्ज की गई.
मजबूत घरेलू मांग का संकेत
बजाज ब्रोकिंग के फंडामेंटल एनालिस्ट शाश्वत सिंह ने कहा कि जून में 7.3 फीसदी की IIP ग्रोथ बाजार की उम्मीदों से बेहतर रही है. उनके मुताबिक, यह आंकड़ा दिखाता है कि देश में घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी जारी है.
उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, कैपिटल गुड्स और इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स जैसे क्षेत्रों में लगातार बढ़ोतरी देश में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश माहौल का संकेत देती है.
नई IIP सीरीज के आधार पर जारी हुए आंकड़े
जून के IIP आंकड़े सरकार की नई सीरीज पर आधारित हैं, जिसमें आधार वर्ष (Base Year) 2022-23 रखा गया है. नई व्यवस्था में औद्योगिक उत्पादन की गणना के लिए पहले इस्तेमाल किए जाने वाले थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की जगह आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (Output PPI) को शामिल किया गया है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव से औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े पहले की तुलना में ज्यादा सटीक, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो गए हैं.
स्काईरूट के विक्रम-1 मिशन की सफलता के बाद स्वदेशी सेमीकंडक्टर इंटीग्रेशन पर बढ़ा फोकस, भारत के निजी स्पेस सेक्टर को मिलेगी नई रफ्तार
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत जल्द ही अपने अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों (Space Launch Vehicles) में देश में बने सेमीकंडक्टर चिप्स का इस्तेमाल करेगा. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को निजी स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के प्रमुखों से मुलाकात के बाद इसकी जानकारी दी.
वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “‘मेड इन भारत’ चिप्स हमारे रॉकेट्स के लिए... जल्द ही!” यह घोषणा स्काईरूट के विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 की सफलता के बाद आई है, जिसने 18 जुलाई को सफलतापूर्वक कक्षा (Orbit) में प्रवेश किया था. यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट मिशन था.
भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा
अश्विनी वैष्णव की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस ने कहा कि भारत का डीप-टेक इकोसिस्टम तेजी से आगे बढ़ रहा है. कंपनी ने इसके लिए सरकार के सुधारों, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और इनोवेशन के प्रति प्रतिबद्धता को अहम बताया.
स्काईरूट ने कहा, "भारत से वैश्विक स्तर की स्पेस टेक्नोलॉजी तैयार करने में योगदान देना हमारे लिए गर्व की बात है. हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब भारत में बने चिप्स हमारे रॉकेट्स में उड़ान भरेंगे."
पीएम मोदी ने भी की स्काईरूट के संस्थापकों से मुलाकात
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापकों पवन चंदना और नागा भरत डाका से मुलाकात की थी. इस दौरान विक्रम-1 मिशन की सफलता और भारत के निजी स्पेस सेक्टर के भविष्य पर चर्चा हुई.
प्रधानमंत्री मोदी ने X पर पोस्ट कर इस मुलाकात को "बेहतरीन बातचीत" बताया. उन्होंने कहा कि विक्रम-1 की सफलता चर्चा का प्रमुख विषय रही. उन्होंने स्काईरूट के संस्थापकों की यात्रा और अंतरिक्ष क्षेत्र के भविष्य को लेकर उनके विचारों का भी जिक्र किया. मोदी ने कहा, "उनकी ऊर्जा, महत्वाकांक्षा और सकारात्मक सोच भारत के निजी स्पेस इकोसिस्टम की जीवंतता को दर्शाती है. स्काईरूट की पूरी टीम को शुभकामनाएं."
विक्रम-1 ने रचा नया इतिहास
स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 मिशन 18 जुलाई को सफल रहा था. यह भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट की पहली उड़ान थी. मिशन के दौरान रॉकेट ने अपना अंतिम बर्न पूरा किया और पेलोड को करीब 450 किलोमीटर की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया.
इस सफलता के साथ भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास निजी कंपनियों द्वारा विकसित ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता मौजूद है. विक्रम-1 मिशन को भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका
सरकार की अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने की नीति के बाद स्काईरूट जैसी कंपनियां भारत के स्पेस इकोसिस्टम में अहम भूमिका निभा रही हैं. स्वदेशी चिप निर्माण और रॉकेट टेक्नोलॉजी के एकीकरण से भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
घरेलू खिलौना विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा. वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, रोजगार सृजन और 'मेड इन इंडिया' खिलौनों की पहुंच मजबूत करने पर रहेगा फोकस
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने भारत के खिलौना उद्योग को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने 2032 तक वैश्विक खिलौना बाजार में भारत की हिस्सेदारी 1.9 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी करने का लक्ष्य तय किया है. इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए केंद्र ने एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जो घरेलू खिलौना विनिर्माण को मजबूत करने और उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर काम करेगी.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को खिलौना उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान इस पहल की घोषणा की. आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि टास्क फोर्स उद्योग को आवश्यक सहयोग देने के साथ-साथ ऐसे उपायों की पहचान करेगी, जिनसे 2032 तक भारत वैश्विक खिलौना बाजार में 5 फीसदी हिस्सेदारी हासिल कर सके.
