AI से बदलेगा भारत का ई-कॉमर्स बाजार, 2030 तक $250 बिलियन पहुंचने का अनुमान: रिपोर्ट

शिपरॉकेट और डेलॉइट की रिपोर्ट में दावा, वर्नाक्युलर कॉमर्स और एआई-पावर्ड पर्सनलाइजेशन बनेंगे डिजिटल शॉपिंग के भविष्य की कुंजी

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Tuesday, 28 July, 2026
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भारत का ई-कॉमर्स बाजार आने वाले वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ने वाला है. शिपरॉकेट और डेलॉइट की नई रिपोर्ट के मुताबिक, देश का ऑनलाइन कॉमर्स बाजार 2025 के करीब 90 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 250 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), पर्सनलाइज्ड शॉपिंग अनुभव और क्षेत्रीय भाषाओं पर आधारित कॉमर्स इस ग्रोथ को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे.

"AI फॉर भारत कॉमर्स: $250 बिलियन बिजनेस अवसर को अनलॉक करना" नाम से जारी इस रिपोर्ट में भारत के ई-कॉमर्स सेक्टर के अगले विकास चरण का विश्लेषण किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, एआई-पावर्ड डिस्कवरी, स्मार्ट चेकआउट सिस्टम और फुलफिलमेंट इनोवेशन ग्राहकों के ऑनलाइन शॉपिंग अनुभव को पूरी तरह बदल सकते हैं.

98% इंटरनेट यूजर्स इंडिक भाषाओं में देखते हैं कंटेंट

रिपोर्ट में भारत के डिजिटल कॉमर्स में क्षेत्रीय भाषाओं की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया गया है. इसके मुताबिक, देश में 488 मिलियन ग्रामीण इंटरनेट यूजर्स हैं, जो भारत की कुल सक्रिय इंटरनेट आबादी का 55 फीसदी हिस्सा हैं. वहीं, 98 फीसदी भारतीय इंटरनेट यूजर्स इंडिक भाषाओं में कंटेंट देखते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, वर्नाक्युलर वॉयस क्वेरी अंग्रेजी की तुलना में 156 फीसदी तेजी से बढ़ रही हैं. ऐसे में कंपनियों के लिए क्षेत्रीय भाषाओं पर आधारित कॉमर्स अनुभव तैयार करना जरूरी हो गया है.

टियर-2 और टियर-3 शहरों से मिल रही ई-कॉमर्स को मजबूती

रिपोर्ट में बताया गया है कि टियर-2 और टियर-3 शहर भारत के ऑनलाइन शॉपर्स का 60 फीसदी से अधिक हिस्सा रखते हैं. यह आंकड़ा दिखाता है कि देश के छोटे शहर डिजिटल कॉमर्स के विस्तार में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.

एआई पर्सनलाइजेशन से बढ़ सकता है कन्वर्जन

रिपोर्ट के मुताबिक, एआई आधारित पर्सनलाइजेशन से ग्राहकों के व्यवहार को समझकर बेहतर प्रोडक्ट रिकमेंडेशन, कन्वर्सेशनल कॉमर्स और विजुअल डिस्कवरी जैसी सुविधाएं दी जा सकती हैं. एआई-ड्रिवन पर्सनलाइजेशन से कन्वर्जन रेट 2.1 गुना तक बढ़ सकता है, जबकि बेहतर कस्टमर एंगेजमेंट और रिपीट खरीदारी से एवरेज ऑर्डर वैल्यू में 3.4 गुना तक सुधार संभव है.

ई-कॉमर्स के भविष्य को आकार देंगे तीन बड़े ट्रेंड

रिपोर्ट में भारतीय कॉमर्स के भविष्य को प्रभावित करने वाले तीन प्रमुख ट्रेंड बताए गए हैं.

1. एआई-पावर्ड पर्सनलाइजेशन: एडवांस्ड एआई मॉडल और जेनरेटिव एआई ग्राहकों को उनकी पसंद के अनुसार शॉपिंग अनुभव देने में मदद करेंगे.

2. कन्वर्जन इंटेलिजेंस: एआई आधारित रिकमेंडेशन, प्रेडिक्टिव एनालिसिस और स्मार्ट कस्टमर एंगेजमेंट से ब्रांड्स बिक्री, ग्राहक बनाए रखने की क्षमता और मुनाफे में सुधार कर सकेंगे.

3. भारत-लेड डिजिटल एडॉप्शन: ग्रामीण इंटरनेट विस्तार, डिजिटल कनेक्टिविटी और इंडिक भाषा कंटेंट की बढ़ती मांग से भारत का डिजिटल कॉमर्स बाजार और व्यापक होगा.

90% उपभोक्ताओं ने माना, एआई से बेहतर हुआ शॉपिंग अनुभव

रिपोर्ट के अनुसार, 90 फीसदी भारतीय उपभोक्ताओं का मानना है कि जेनरेटिव एआई ने उनके ऑनलाइन शॉपिंग अनुभव को बेहतर बनाया है. यह आंकड़ा दिखाता है कि ग्राहक एआई आधारित कॉमर्स समाधानों को तेजी से स्वीकार कर रहे हैं.

