होम / बिजनेस / अमीर CEOs की बढ़ी अमीरी, लेकिन कर्मचारियों की Salary इतने प्रतिशत कम हो गई
अमीर CEOs की बढ़ी अमीरी, लेकिन कर्मचारियों की Salary इतने प्रतिशत कम हो गई
टॉप-पेड एग्जीक्यूटिव की लिस्ट में भारत के 150 CEOs ऐसे रहे जिन्हें पिछले साल औसतन एक मिलियन डॉलर बतौर सैलरी मिले.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
पिछले साल यानी 2022 में जहां भारी-भरकम सैलरी लेने वाले CEOs और अमीर हो गए. वहीं, कर्मचारियों को मिलने वाले पैसे में कमी आई. ऑक्सफैम (Oxfam) की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल भारत सहित दुनियाभर के टॉप पेड CEOs को कम से कम 9 प्रतिशत सैलरी हाइक मिला. इसके उलट श्रमिकों के वेतन में 3.19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
बिना वेतन के किया काम
इंटरनेशनल लेबर डे के मौके पर ऑक्सफैम द्वारा जारी रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और सरकारी सांख्यिकी एजेंसियों के नवीनतम आंकड़ों पर आधारित है. रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल श्रमिकों ने औसतन छह दिन मुफ्त में काम किया, क्योंकि उनका वेतन मुद्रास्फीति के मुकाबले कम था, जबकि भारत, यूके, यूएस और दक्षिण अफ्रीका के टॉप एग्जीक्यूटिव की सैलरी में 9 फीसदी का उछाल आया.
एक साल की कमाई 4 दिन में
वहीं, भारतीय सीईओ की बात करें, तो टॉप-पेड एग्जीक्यूटिव की लिस्ट में भारत के 150 CEOs ऐसे रहे जिन्हें पिछले साल औसतन एक मिलियन डॉलर बतौर सैलरी मिले, जो कि साल 2021 की तुलना में करीब 2 फीसदी ज्यादा है. ऑक्सफैम का कहना है कि भारत में एक औसत श्रमिक साल भर में जितनी कमाई करता है, उससे ज्यादा किसी कंपनी का सीईओ 4 घंटे में कमा लेता है. रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि अमेरिका में सबसे अधिक वेतन पाने वाले 100 सीईओ ने 2022 में औसतन 24 मिलियन डॉलर कमाए, जो कि उससे एक साल पहले तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है.
UK और अफ्रीका का हाल
अमेरिका में एक औसत कर्मचारी को 413 साल तक काम करना होगा, तब कहीं जाकर उसकी कुल कमाई किसी टॉप-पेड सीईओ की साल भर की सैलरी के बराबर होगी. इसी तरह, यूके के 100 बेस्ट-पेड CEOs को 2022 में औसतन 5 मिलियन डॉलर का भुगतान किया गया, और उन्हें 4.4 प्रतिशत रियल टर्म पे हाइक मिला. वे यूके में औसत कर्मचारी से 140 गुना अधिक कमाते हैं. वहीं, दक्षिण अफ्रीका में टॉप-पेड चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर यानी CEOs ने 2022 में औसतन 800,000 डॉलर कमाए, यानी औसत कर्मचारी के वेतन का 43 गुना.
अपनी बढ़ा रहे सैलरी
ऑक्सफैम इंटरनेशनल के अंतरिम कार्यकारी निदेशक अमिताभ बेहर (Amitabh Behar) के मुताबिक, एक तरफ दुनियाभर के कॉरपोरेट बॉसेज कर्मचारियों से कह रहे हैं हमें खर्चे/वेतन कम रखने की जरूरत है. वहीं, दूसरी तरफ वह खुद और अपने स्टेकहोल्डर्स को भारी-भरकम भुगतान कर रहे है. अधिकांश लोग बेहद कम सैलरी में ज्यादा घंटे काम कर रहे हैं और उनके लिए जीवन जीना मुश्किल होता जा रहा है.
पुरुषों से कम सैलरी
रिपोर्ट में बताया गया है कि 50 देशों में एक अरब श्रमिकों के औसत वेतन में साल 2022 में 685 अरब डॉलर की कटौती हुई है. वहीं अगर बढ़ती महंगाई के आधार पर देखा जाय तो श्रमिकों को 746 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि महिलाएं और लड़कियां हर महीने कम से कम 380 अरब घंटे बिना सैलरी के काम कर रही हैं. इसके अलावा उन्हें पुरुषों के मुकाबले सैलरी भी कम दी जाती है और उन्हें कई तरह के शोषण का सामना भी करना पड़ता है.
टैग्स