छह प्रमुख क्षेत्रों पर होगा फोकस
सरकार की ओर से गठित टास्क फोर्स छह रणनीतिक क्षेत्रों पर काम करेगी. इनमें भारतीय निर्माताओं को वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़ना, घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना, सप्लाई और वैल्यू चेन की बाधाओं को दूर करना, कुशल कार्यबल और रोजगार के अवसर बढ़ाना, डिजाइन एवं नवाचार को प्रोत्साहन देना तथा कारोबार करने में आसानी को बेहतर बनाना शामिल है.
उद्योग से मजबूत घरेलू इकोसिस्टम बनाने की अपील
पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से उन्नत तकनीक, वैश्विक गुणवत्ता मानकों, गहरे स्थानीयकरण और मजबूत ब्रांड निर्माण के आधार पर व्यापक घरेलू विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि भारत के खिलौना उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा.
21,000 से अधिक MSMEs हैं सक्रिय
सरकार के अनुसार, भारत के खिलौना उद्योग में फिलहाल 21,000 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) कार्यरत हैं. इसके अलावा, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) से मान्यता प्राप्त 770 से अधिक स्टार्टअप, करीब 50 टॉय क्लस्टर और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से प्रमाणित 1,800 से अधिक लाइसेंस धारक इस क्षेत्र में सक्रिय हैं.
वैश्विक वैल्यू चेन में बढ़ेगी भारत की भागीदारी
सरकार का मानना है कि नई टास्क फोर्स के गठन से भारतीय खिलौना उद्योग का वैश्विक वैल्यू चेन से जुड़ाव तेज होगा. इससे घरेलू विनिर्माण क्षमता मजबूत होगी, उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और 'मेड इन इंडिया' खिलौनों की वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी.
Hugging Face साइबर हमले के बाद उठाया कदम. Adobe, Dell, CrowdStrike समेत कई कंपनियां हुईं शामिल, AI सुरक्षा के लिए ओपन-सोर्स टूल्स विकसित किए जाएंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिकी चिप निर्माता एनवीडिया (Nvidia) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से 'Open Secure AI Alliance' की शुरुआत की है. यह उद्योग गठबंधन AI सुरक्षा और गवर्नेंस के लिए ओपन-सोर्स टूल्स विकसित और साझा करेगा. हाल ही में Hugging Face पर हुए साइबर हमले के बाद AI एजेंट्स की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच इस पहल की घोषणा की गई है.
यह गठबंधन टेक्नोलॉजी कंपनियों, AI डेवलपर्स और साइबर सिक्योरिटी फर्मों को एक मंच पर लाता है, ताकि ऐसे टूल्स विकसित किए जा सकें जो संगठनों को AI सिस्टम की बेहतर निगरानी और सुरक्षा में मदद करें. यह घोषणा 24 जुलाई को Nvidia, OpenAI और अन्य प्रमुख टेक कंपनियों द्वारा ओपन-वेट AI मॉडल के समर्थन में जारी खुले पत्र के कुछ ही दिनों बाद की गई है.
Adobe, Dell और CrowdStrike समेत कई कंपनियां शामिल
Open Secure AI Alliance के संस्थापक सदस्यों में Adobe, CrowdStrike, Dell Technologies, Hugging Face, Nvidia और अन्य उद्योग भागीदार शामिल हैं. यह गठबंधन मिलकर ऐसे ओपन-सोर्स टूल्स तैयार करेगा, जिनसे पूरे AI उद्योग में सुरक्षा और गवर्नेंस को बेहतर बनाया जा सके.
एनवीडिया के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य AI एजेंट्स के परीक्षण, ट्रैकिंग, समीक्षा और गवर्नेंस की प्रक्रिया को सरल बनाना है, ताकि तेजी से स्वायत्त (Autonomous) होते AI सिस्टम पर बेहतर नियंत्रण और निगरानी रखी जा सके.
Hugging Face हैक के बाद बढ़ी सुरक्षा की चिंता
हाल ही में Hugging Face पर हुए साइबर हमले ने स्वायत्त AI एजेंट्स से जुड़े संभावित जोखिमों को उजागर किया. इस घटना ने यह संकेत दिया कि बड़े पैमाने पर AI एप्लिकेशन अपनाने वाले संगठनों के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा उपाय अपनाना अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है.