शिपरॉकेट के एमडी और सीईओ साहिल गोयल ने कहा कि भारत का ई-कॉमर्स सेक्टर अपने अगले विकास चरण में प्रवेश कर रहा है और इस बदलाव में टेक्नोलॉजी की भूमिका अहम होगी. उन्होंने कहा कि कंपनियों को एआई में निवेश करने के साथ-साथ अपनी फुलफिलमेंट क्षमताओं को मजबूत करना होगा ताकि मेट्रो शहरों के साथ-साथ उभरते बाजारों के ग्राहकों की जरूरतों को पूरा किया जा सके.

डेलॉइट इंडिया के पार्टनर और कंज्यूमर इंडस्ट्री लीडर डॉ. आनंद रमणाथन ने कहा कि भारत के कॉमर्स बाजार में सफलता केवल एआई अपनाने से नहीं मिलेगी, बल्कि कंपनियों को इसे सही रणनीति, गति और अनुशासन के साथ लागू करना होगा.

रिपोर्ट में इंडस्ट्री रिसर्च, बाजार के रुझानों और शिपरॉकेट की कॉमर्स इनसाइट्स के आधार पर बताया गया है कि एआई भारत में प्रोडक्ट डिस्कवरी, ग्राहक जुड़ाव, फुलफिलमेंट और पूरे कॉमर्स अनुभव को नया रूप दे रहा है.
 


₹100 करोड़ से ज्यादा आय दिखाने वालों की संख्या 5 साल में 4 गुना बढ़ी, AY26 में 576 लोगों ने भरा रिटर्न

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में बताया कि असेसमेंट ईयर 2025-26 में 576 लोगों ने ₹100 करोड़ से अधिक की सकल आय घोषित की. पांच साल पहले यह संख्या सिर्फ 142 थी.

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Tuesday, 28 July, 2026
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देश में ₹100 करोड़ से अधिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या पिछले पांच असेसमेंट वर्षों में चार गुना से अधिक बढ़ गई है. संसद में सरकार की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, असेसमेंट ईयर (AY) 2025-26 में 576 व्यक्तियों ने ₹100 करोड़ से अधिक की सकल कुल आय (Gross Total Income) घोषित की. AY 2021-22 में यह संख्या केवल 142 थी.

लोकसभा में एक लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि AY 2022-23 में ऐसे करदाताओं की संख्या बढ़कर 301 हो गई थी. इसके बाद AY 2023-24 में यह घटकर 284 रही, जबकि AY 2024-25 में फिर बढ़कर 415 पहुंच गई. अब AY 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 576 हो गया है.

अल्ट्रा हाई-इनकम टैक्सपेयर्स की संख्या में तेज बढ़ोतरी

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि साल-दर-साल कुछ उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में बेहद अधिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे आयकर अनुपालन (Tax Compliance) में सुधार, डिजिटल सिस्टम का विस्तार और आयकर विभाग की तकनीक आधारित निगरानी बड़ी वजह है.

नहीं दी गई सेक्टर और आय के स्रोत की जानकारी

सरकार ने यह नहीं बताया कि ₹100 करोड़ से अधिक आय घोषित करने वाले ये करदाता किन क्षेत्रों से जुड़े हैं या उनकी आय के प्रमुख स्रोत क्या हैं. इसके अलावा क्षेत्रवार (Region-wise) आंकड़े भी साझा नहीं किए गए.

लगातार बढ़ रहा है प्रत्यक्ष करदाताओं का दायरा

हाल के वर्षों में देश का प्रत्यक्ष कर आधार (Direct Tax Base) लगातार मजबूत हुआ है. आयकर विभाग ने फेसलेस असेसमेंट, डिजिटल रिपोर्टिंग, डेटा एनालिटिक्स और ई-फाइलिंग प्रणाली के विस्तार जैसे कई कदम उठाए हैं, जिससे कर अनुपालन में सुधार हुआ है.

सरकार का कहना है कि डिजिटल पहल और डेटा आधारित निगरानी के जरिए करदाताओं का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है. ₹100 करोड़ से अधिक आय घोषित करने वाले लोगों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि उच्च आय वर्ग में आय की रिपोर्टिंग और औपचारिक कर व्यवस्था, दोनों का विस्तार हो रहा है.
 


IndiGo में बड़ा नेतृत्व बदलाव, किरण थडिमर्री बने नए CFO; कस्टम आदेश को देगी चुनौती

InterGlobe Aviation की बोर्ड बैठक में किरण थडिमर्री को नया मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) नियुक्त किया गया है. वहीं, कंपनी ने कुछ आयातित सामान पर कस्टम ड्यूटी, ब्याज और जुर्माने से जुड़े आदेश को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है.

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Tuesday, 28 July, 2026
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देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) का संचालन करने वाली इंटरग्लोब एविएशन (InterGlobe Aviation) ने सोमवार को शीर्ष प्रबंधन में बड़ा बदलाव किया है. कंपनी ने किरण थडिमर्री को नया मुख्य वित्तीय अधिकारी (Chief Financial Officer-CFO) नियुक्त किया है. वह वर्तमान CFO गौरव नेगी की जगह लेंगे, जिन्हें अब प्रबंध निदेशक (MD) का सलाहकार नियुक्त किया गया है. यह नियुक्तियां 28 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगी.

कंपनी के बोर्ड ने 27 जुलाई को हुई बैठक में इन नियुक्तियों को मंजूरी दी. वर्तमान में डिप्टी CFO के पद पर कार्यरत किरण थडिमर्री 28 जुलाई से कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी के साथ-साथ प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक (Key Managerial Personnel) की जिम्मेदारी भी संभालेंगे.

दो दशक से अधिक का वित्तीय अनुभव

चार्टर्ड अकाउंटेंट किरण थडिमर्री के पास वित्तीय क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव है. उन्होंने ट्रेजरी, फाइनेंशियल प्लानिंग, निवेशक संबंध (Investor Relations), टैक्सेशन, ऑडिट और पूंजी जुटाने जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व किया है. InterGlobe Aviation से पहले वह Udaan और Genworks Health में वरिष्ठ पदों पर कार्य कर चुके हैं. Genworks Health में उन्होंने सह-संस्थापक (Co-founder) और CFO के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई. इसके अलावा उन्होंने General Electric (GE) में 13 वर्षों से अधिक समय तक विभिन्न वित्तीय भूमिकाओं में काम किया है.

कस्टम विभाग के आदेश को देगी चुनौती

एक अलग नियामकीय खुलासे में कंपनी ने बताया कि नई दिल्ली के प्रधान आयुक्त (कस्टम) ने कुछ आयातित सामान के वर्गीकरण (Classification) में बदलाव करते हुए कस्टम ड्यूटी, ब्याज और जुर्माने का भुगतान करने का आदेश दिया है. यह मामला अप्रैल 2020 से मार्च 2024 के बीच किए गए कुछ आयातों से जुड़ा है. आदेश में कस्टम ड्यूटी और ब्याज के अलावा ₹1.14 करोड़ से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया है.

कंपनी ने आदेश से जताई असहमति

InterGlobe Aviation ने कहा कि वह इस आदेश से सहमत नहीं है और इसके खिलाफ सक्षम अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर करेगी. कंपनी उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेगी. एयरलाइन का कहना है कि इस कस्टम विवाद का उसके वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार या परिचालन पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है.
 

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RBI जल्द करेगा ₹10 और ₹20 के पॉलिमर नोटों का ट्रायल, सरकार ने दी मंजूरी

परीक्षण के तौर पर जारी होंगे 10 और 20 रुपये के एक-एक अरब पॉलिमर नोट. सफल ट्रायल के बाद इन्हें नियमित रूप से जारी करने पर फैसला लिया जाएगा, हालांकि मौजूदा कागजी नोट प्रचलन में बने रहेंगे.

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Tuesday, 28 July, 2026
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देश में जल्द ही ₹10 और ₹20 के नए पॉलिमर (प्लास्टिक) बैंक नोट देखने को मिल सकते हैं. केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को इन दोनों मूल्यवर्ग के एक-एक अरब पॉलिमर नोट परीक्षण के तौर पर जारी करने की मंजूरी दे दी है. यदि फील्ड ट्रायल सफल रहता है, तो RBI इन्हें नियमित रूप से प्रचलन में ला सकता है. हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि पारंपरिक कागज के नोट पूरी तरह बंद नहीं किए जाएंगे और दोनों तरह के नोट साथ-साथ चलेंगे.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि RBI के केंद्रीय बोर्ड ने भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत ₹10 और ₹20 के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव सरकार को भेजा था. सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

कागजी नोटों की जगह नहीं लेंगे पॉलिमर नोट

सरकार के अनुसार, पॉलिमर बैंक नोट मौजूदा कपास की लुगदी और पादप फाइबर से बने कागजी नोटों के साथ ही जारी किए जाएंगे. फिलहाल पारंपरिक बैंक नोटों को पूरी तरह पॉलिमर नोटों से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है.

क्यों लाए जा रहे हैं पॉलिमर नोट?

RBI का मानना है कि पॉलिमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं और इनकी उम्र भी काफी लंबी होती है. अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, ये नोट जल्दी खराब नहीं होते, जिससे बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम पड़ती है और लंबे समय में लागत में भी कमी आती है. RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक नोटों की छपाई पर ₹4,875.2 करोड़ खर्च हुए, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह खर्च ₹6,372.8 करोड़ था.

डिजिटल भुगतान पर असर का आकलन बाद में

वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि पॉलिमर नोट अभी शुरुआती चरण में हैं. इनका डिजिटल भुगतान पर क्या असर पड़ेगा, इसका आकलन नियमित रूप से जारी होने के बाद ही किया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि नकद और डिजिटल भुगतान दोनों ही आम जनता के लिए पूरक भुगतान माध्यम हैं.

पहले भी हो चुकी है कोशिश

भारत ने वर्ष 2012 में पहली बार पॉलिमर बैंक नोट लाने की योजना बनाई थी, लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका. अब एक बार फिर RBI इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है.

दुनिया के कई देशों में पहले से चल रहे हैं पॉलिमर नोट

दुनिया के करीब 60 देशों में पॉलिमर बैंक नोट प्रचलन में हैं. ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में सबसे पहले प्लास्टिक नोट जारी किए थे. इसके बाद सिंगापुर, कनाडा, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और रोमानिया समेत कई देशों ने भी इन्हें अपनाया. इन देशों का अनुभव बताता है कि पॉलिमर नोट अधिक टिकाऊ होने के साथ सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर माने जाते हैं.
 


कल 776 अंक उछला था सेंसेक्स, आज इन ट्रिगर्स से तय होगी बाजार की अगली चाल

सोमवार को सेंसेक्स 776.01 अंक यानी 1.02% की बढ़त के साथ 76,835.78 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 228.50 अंक यानी 0.96% चढ़कर 23,995.95 के स्तर पर पहुंच गया.