ओपन-वेट AI मॉडल को मिलेगा बढ़ावा
यह गठबंधन 24 जुलाई को जारी उस खुले पत्र के बाद सामने आया है, जिसमें Nvidia, OpenAI और अन्य टेक कंपनियों ने ओपन-वेट AI मॉडल का समर्थन किया था. पत्र में कहा गया था कि ओपन फ्रंटियर AI सिस्टम पर अत्यधिक प्रतिबंध लगाने से सुरक्षा क्षमताएं कमजोर हो सकती हैं और AI क्षेत्र की शक्ति कुछ बंद (Closed) AI प्रदाताओं तक सीमित हो सकती है.
ओपन-सोर्स रिसर्च में देगा योगदान Nvidia
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Nvidia इस पहल के तहत अपने ओपन मॉडल, मॉडल वेट्स, डेटा और एजेंट हार्नेस रिसर्च उपलब्ध कराएगा. इसके अलावा कंपनी GitHub पर हाल ही में जारी अपने 'Nvidia Labs Object-Oriented Agent' ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट को भी इस गठबंधन का हिस्सा बनाएगी.
कंपनी का कहना है कि Open Secure AI Alliance ऐसे ओपन-सोर्स AI सुरक्षा टूल्स विकसित करेगा, जिनकी मदद से AI एजेंट्स का परीक्षण, ट्रैकिंग, समीक्षा और गवर्नेंस पहले की तुलना में अधिक आसान और प्रभावी हो सकेगा.
Q1FY27 में HUL का शुद्ध मुनाफा 3% घटकर ₹2,673 करोड़ रहा, हालांकि कंपनी का राजस्व 10% बढ़ा; होम केयर कारोबार ने दर्ज की तीन साल की सबसे तेज ग्रोथ
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) के शेयरों में मंगलवार को तेज गिरावट देखने को मिली. जून 2026 तिमाही (Q1FY27) के कमजोर नतीजों के बाद निवेशकों ने कंपनी के शेयरों में बिकवाली की, जिससे शुरुआती कारोबार में स्टॉक 5 फीसदी से ज्यादा फिसल गया. बाजार की उम्मीदों के मुकाबले कंपनी का मुनाफा कमजोर रहने से सेंटीमेंट प्रभावित हुआ.
सुबह करीब 10:32 बजे HUL का शेयर 3.27 फीसदी की गिरावट के साथ ₹2,105 पर कारोबार कर रहा था. वहीं, खबर लिखे जाने तक यह 5.58 फीसदी टूटकर ₹2,053.30 के इंट्राडे लो तक पहुंच गया. वहीं, इस दौरान निफ्टी 50 करीब सपाट रुख के साथ 23,999.50 के स्तर पर था.
मुनाफे में आई गिरावट, राजस्व में बढ़ोतरी
HUL का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा (PAT) जून तिमाही में सालाना आधार पर 3 फीसदी घटकर ₹2,673 करोड़ रह गया. पिछले साल इसी अवधि में कंपनी का मुनाफा ₹2,756 करोड़ था. कंपनी ने बताया कि पिछले साल मिले वन-टाइम टैक्स क्रेडिट के कारण इस बार मुनाफे की तुलना प्रभावित हुई है.
बाजार को उम्मीद थी कि कंपनी का तिमाही मुनाफा करीब 9-10 फीसदी बढ़ेगा और ऑपरेटिंग मार्जिन लगभग 23 फीसदी के आसपास बना रहेगा. हालांकि, वास्तविक नतीजे इन अनुमानों से कमजोर रहे. वहीं, कंपनी के परिचालन से राजस्व में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई. जून तिमाही में HUL की आय 10.1 फीसदी बढ़कर ₹17,341 करोड़ हो गई, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹15,757 करोड़ थी.
EBITDA मार्जिन में मामूली गिरावट
कंपनी का EBITDA जून तिमाही में 8.4 फीसदी बढ़कर ₹3,947 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹3,640 करोड़ था. हालांकि, EBITDA मार्जिन 23.4 फीसदी से घटकर 23 फीसदी रह गया, यानी इसमें 40 बेसिस प्वाइंट की कमी आई.
तिमाही के दौरान कंपनी पर ₹75 करोड़ का नेट एक्सेप्शनल चार्ज दर्ज हुआ. इसमें ₹115 करोड़ का रिस्ट्रक्चरिंग खर्च शामिल था, जबकि अतिरिक्त संपत्तियों की बिक्री से ₹45 करोड़ का लाभ मिला.