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Tuesday, 28 July, 2026
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पांच कारोबारी सत्र की लगातार गिरावट के बाद सोमवार को घरेलू शेयर बाजार ने दमदार वापसी की. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 776.01 अंक यानी 1.02% की बढ़त के साथ 76,835.78 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 228.50 अंक यानी 0.96% चढ़कर 23,995.95 के स्तर पर पहुंच गया. इस तेजी से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹5 लाख करोड़ बढ़ गया. पश्चिम एशिया में तनाव कम होने, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रुपये में मजबूती से निवेशकों का भरोसा लौटा. अब मंगलवार के कारोबार में निवेशकों की नजर Wipro की AI साझेदारी, Adani Energy Solutions के QIP, TVS Motor के बड़े निवेश, IndiGo में प्रबंधन बदलाव और कई दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी.

कल क्यों लौटी थी बाजार में तेजी?

सोमवार को पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 800 अंक से अधिक उछला, जबकि निफ्टी 24,000 के स्तर के करीब पहुंच गया. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस तेजी के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹5 लाख करोड़ बढ़कर लगभग ₹480 लाख करोड़ हो गया. सेंसेक्स के 30 में से 27 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए. Eternal में 5.63%, IndiGo में 4.77%, Infosys में 3.66%, Bajaj Finance में 3.50%, Asian Paints में 2.87% और Mahindra & Mahindra में 2.55% की तेजी रही. दूसरी ओर HDFC Bank, Power Grid और Axis Bank के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. डॉलर के मुकाबले रुपया भी 63 पैसे मजबूत होकर 95.90 पर बंद हुआ.

ब्रॉडर मार्केट में भी रही खरीदारी

निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक क्रमशः 1.11% और 1.31% की बढ़त के साथ बंद हुए. सेक्टोरल इंडेक्स में आईटी, मीडिया और रियल्टी शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि ऑयल एंड गैस सेक्टर अपेक्षाकृत कमजोर रहा.

कच्चे तेल में गिरावट से मिला बाजार को सहारा

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव कम होने की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई. कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड करीब 8% टूटकर 88.89 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. इससे भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े आयातक देश के लिए राहत की उम्मीद बढ़ी और बाजार में खरीदारी का माहौल बना.

आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में कई कंपनियों से जुड़े अहम घटनाक्रम निवेशकों के फोकस में रहेंगे. Wipro ने Databricks के साथ साझेदारी की है. इस सहयोग का उद्देश्य एंटरप्राइज ग्राहकों को डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक बनाने और बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समाधान अपनाने में मदद करना है. IndiGo ने गौरव नेगी को CFO पद से हटाकर प्रबंध निदेशक का सलाहकार नियुक्त किया है. वहीं किरण थडिमर्री 28 जुलाई से नए CFO का कार्यभार संभालेंगे. TVS Motor ने TVS Credit Services में Lucas-TVS की 4.39% हिस्सेदारी ₹711 करोड़ में खरीदने का फैसला किया है. इस सौदे के बाद TVS Credit Services में उसकी हिस्सेदारी बढ़कर 85.15% हो जाएगी. Adani Energy Solutions ने QIP लॉन्च किया है. इसके लिए ₹1,698.15 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है और जरूरत पड़ने पर 5% तक की छूट भी दी जा सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक Elevation Capital ब्लॉक डील के जरिए Meesho में करीब ₹1,200 करोड़ की हिस्सेदारी बेच सकती है.  Vardhman Special Steels ने Aichi Steel Corporation के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए नई फोर्जिंग सुविधा विकसित करने की घोषणा की है. इस परियोजना में दो चरणों में कुल ₹1,116 करोड़ का निवेश किया जाएगा.

आज आएंगे कई दिग्गज कंपनियों के नतीजे

आज कई बड़ी कंपनियां अप्रैल-जून तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी करेंगी. इनमें Larsen & Toubro, Hindustan Unilever, Ambuja Cements, Tata Capital, Cholamandalam Investment and Finance Company, City Union Bank, DCM Shriram, Equitas Small Finance Bank, Pfizer, Phoenix Mills, Pine Labs, Radico Khaitan, Supreme Industries, Suzlon Energy, Varun Beverages और VST Industries शामिल हैं. इन कंपनियों के नतीजों का असर आज उनके शेयरों की चाल और पूरे बाजार के सेंटीमेंट पर देखने को मिल सकता है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


राजेंद्र मेहता ने सुजलॉन ग्रुप के प्रेजीडेंट और ग्रुप CHRO पद से दिया इस्तीफा

दिसंबर 2022 में सुजलॉन ग्रुप से जुड़े राजेंद्र मेहता ने कंपनी के प्रेजीडेंट और ग्रुप चीफ ह्यूमन रिसॉर्सिस ऑफिसर (Group CHRO) पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.

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Monday, 27 July, 2026
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सुजलॉन ग्रुप (Suzlon Group) के प्रेजीडेंट और ग्रुप CHRO राजेंद्र मेहता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. राजेंद्र मेहता दिसंबर 2022 में सुजलॉन ग्रुप से जुड़े थे. उन्हें कंपनी के ह्यूमन रिसोर्सेज (HR) विभाग का नेतृत्व सौंपा गया था. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने संगठन की पीपल स्ट्रैटेजी को आगे बढ़ाने और विभिन्न HR पहलों को लागू करने में अहम भूमिका निभाई.

तीन दशक से अधिक का HR नेतृत्व का अनुभव

तीन दशक से अधिक के अनुभव वाले राजेंद्र मेहता देश के अनुभवी HR पेशेवरों में गिने जाते हैं. उन्हें टैलेंट मैनेजमेंट, लीडरशिप डेवलपमेंट, ऑर्गेनाइजेशनल ट्रांसफॉर्मेशन, परफॉर्मेंस मैनेजमेंट, सक्सेशन प्लानिंग, कर्मचारी संबंध, विविधता एवं समावेशन (Diversity & Inclusion) और डिजिटल HR ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में व्यापक अनुभव हासिल है. उन्होंने इंजीनियरिंग, मीडिया एवं एंटरटेनमेंट, रिटेल, फाइनेंशियल सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग जैसे कई सेक्टरों में काम किया है.

Zee Entertainment और Times Group में निभा चुके हैं अहम जिम्मेदारियां

सुजलॉन से पहले मेहता जी एंटरटेन्मेंट (Zee Entertainment) में ग्लोबल चीफ पीपल ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे, जहां उन्होंने संगठनात्मक क्षमताओं को मजबूत करने और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कार्यबल तैयार करने पर काम किया. इसके अलावा वह DHFL, DCM Shriram, VNL, Synergy Capital और Times Group जैसी कंपनियों में भी वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिकाएं निभा चुके हैं.

उनके करियर का सबसे लंबा कार्यकाल टाइम्स ग्रुप (Times Group) में रहा, जहां उन्होंने करीब एक दशक तक विभिन्न HR नेतृत्व पदों पर काम किया और अंततः वाइस प्रेजीडेंट एवं हेड ऑफ ह्यूमन रिसॉर्सिस बने. इस दौरान उन्होंने एचआर रणनीति तैयार करने, बिजनेस लीडर्स के साथ मिलकर काम करने और संगठन की पीपल प्रोसेसेज को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

अगले कदम और उत्तराधिकारी पर नजर

राजेंद्र मेहता ने ह्यूमन रिसोर्सेज में मास्टर डिग्री हासिल की है. फिलहाल उनके इस्तीफे के कारण, सुजलॉन ग्रुप में उनके उत्तराधिकारी और उनके अगले पेशेवर कदम को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. कंपनी की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है.


डॉ. सुभाष चंद्रा का भावुक संदेश, बोले- ‘बाबूजी शरीर से दूर हैं, लेकिन संस्कारों में हमेशा जीवित रहेंगे’

पिता नंद किशोर गोयनका की रस्म पगड़ी के बाद पूर्व राज्यसभा सांसद ने साझा की भावनात्मक पोस्ट, जीवन मूल्यों और विरासत को किया याद

Last Modified:
Monday, 27 July, 2026
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एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने पिता एवं वरिष्ठ उद्योगपति और समाजसेवी स्वर्गीय नंद किशोर गोयनका की रस्म पगड़ी के बाद एक भावुक संदेश साझा किया है. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की जीवन यात्रा भले ही समाप्त हो जाए, लेकिन उसके संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्य हमेशा परिवार और समाज का मार्गदर्शन करते रहते हैं.

डॉ. सुभाष चंद्रा ने 26 जुलाई 2026 को संपन्न हुई रस्म पगड़ी के बाद सोशल मीडिया पर अपने पिता को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि यह केवल एक सामाजिक परंपरा नहीं थी, बल्कि उस जिम्मेदारी को स्वीकार करने का अवसर था, जो एक पिता अपने जाने के बाद परिवार को सौंप जाता है.

‘बाबूजी के संस्कार हमारे आचरण में हमेशा रहेंगे’

अपने संदेश में डॉ. चंद्रा ने कहा कि उनके पिता का जीवन अब केवल यादों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके संस्कार परिवार के व्यवहार, फैसलों और आने वाली पीढ़ियों के माध्यम से आगे बढ़ते रहेंगे. उन्होंने लिखा, "जीवन का एक शाश्वत सत्य है कि एक दिन व्यक्ति दृश्य संसार से विदा हो जाता है, लेकिन उसके संस्कार, उसका अनुशासन और उसके द्वारा दिखाया गया मार्ग समय से परे हो जाता है." डॉ. चंद्रा ने कहा कि उनके पिता के आदर्श और जीवन मूल्य परिवार के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे.

कठिन समय में साथ देने वालों का जताया आभार

डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने संदेश में उन सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस कठिन समय में परिवार का साथ दिया. उन्होंने कहा कि लोगों की उपस्थिति, प्रार्थनाओं और स्नेह ने परिवार को मजबूती दी है, जिसके लिए वे हृदय से आभारी हैं. उन्होंने अपने संदेश के अंत में लिखा, "बाबूजी, आपकी देह यात्रा पूर्ण हो गई है, लेकिन आपके दिए संस्कारों की यात्रा निरंतर चलती रहेगी. ॐ शांति."

96 वर्ष की आयु में हुआ था नंद किशोर गोयनका का निधन

गौरतलब है कि डॉ. सुभाष चंद्रा के पिता नंद किशोर गोयनका का 13 जुलाई 2026 को मुंबई में 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया था. उनका अंतिम संस्कार हरियाणा के अग्रोहा धाम स्थित गोयनका उद्यान में किया गया था.