होम केयर कारोबार ने दिखाया मजबूत प्रदर्शन
HUL के होम केयर कारोबार ने जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया. इस सेगमेंट में 14 फीसदी की अंडरलाइंग सेल्स ग्रोथ (USG) दर्ज की गई, जो पिछले तीन वर्षों की सबसे तेज वृद्धि है. फैब्रिक वॉश कैटेगरी में दो अंकों की वृद्धि देखने को मिली. बार और पाउडर डिटर्जेंट की बिक्री मजबूत रही, जबकि लिक्विड डिटर्जेंट की मांग में भी तेजी आई. वहीं, हाउसहोल्ड केयर कारोबार में विम लिक्विड की बिक्री बढ़ने से अच्छी ग्रोथ दर्ज हुई.
ब्यूटी और वेलबीइंग कारोबार में 12% वृद्धि
कंपनी के ब्यूटी एंड वेलबीइंग कारोबार में जून तिमाही में 12 फीसदी की वृद्धि हुई. हेयर केयर सेगमेंट में प्रीमियम उत्पादों और नए फॉर्मेट की वजह से दो अंकों की ग्रोथ दर्ज की गई. स्किन केयर और कलर कॉस्मेटिक्स कारोबार में भी अच्छी मांग देखने को मिली. कंपनी के मिनिमलिस्ट ब्रांड ने भी दो अंकों की वृद्धि दर्ज की. इस दौरान HUL ने Liquid I.V. का शुगर-फ्री वैरिएंट और Vaseline Gluta Hya Smoothening Body Lotion लॉन्च किया.
पर्सनल केयर और फूड्स कारोबार में भी बढ़त
पर्सनल केयर कारोबार में 4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. कंपनी ने बताया कि लगातार दूसरे साल पाम ऑयल की ऊंची कीमतों का असर इस सेगमेंट पर रहा. ओरल केयर कारोबार में Closeup White Now, Pepsodent Gum Care और Sensitive Care जैसे प्रीमियम उत्पादों की मांग मजबूत रही.
वहीं, फूड्स कारोबार में 7 फीसदी की वृद्धि हुई. कॉफी कारोबार ने दो अंकों की ग्रोथ दर्ज की, जबकि Bru Gold और रेडी-टू-ड्रिंक उत्पादों की मांग बढ़ी. Boost ने पहली बार ₹1,000 करोड़ के सालाना कारोबार का आंकड़ा पार किया.
HUL शेयर का प्रदर्शन कमजोर
HUL के शेयर का प्रदर्शन पिछले कुछ समय से दबाव में रहा है. पिछले एक साल में कंपनी का शेयर करीब 13.95 फीसदी गिर चुका है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 में 2.68 फीसदी की गिरावट आई. तीन साल के दौरान HUL के शेयर में करीब 18.71 फीसदी की गिरावट रही, जबकि निफ्टी 50 ने इसी अवधि में 22.26 फीसदी का रिटर्न दिया है.
HUL की सीईओ और प्रबंध निदेशक प्रिया नायर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती बनाए रखी है. उन्होंने कहा कि कंपनी ने चालू तिमाही में 10 फीसदी की अंडरलाइंग सेल्स ग्रोथ दर्ज की, जिसमें वॉल्यूम और कीमत दोनों का योगदान रहा.
उन्होंने बताया कि यह पिछले 13 तिमाहियों में कंपनी की सबसे तेज बिक्री वृद्धि में से एक है. प्रिया नायर के मुताबिक, मजबूत ब्रांड पोर्टफोलियो, बेहतर वितरण नेटवर्क और उत्पादों में लगातार निवेश कंपनी की ग्रोथ रणनीति का अहम हिस्सा हैं.
शिपरॉकेट और डेलॉइट की रिपोर्ट में दावा, वर्नाक्युलर कॉमर्स और एआई-पावर्ड पर्सनलाइजेशन बनेंगे डिजिटल शॉपिंग के भविष्य की कुंजी
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का ई-कॉमर्स बाजार आने वाले वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ने वाला है. शिपरॉकेट और डेलॉइट की नई रिपोर्ट के मुताबिक, देश का ऑनलाइन कॉमर्स बाजार 2025 के करीब 90 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 250 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), पर्सनलाइज्ड शॉपिंग अनुभव और क्षेत्रीय भाषाओं पर आधारित कॉमर्स इस ग्रोथ को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे.
"AI फॉर भारत कॉमर्स: $250 बिलियन बिजनेस अवसर को अनलॉक करना" नाम से जारी इस रिपोर्ट में भारत के ई-कॉमर्स सेक्टर के अगले विकास चरण का विश्लेषण किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, एआई-पावर्ड डिस्कवरी, स्मार्ट चेकआउट सिस्टम और फुलफिलमेंट इनोवेशन ग्राहकों के ऑनलाइन शॉपिंग अनुभव को पूरी तरह बदल सकते हैं.