नंद किशोर गोयनका उद्योग जगत के साथ-साथ समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे थे. उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए डॉ. सुभाष चंद्रा ने हरियाणा के अग्रोहा में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से ‘नंद किशोर गोयनका यूनिवर्सिटी’ स्थापित करने की घोषणा की है. प्रस्तावित विश्वविद्यालय का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ समाज सेवा और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना होगा.
 


भारत में बिजली की कमी हुई दोगुनी से ज्यादा, जनवरी-मई 2026 में सप्लाई संकट बढ़ा: IEA

पहली छमाही में बिजली मांग में 6% की बढ़ोतरी, रिकॉर्ड गर्मी और बढ़ती कूलिंग जरूरतों ने डाला दबाव

Last Modified:
Monday, 27 July, 2026
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भारत में बिजली की मांग में तेजी के साथ ही सप्लाई पर दबाव भी बढ़ रहा है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली छमाही में भारत की बिजली मांग करीब 6 फीसदी बढ़ी है. वहीं, जनवरी से मई 2026 के बीच बिजली आपूर्ति में कमी पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले दोगुनी से अधिक रही.

IEA की रिपोर्ट के मुताबिक, बिजली मांग में बढ़ोतरी की मुख्य वजह उद्योग और सेवा क्षेत्र में मजबूत गतिविधियां तथा भीषण गर्मी के कारण बढ़ी कूलिंग जरूरतें रहीं. अप्रैल के मध्य से जून की शुरुआत तक चली हीटवेव के दौरान बिजली खपत में तेज उछाल देखने को मिला.

मई में बिजली खपत 11% बढ़ी

गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की मांग में तेजी आई. मई 2026 में बिजली खपत सालाना आधार पर 11 फीसदी बढ़ी, जबकि कूलिंग डिग्री डेज (Cooling Degree Days) में 7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. इसके चलते एसी, कूलर और अन्य कूलिंग उपकरणों के इस्तेमाल में बढ़ोतरी हुई और बिजली की मांग पर अतिरिक्त दबाव पड़ा.

18 मई से 21 मई के बीच लगातार चार दिनों तक देश में बिजली की पीक डिमांड रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची. 21 मई को यह 270.8 गीगावाट (GW) तक पहुंच गई. हालांकि, थर्मल और रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में बढ़ोतरी की मदद से इस मांग को पूरा किया गया.

IEA के अनुसार, दिन के समय सोलर फोटोवोल्टिक (Solar PV) उत्पादन ने अहम भूमिका निभाई और करीब 60 GW बिजली का योगदान दिया, जो दिन के पीक लोड का लगभग 22 फीसदी था.

शाम के समय बिजली उत्पादन पर बढ़ा दबाव

हालांकि दिन के समय पीक डिमांड पूरी कर ली गई, लेकिन शाम के समय बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया. IEA ने बताया कि शाम के वक्त सोलर जैसी वैरिएबल रिन्यूएबल एनर्जी का उत्पादन घट जाता है, जबकि बिजली की मांग ऊंची बनी रहती है.

ऐसे में कोयला और गैस आधारित बिजली संयंत्रों को तेजी से उत्पादन बढ़ाना पड़ता है, जिससे संचालन संबंधी चुनौतियां पैदा होती हैं. कई मामलों में इसका असर बिजली आपूर्ति की कमी के रूप में देखने को मिला.

इसका सबसे ज्यादा प्रभाव उत्तरी भारत के कुछ राज्यों में दिखाई दिया. IEA के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में बिजली की आपूर्ति में कमी का स्तर सबसे अधिक रहा. अप्रैल में कुछ क्षेत्रों में बिजली की कमी मासिक मांग के 2 फीसदी तक पहुंच गई.

2026 में बिजली मांग 7% तक बढ़ने का अनुमान

IEA का अनुमान है कि वर्ष 2026 के बाकी महीनों में बिजली की मांग और तेज गति से बढ़ सकती है. पूरे साल में बिजली मांग वृद्धि करीब 7 फीसदी रहने की संभावना है.

यह वृद्धि देश में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और तेजी से हो रहे विद्युतीकरण (Electrification) से प्रेरित होगी. यह 2025 की तुलना में काफी अधिक होगी, जब मानसून जल्दी आने के कारण बिजली मांग में सालाना आधार पर केवल 1.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी.

मौसम की स्थिति भी 2026 में बिजली खपत के रुझान को प्रभावित करने वाली अहम भूमिका निभाएगी. भारत में मानसून की शुरुआत 4 जून को हुई, जो सामान्य समय से तीन दिन देरी से थी. वहीं, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस साल मानसून में 11 वर्षों में सबसे कम बारिश का अनुमान जताया है.

कम बारिश की स्थिति में सिंचाई पंपों के अधिक इस्तेमाल से कृषि क्षेत्र में बिजली खपत बढ़ सकती है, जबकि गर्मी के कारण कूलिंग की मांग भी ऊंची बनी रह सकती है.

JM Financial ने जताई सप्लाई जोखिम की आशंका

ब्रोकरेज फर्म JM Financial का अनुमान है कि एल नीनो (El Niño) की स्थिति मजबूत होने से बिजली की अधिक मांग वाला सीजन सामान्य गर्मियों के महीनों से आगे बढ़ सकता है.

फर्म के अनुसार, बिजली मांग का संबंध केवल तापमान से नहीं बल्कि वेट-बल्ब तापमान (Wet-bulb Temperature), यानी गर्मी और नमी दोनों से होता है. 2023 के एल नीनो के दौरान अधिक नमी के कारण मई-जून के बाद भी कूलिंग की मांग ऊंची बनी रही थी.