98% इंटरनेट यूजर्स इंडिक भाषाओं में देखते हैं कंटेंट
रिपोर्ट में भारत के डिजिटल कॉमर्स में क्षेत्रीय भाषाओं की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया गया है. इसके मुताबिक, देश में 488 मिलियन ग्रामीण इंटरनेट यूजर्स हैं, जो भारत की कुल सक्रिय इंटरनेट आबादी का 55 फीसदी हिस्सा हैं. वहीं, 98 फीसदी भारतीय इंटरनेट यूजर्स इंडिक भाषाओं में कंटेंट देखते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, वर्नाक्युलर वॉयस क्वेरी अंग्रेजी की तुलना में 156 फीसदी तेजी से बढ़ रही हैं. ऐसे में कंपनियों के लिए क्षेत्रीय भाषाओं पर आधारित कॉमर्स अनुभव तैयार करना जरूरी हो गया है.
टियर-2 और टियर-3 शहरों से मिल रही ई-कॉमर्स को मजबूती
रिपोर्ट में बताया गया है कि टियर-2 और टियर-3 शहर भारत के ऑनलाइन शॉपर्स का 60 फीसदी से अधिक हिस्सा रखते हैं. यह आंकड़ा दिखाता है कि देश के छोटे शहर डिजिटल कॉमर्स के विस्तार में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.
एआई पर्सनलाइजेशन से बढ़ सकता है कन्वर्जन
रिपोर्ट के मुताबिक, एआई आधारित पर्सनलाइजेशन से ग्राहकों के व्यवहार को समझकर बेहतर प्रोडक्ट रिकमेंडेशन, कन्वर्सेशनल कॉमर्स और विजुअल डिस्कवरी जैसी सुविधाएं दी जा सकती हैं. एआई-ड्रिवन पर्सनलाइजेशन से कन्वर्जन रेट 2.1 गुना तक बढ़ सकता है, जबकि बेहतर कस्टमर एंगेजमेंट और रिपीट खरीदारी से एवरेज ऑर्डर वैल्यू में 3.4 गुना तक सुधार संभव है.
ई-कॉमर्स के भविष्य को आकार देंगे तीन बड़े ट्रेंड
रिपोर्ट में भारतीय कॉमर्स के भविष्य को प्रभावित करने वाले तीन प्रमुख ट्रेंड बताए गए हैं.
1. एआई-पावर्ड पर्सनलाइजेशन: एडवांस्ड एआई मॉडल और जेनरेटिव एआई ग्राहकों को उनकी पसंद के अनुसार शॉपिंग अनुभव देने में मदद करेंगे.
2. कन्वर्जन इंटेलिजेंस: एआई आधारित रिकमेंडेशन, प्रेडिक्टिव एनालिसिस और स्मार्ट कस्टमर एंगेजमेंट से ब्रांड्स बिक्री, ग्राहक बनाए रखने की क्षमता और मुनाफे में सुधार कर सकेंगे.
3. भारत-लेड डिजिटल एडॉप्शन: ग्रामीण इंटरनेट विस्तार, डिजिटल कनेक्टिविटी और इंडिक भाषा कंटेंट की बढ़ती मांग से भारत का डिजिटल कॉमर्स बाजार और व्यापक होगा.
90% उपभोक्ताओं ने माना, एआई से बेहतर हुआ शॉपिंग अनुभव
रिपोर्ट के अनुसार, 90 फीसदी भारतीय उपभोक्ताओं का मानना है कि जेनरेटिव एआई ने उनके ऑनलाइन शॉपिंग अनुभव को बेहतर बनाया है. यह आंकड़ा दिखाता है कि ग्राहक एआई आधारित कॉमर्स समाधानों को तेजी से स्वीकार कर रहे हैं.
शिपरॉकेट के एमडी और सीईओ साहिल गोयल ने कहा कि भारत का ई-कॉमर्स सेक्टर अपने अगले विकास चरण में प्रवेश कर रहा है और इस बदलाव में टेक्नोलॉजी की भूमिका अहम होगी. उन्होंने कहा कि कंपनियों को एआई में निवेश करने के साथ-साथ अपनी फुलफिलमेंट क्षमताओं को मजबूत करना होगा ताकि मेट्रो शहरों के साथ-साथ उभरते बाजारों के ग्राहकों की जरूरतों को पूरा किया जा सके.