FY24 में बिजली की पीक डिमांड सितंबर में 243 GW तक पहुंच गई थी, जबकि सामान्य रूप से अधिक मांग वाले मई-जून में यह 224 GW रही थी. इससे पता चलता है कि एल नीनो जैसी मौसमी परिस्थितियां बिजली की अधिक मांग वाले समय को बढ़ा सकती हैं.

जुलाई-सितंबर में विंड और हाइड्रो पावर पर दबाव

JM Financial के अनुसार, जुलाई से सितंबर के बीच हवा आधारित बिजली उत्पादन में मौसमी गिरावट आ सकती है. फर्म का अनुमान है कि पीक विंड पावर सप्लाई 15-18 GW से घटकर अगस्त-सितंबर तक करीब 10 GW रह सकती है.

इसके अलावा जलविद्युत उत्पादन पर भी दबाव बना हुआ है. जलाशयों में ऊर्जा उपलब्धता पिछले साल की तुलना में 50 फीसदी कम बताई गई है.

ब्रोकरेज के मुताबिक, थर्मल पावर क्षमता पहले से ही 90 फीसदी से अधिक प्लांट लोड फैक्टर (PLF) पर काम कर रही है, जिससे अचानक बढ़ी मांग को पूरा करने की गुंजाइश सीमित है. गैस आधारित बिजली संयंत्र कुछ अतिरिक्त सहायता दे सकते हैं, लेकिन JM Financial का अनुमान है कि जुलाई के मध्य से अगस्त के अंत तक बिजली घाटे की स्थिति बनी रह सकती है.
 


कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और कमजोर डॉलर से रुपया मजबूत, शुरुआती कारोबार में 28 पैसे चढ़ा

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेतों और बेहतर वैश्विक माहौल से रुपये को मिला समर्थन

Last Modified:
Monday, 27 July, 2026
BWHindia

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और वैश्विक बाजारों में सुधरे जोखिम भाव से सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया मजबूत हुआ. रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे बढ़कर 96.25 के स्तर पर पहुंच गया. इससे पहले शुक्रवार को रुपया 20 पैसे की बढ़त के साथ 96.56 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारत के आयात बिल और महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे रुपये को सहारा मिला है.

कच्चे तेल में गिरावट से रुपये को राहत

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट से देश के चालू खाते के घाटे और आयातित महंगाई पर दबाव कम होता है. हाल के दिनों में महंगे कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ था. इसके अलावा अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से भी उभरते बाजारों की मुद्राओं को मजबूती मिली है. इसका फायदा भारतीय रुपये को भी मिला.

फेड के फैसले पर बाजार की नजर

अब मुद्रा बाजार की नजर इस सप्ताह होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक पर है. निवेशक फेड के ब्याज दरों से जुड़े संकेतों और डॉलर की आगे की दिशा पर नजर रख रहे हैं. सोमवार को घरेलू शेयर बाजारों में भी सकारात्मक शुरुआत देखने को मिली. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी को भारत के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा की मांग कम हो सकती है और आर्थिक मोर्चे पर राहत मिल सकती है.

हालांकि, सोमवार की तेजी के बावजूद रुपया अभी भी अपने रिकॉर्ड निचले स्तरों के करीब बना हुआ है. हाल के सत्रों में महंगे तेल, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और डॉलर की मजबूत मांग के कारण रुपये पर दबाव रहा है.


TKIL Industries को Q1 FY27 में ₹1,475.40 करोड़ के नए ऑर्डर मिले, इंजीनियरिंग और EPC कारोबार को मिली मजबूती

कंपनी ने कहा कि यह प्रदर्शन भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग, ऊर्जा और संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे निवेश और उसकी मजबूत इंजीनियरिंग क्षमता पर ग्राहकों के भरोसे को दर्शाता है.

Last Modified:
Monday, 27 July, 2026
BWHindia

इंजीनियरिंग और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन क्षेत्र की कंपनी TKIL Industries Pvt. Ltd. ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही में ₹1,475.40 करोड़ के नए ऑर्डर हासिल किए हैं. कंपनी ने कहा कि यह प्रदर्शन भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग, ऊर्जा और संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे निवेश और उसकी मजबूत इंजीनियरिंग क्षमता पर ग्राहकों के भरोसे को दर्शाता है.

औद्योगिक निवेश से बढ़ी इंजीनियरिंग समाधानों की मांग

कंपनी के अनुसार, भारत में बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, खनन, ऊर्जा और संसाधन विकास क्षेत्रों में निवेश लगातार बढ़ रहा है. क्षमता विस्तार, औद्योगिक आधुनिकीकरण, नई तकनीकों को अपनाने और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर बढ़ते फोकस के कारण उन्नत इंजीनियरिंग और EPC (Engineering, Procurement and Construction) समाधानों की मांग मजबूत बनी हुई है. ऐसे माहौल में जटिल औद्योगिक परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में सक्षम इंजीनियरिंग कंपनियों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है.

ग्राहकों का भरोसा हमारी सबसे बड़ी ताकत: विवेक भाटिया

TKIL Industries के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) विवेक भाटिया ने कहा, "पहली तिमाही में मिले मजबूत ऑर्डर इस बात का प्रमाण हैं कि हमारे ग्राहक TKIL Industries की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन क्षमता पर भरोसा करते हैं. हम तकनीक-आधारित और टिकाऊ समाधान उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो ग्राहकों के विकास को गति देने के साथ-साथ भारत के औद्योगिक विकास में भी योगदान दें."