डेलॉइट इंडिया के पार्टनर और कंज्यूमर इंडस्ट्री लीडर डॉ. आनंद रमणाथन ने कहा कि भारत के कॉमर्स बाजार में सफलता केवल एआई अपनाने से नहीं मिलेगी, बल्कि कंपनियों को इसे सही रणनीति, गति और अनुशासन के साथ लागू करना होगा.
रिपोर्ट में इंडस्ट्री रिसर्च, बाजार के रुझानों और शिपरॉकेट की कॉमर्स इनसाइट्स के आधार पर बताया गया है कि एआई भारत में प्रोडक्ट डिस्कवरी, ग्राहक जुड़ाव, फुलफिलमेंट और पूरे कॉमर्स अनुभव को नया रूप दे रहा है.
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में बताया कि असेसमेंट ईयर 2025-26 में 576 लोगों ने ₹100 करोड़ से अधिक की सकल आय घोषित की. पांच साल पहले यह संख्या सिर्फ 142 थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में ₹100 करोड़ से अधिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या पिछले पांच असेसमेंट वर्षों में चार गुना से अधिक बढ़ गई है. संसद में सरकार की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, असेसमेंट ईयर (AY) 2025-26 में 576 व्यक्तियों ने ₹100 करोड़ से अधिक की सकल कुल आय (Gross Total Income) घोषित की. AY 2021-22 में यह संख्या केवल 142 थी.
लोकसभा में एक लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि AY 2022-23 में ऐसे करदाताओं की संख्या बढ़कर 301 हो गई थी. इसके बाद AY 2023-24 में यह घटकर 284 रही, जबकि AY 2024-25 में फिर बढ़कर 415 पहुंच गई. अब AY 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 576 हो गया है.
अल्ट्रा हाई-इनकम टैक्सपेयर्स की संख्या में तेज बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि साल-दर-साल कुछ उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में बेहद अधिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे आयकर अनुपालन (Tax Compliance) में सुधार, डिजिटल सिस्टम का विस्तार और आयकर विभाग की तकनीक आधारित निगरानी बड़ी वजह है.
नहीं दी गई सेक्टर और आय के स्रोत की जानकारी
सरकार ने यह नहीं बताया कि ₹100 करोड़ से अधिक आय घोषित करने वाले ये करदाता किन क्षेत्रों से जुड़े हैं या उनकी आय के प्रमुख स्रोत क्या हैं. इसके अलावा क्षेत्रवार (Region-wise) आंकड़े भी साझा नहीं किए गए.
लगातार बढ़ रहा है प्रत्यक्ष करदाताओं का दायरा
हाल के वर्षों में देश का प्रत्यक्ष कर आधार (Direct Tax Base) लगातार मजबूत हुआ है. आयकर विभाग ने फेसलेस असेसमेंट, डिजिटल रिपोर्टिंग, डेटा एनालिटिक्स और ई-फाइलिंग प्रणाली के विस्तार जैसे कई कदम उठाए हैं, जिससे कर अनुपालन में सुधार हुआ है.
सरकार का कहना है कि डिजिटल पहल और डेटा आधारित निगरानी के जरिए करदाताओं का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है. ₹100 करोड़ से अधिक आय घोषित करने वाले लोगों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि उच्च आय वर्ग में आय की रिपोर्टिंग और औपचारिक कर व्यवस्था, दोनों का विस्तार हो रहा है.
InterGlobe Aviation की बोर्ड बैठक में किरण थडिमर्री को नया मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) नियुक्त किया गया है. वहीं, कंपनी ने कुछ आयातित सामान पर कस्टम ड्यूटी, ब्याज और जुर्माने से जुड़े आदेश को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) का संचालन करने वाली इंटरग्लोब एविएशन (InterGlobe Aviation) ने सोमवार को शीर्ष प्रबंधन में बड़ा बदलाव किया है. कंपनी ने किरण थडिमर्री को नया मुख्य वित्तीय अधिकारी (Chief Financial Officer-CFO) नियुक्त किया है. वह वर्तमान CFO गौरव नेगी की जगह लेंगे, जिन्हें अब प्रबंध निदेशक (MD) का सलाहकार नियुक्त किया गया है. यह नियुक्तियां 28 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगी.
कंपनी के बोर्ड ने 27 जुलाई को हुई बैठक में इन नियुक्तियों को मंजूरी दी. वर्तमान में डिप्टी CFO के पद पर कार्यरत किरण थडिमर्री 28 जुलाई से कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी के साथ-साथ प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक (Key Managerial Personnel) की जिम्मेदारी भी संभालेंगे.