पूंजीगत वस्तु और इंजीनियरिंग उद्योग के लिए अनुकूल माहौल

कंपनी का कहना है कि भारत में संसाधन सुरक्षा, ऊर्जा संक्रमण, औद्योगिक आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास पर बढ़ता जोर पूंजीगत वस्तु (Capital Goods) और इंजीनियरिंग उद्योग के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है. साथ ही ऑटोमेशन, नई तकनीकों के बढ़ते उपयोग और स्थानीयकरण (Localization) पर जोर के कारण भविष्य के अनुरूप औद्योगिक समाधानों में निवेश भी तेजी से बढ़ रहा है.

भविष्य की परियोजनाओं पर कंपनी की नजर

TKIL Industries ने कहा कि मजबूत ऑर्डर पाइपलाइन और प्रोजेक्ट निष्पादन क्षमता के दम पर वह विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के ग्राहकों को अत्याधुनिक इंजीनियरिंग और EPC समाधान उपलब्ध कराने की बेहतर स्थिति में है. कंपनी का फोकस नवाचार और टिकाऊ इंजीनियरिंग समाधानों के जरिए ग्राहकों और हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करने के साथ-साथ भारत के विनिर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास में योगदान देने पर बना रहेगा.
 


₹1,800 करोड़ का IPO लेकर आ रही Juniper Green Energy, 30 जुलाई से खुलेगा इश्यू, जानें पूरी डिटेल

IPO से जुटाई गई राशि में से ₹683.24 करोड़ का उपयोग कंपनी अपने कर्ज के भुगतान या प्री-पेमेंट के लिए करेगी.

Last Modified:
Monday, 27 July, 2026
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रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की कंपनी जूनिपर ग्रीन एनर्जी (Juniper Green Energy) ने अपने ₹1,800 करोड़ के इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) के लिए ₹214-225 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय कर दिया है. यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू होगा, जो 30 जुलाई से 3 अगस्त तक निवेशकों के लिए खुला रहेगा. IPO से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से कर्ज घटाने और कारोबार के विस्तार में किया जाएगा.

30 जुलाई को खुलेगा IPO, 29 जुलाई को एंकर निवेशकों की बोली

रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Juniper Green Energy का ₹1,800 करोड़ का IPO 30 जुलाई को खुलेगा और 3 अगस्त को बंद होगा. एंकर निवेशकों के लिए बोली 29 जुलाई को शुरू होगी. कंपनी ने IPO के लिए ₹214 से ₹225 प्रति इक्विटी शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. अपर प्राइस बैंड के आधार पर कंपनी का अनुमानित मार्केट कैप करीब ₹12,802 करोड़ होगा.

पूरी तरह फ्रेश इश्यू, नहीं होगी OFS

यह IPO पूरी तरह फ्रेश इश्यू है. यानी इसमें कोई मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर नहीं बेचेगा. इससे पहले कंपनी ने सेबी के पास दाखिल ड्राफ्ट पेपर्स में ₹3,000 करोड़ तक जुटाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन अब इश्यू का आकार ₹1,800 करोड़ रखा गया है.

कर्ज घटाने और ग्रुप कंपनियों में निवेश पर होगा फोकस

IPO से जुटाई गई राशि में से ₹683.24 करोड़ का उपयोग कंपनी अपने कर्ज के भुगतान या प्री-पेमेंट के लिए करेगी. वहीं ₹728.69 करोड़ अपनी सहायक कंपनियों Juniper Green Gamma One, Juniper Green Kite और Juniper Green Power Five में निवेश करेगी, ताकि वे भी अपने कर्ज का भुगतान कर सकें. शेष राशि का इस्तेमाल सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा.

रिटेल निवेशकों के लिए 35% हिस्सा आरक्षित

IPO में 50% हिस्सा योग्य संस्थागत खरीदारों (QIBs), 15% गैर-संस्थागत निवेशकों (NIIs) और 35% रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित रखा गया है. इसके अलावा पात्र कर्मचारियों के लिए ₹2 करोड़ तक के शेयर रिजर्व किए गए हैं, जिन पर ₹21 प्रति शेयर की छूट मिलेगी.

6 अगस्त को शेयर बाजार में होगी लिस्टिंग

कंपनी के शेयरों की BSE और NSE पर संभावित लिस्टिंग 6 अगस्त को होगी. इस IPO के बुक रनिंग लीड मैनेजर ICICI Securities, HSBC Securities, JM Financial और Kotak Mahindra Capital हैं, जबकि KFin Technologies को रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है.

क्या करती है Juniper Green Energy?

गुरुग्राम स्थित Juniper Green Energy सोलर, विंड, हाइब्रिड और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) परियोजनाओं के विकास, निर्माण और संचालन के कारोबार में है. कंपनी को सिंगापुर स्थित AT Capital Group का समर्थन प्राप्त है. हाल के वर्षों में कंपनी ने राजस्थान में भारत की पहली 100 MWh मर्चेंट बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) परियोजना शुरू की है. इसके अलावा कंपनी ने सोलर, विंड और बैटरी स्टोरेज को जोड़ने वाली Firm and Dispatchable Renewable Energy (FDRE) परियोजना का चरणबद्ध संचालन भी शुरू किया है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)