दो दशक से अधिक का वित्तीय अनुभव
चार्टर्ड अकाउंटेंट किरण थडिमर्री के पास वित्तीय क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव है. उन्होंने ट्रेजरी, फाइनेंशियल प्लानिंग, निवेशक संबंध (Investor Relations), टैक्सेशन, ऑडिट और पूंजी जुटाने जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व किया है. InterGlobe Aviation से पहले वह Udaan और Genworks Health में वरिष्ठ पदों पर कार्य कर चुके हैं. Genworks Health में उन्होंने सह-संस्थापक (Co-founder) और CFO के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई. इसके अलावा उन्होंने General Electric (GE) में 13 वर्षों से अधिक समय तक विभिन्न वित्तीय भूमिकाओं में काम किया है.
कस्टम विभाग के आदेश को देगी चुनौती
एक अलग नियामकीय खुलासे में कंपनी ने बताया कि नई दिल्ली के प्रधान आयुक्त (कस्टम) ने कुछ आयातित सामान के वर्गीकरण (Classification) में बदलाव करते हुए कस्टम ड्यूटी, ब्याज और जुर्माने का भुगतान करने का आदेश दिया है. यह मामला अप्रैल 2020 से मार्च 2024 के बीच किए गए कुछ आयातों से जुड़ा है. आदेश में कस्टम ड्यूटी और ब्याज के अलावा ₹1.14 करोड़ से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया है.
कंपनी ने आदेश से जताई असहमति
InterGlobe Aviation ने कहा कि वह इस आदेश से सहमत नहीं है और इसके खिलाफ सक्षम अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर करेगी. कंपनी उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेगी. एयरलाइन का कहना है कि इस कस्टम विवाद का उसके वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार या परिचालन पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है.
परीक्षण के तौर पर जारी होंगे 10 और 20 रुपये के एक-एक अरब पॉलिमर नोट. सफल ट्रायल के बाद इन्हें नियमित रूप से जारी करने पर फैसला लिया जाएगा, हालांकि मौजूदा कागजी नोट प्रचलन में बने रहेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में जल्द ही ₹10 और ₹20 के नए पॉलिमर (प्लास्टिक) बैंक नोट देखने को मिल सकते हैं. केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को इन दोनों मूल्यवर्ग के एक-एक अरब पॉलिमर नोट परीक्षण के तौर पर जारी करने की मंजूरी दे दी है. यदि फील्ड ट्रायल सफल रहता है, तो RBI इन्हें नियमित रूप से प्रचलन में ला सकता है. हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि पारंपरिक कागज के नोट पूरी तरह बंद नहीं किए जाएंगे और दोनों तरह के नोट साथ-साथ चलेंगे.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि RBI के केंद्रीय बोर्ड ने भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत ₹10 और ₹20 के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव सरकार को भेजा था. सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.
कागजी नोटों की जगह नहीं लेंगे पॉलिमर नोट
सरकार के अनुसार, पॉलिमर बैंक नोट मौजूदा कपास की लुगदी और पादप फाइबर से बने कागजी नोटों के साथ ही जारी किए जाएंगे. फिलहाल पारंपरिक बैंक नोटों को पूरी तरह पॉलिमर नोटों से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है.
क्यों लाए जा रहे हैं पॉलिमर नोट?
RBI का मानना है कि पॉलिमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं और इनकी उम्र भी काफी लंबी होती है. अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, ये नोट जल्दी खराब नहीं होते, जिससे बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम पड़ती है और लंबे समय में लागत में भी कमी आती है. RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक नोटों की छपाई पर ₹4,875.2 करोड़ खर्च हुए, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह खर्च ₹6,372.8 करोड़ था.
डिजिटल भुगतान पर असर का आकलन बाद में
वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि पॉलिमर नोट अभी शुरुआती चरण में हैं. इनका डिजिटल भुगतान पर क्या असर पड़ेगा, इसका आकलन नियमित रूप से जारी होने के बाद ही किया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि नकद और डिजिटल भुगतान दोनों ही आम जनता के लिए पूरक भुगतान माध्यम हैं.
पहले भी हो चुकी है कोशिश
भारत ने वर्ष 2012 में पहली बार पॉलिमर बैंक नोट लाने की योजना बनाई थी, लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका. अब एक बार फिर RBI इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है.
दुनिया के कई देशों में पहले से चल रहे हैं पॉलिमर नोट
दुनिया के करीब 60 देशों में पॉलिमर बैंक नोट प्रचलन में हैं. ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में सबसे पहले प्लास्टिक नोट जारी किए थे. इसके बाद सिंगापुर, कनाडा, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और रोमानिया समेत कई देशों ने भी इन्हें अपनाया. इन देशों का अनुभव बताता है कि पॉलिमर नोट अधिक टिकाऊ होने के साथ सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर माने जाते हैं.
सोमवार को सेंसेक्स 776.01 अंक यानी 1.02% की बढ़त के साथ 76,835.78 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 228.50 अंक यानी 0.96% चढ़कर 23,995.95 के स्तर पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पांच कारोबारी सत्र की लगातार गिरावट के बाद सोमवार को घरेलू शेयर बाजार ने दमदार वापसी की. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 776.01 अंक यानी 1.02% की बढ़त के साथ 76,835.78 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 228.50 अंक यानी 0.96% चढ़कर 23,995.95 के स्तर पर पहुंच गया. इस तेजी से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹5 लाख करोड़ बढ़ गया. पश्चिम एशिया में तनाव कम होने, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रुपये में मजबूती से निवेशकों का भरोसा लौटा. अब मंगलवार के कारोबार में निवेशकों की नजर Wipro की AI साझेदारी, Adani Energy Solutions के QIP, TVS Motor के बड़े निवेश, IndiGo में प्रबंधन बदलाव और कई दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी.
कल क्यों लौटी थी बाजार में तेजी?
सोमवार को पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 800 अंक से अधिक उछला, जबकि निफ्टी 24,000 के स्तर के करीब पहुंच गया. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस तेजी के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹5 लाख करोड़ बढ़कर लगभग ₹480 लाख करोड़ हो गया. सेंसेक्स के 30 में से 27 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए. Eternal में 5.63%, IndiGo में 4.77%, Infosys में 3.66%, Bajaj Finance में 3.50%, Asian Paints में 2.87% और Mahindra & Mahindra में 2.55% की तेजी रही. दूसरी ओर HDFC Bank, Power Grid और Axis Bank के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. डॉलर के मुकाबले रुपया भी 63 पैसे मजबूत होकर 95.90 पर बंद हुआ.
ब्रॉडर मार्केट में भी रही खरीदारी
निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक क्रमशः 1.11% और 1.31% की बढ़त के साथ बंद हुए. सेक्टोरल इंडेक्स में आईटी, मीडिया और रियल्टी शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि ऑयल एंड गैस सेक्टर अपेक्षाकृत कमजोर रहा.
कच्चे तेल में गिरावट से मिला बाजार को सहारा
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव कम होने की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई. कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड करीब 8% टूटकर 88.89 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. इससे भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े आयातक देश के लिए राहत की उम्मीद बढ़ी और बाजार में खरीदारी का माहौल बना.
आज इन शेयरों पर रहेगी नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में कई कंपनियों से जुड़े अहम घटनाक्रम निवेशकों के फोकस में रहेंगे. Wipro ने Databricks के साथ साझेदारी की है. इस सहयोग का उद्देश्य एंटरप्राइज ग्राहकों को डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक बनाने और बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समाधान अपनाने में मदद करना है. IndiGo ने गौरव नेगी को CFO पद से हटाकर प्रबंध निदेशक का सलाहकार नियुक्त किया है. वहीं किरण थडिमर्री 28 जुलाई से नए CFO का कार्यभार संभालेंगे. TVS Motor ने TVS Credit Services में Lucas-TVS की 4.39% हिस्सेदारी ₹711 करोड़ में खरीदने का फैसला किया है. इस सौदे के बाद TVS Credit Services में उसकी हिस्सेदारी बढ़कर 85.15% हो जाएगी. Adani Energy Solutions ने QIP लॉन्च किया है. इसके लिए ₹1,698.15 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है और जरूरत पड़ने पर 5% तक की छूट भी दी जा सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक Elevation Capital ब्लॉक डील के जरिए Meesho में करीब ₹1,200 करोड़ की हिस्सेदारी बेच सकती है. Vardhman Special Steels ने Aichi Steel Corporation के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए नई फोर्जिंग सुविधा विकसित करने की घोषणा की है. इस परियोजना में दो चरणों में कुल ₹1,116 करोड़ का निवेश किया जाएगा.
आज आएंगे कई दिग्गज कंपनियों के नतीजे
आज कई बड़ी कंपनियां अप्रैल-जून तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी करेंगी. इनमें Larsen & Toubro, Hindustan Unilever, Ambuja Cements, Tata Capital, Cholamandalam Investment and Finance Company, City Union Bank, DCM Shriram, Equitas Small Finance Bank, Pfizer, Phoenix Mills, Pine Labs, Radico Khaitan, Supreme Industries, Suzlon Energy, Varun Beverages और VST Industries शामिल हैं. इन कंपनियों के नतीजों का असर आज उनके शेयरों की चाल और पूरे बाजार के सेंटीमेंट पर देखने को मिल सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)