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ऑरेंज इकोनॉमी बनेगी नई ग्रोथ इंजन, Economic Survey में लाइव कॉन्सर्ट और रचनात्मक उद्योगों पर बड़ा फोकस
रिपोर्ट के अनुसार लाइव कॉन्सर्ट और रचनात्मक उद्योग न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि पर्यटन, रोजगार और शहरी सेवाओं में भी बड़ा योगदान देते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
आर्थिक समीक्षा 2025-26 में पहली बार ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ को देश की आर्थिक वृद्धि का अहम आधार बताया गया है. इसमें लाइव कॉन्सर्ट, मनोरंजन कार्यक्रम और रचनात्मक उद्योगों को ऐसी सेवा-प्रधान गतिविधियां माना गया है जो केवल टिकट बिक्री तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पर्यटन, रोजगार और शहरी अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती हैं. सरकार का मानना है कि रचनात्मकता और संस्कृति आधारित यह अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में GDP को नई गति दे सकती है.
क्या है ऑरेंज इकोनॉमी और क्यों है यह खास
आर्थिक समीक्षा के अनुसार ऑरेंज इकोनॉमी वह क्षेत्र है जो रचनात्मकता, संस्कृति और बौद्धिक संपदा से संचालित होता है. इसमें लाइव कॉन्सर्ट, म्यूजिक, मीडिया, कला, पर्यटन और इससे जुड़ी सेवाएं शामिल हैं. समीक्षा में कहा गया है कि यह क्षेत्र मीडिया और पर्यटन के साथ मिलकर विकास का उभरता हुआ इंजन बन सकता है.
कोविड के बाद लाइव कॉन्सर्ट की दमदार वापसी
कोविड-19 महामारी के बाद लाइव कॉन्सर्ट सेक्टर ने तेज रफ्तार से वापसी की है. वर्ष 2024 में लाइव कॉन्सर्ट इंडस्ट्री ने 100 अरब रुपये का आंकड़ा पार कर लिया. इसका फायदा केवल मनोरंजन उद्योग को ही नहीं, बल्कि होटल, ट्रैवल, ट्रांसपोर्ट और शहरी सेवाओं जैसे अन्य क्षेत्रों को भी मिला है. समीक्षा में कहा गया है कि भारत में कॉन्सर्ट अर्थव्यवस्था अभी बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन यह लगातार विस्तार के रास्ते पर है.
युवा आबादी और डिजिटल प्लेटफॉर्म से मिला सहारा
आर्थिक समीक्षा के मुताबिक भारत में लाइव कॉन्सर्ट के बढ़ते चलन के पीछे युवा आबादी, बढ़ती आय, डिजिटल टिकटिंग प्लेटफॉर्म और बेहतर शहरी बुनियादी ढांचा बड़ी वजह हैं. इन कारकों ने बड़े स्तर पर आयोजनों को संभव बनाया है और दर्शकों की पहुंच को भी आसान किया है.
इंटरनेशनल बैंड्स और सिंगर्स ने बढ़ाया ग्लैमर
पिछले साल ब्रिटिश रॉक बैंड कोल्ड प्ले ने मुंबई और अहमदाबाद में पांच कॉन्सर्ट किए, जो पूरी तरह हाउसफुल रहे. वहीं, इस साल अमेरिकी रॉक बैंड लिंकिंन पार्क और सिंगर जॉन मेयर के कार्यक्रमों को लेकर भी जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है. हालांकि, समीक्षा में यह भी माना गया है कि भारत में लाइव कार्यक्रम स्थलों की कमी और विदेशी कलाकारों को भुगतान से जुड़े नियम अभी भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं.
सिंगल विंडो सिस्टम पर काम कर रही सरकार
इन चुनौतियों को देखते हुए आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय लाइव मनोरंजन कार्यक्रमों के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम पर काम कर रहा है. इसमें राज्य सरकारों से जुड़ी सभी जरूरी अनुमतियां शामिल होंगी, जिससे आयोजकों को राहत मिल सकेगी और बड़े अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स भारत में आकर्षित किए जा सकें.
टिकट से आगे भी बड़ा आर्थिक योगदान
समीक्षा में अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि लाइव कॉन्सर्ट केवल टिकट बिक्री तक सीमित नहीं होते. वैश्विक स्तर पर लाइव म्यूजिक कुल म्यूजिक रेवेन्यू का करीब एक तिहाई हिस्सा बनाता है. यूएनसीटीएडी के अनुमानों के अनुसार रचनात्मक उद्योग विभिन्न देशों की GDP में 0.5 से 7 फीसदी तक का योगदान देते हैं.
पर्यटन और रोजगार में भी बड़ा रोल
पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024 में यात्रा और पर्यटन का GDP में योगदान 5.22 फीसदी रहा, जो महामारी से पहले के स्तर के करीब है. इस सेक्टर ने 8.46 करोड़ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा किए. आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि लाइव कॉन्सर्ट और रचनात्मक गतिविधियां इस योगदान को और बढ़ा सकती हैं.
विशेष पर्यटन और मरीन इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
समीक्षा में यह भी संकेत दिया गया है कि भारत में विशेष पर्यटन खंडों की अपार संभावनाएं मौजूद हैं. देश की लंबी तटरेखा पर आधुनिक मरीन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर जल-आधारित पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
राज्यों के मॉडल बने मिसाल
आर्थिक समीक्षा में गुजरात, केरल और सिक्किम के उदाहरण दिए गए हैं. गुजरात की इंफ्रास्ट्रक्चर और इवेंट आधारित पर्यटन पहलें विभागों के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण हैं. वहीं, केरल का सामुदायिक भागीदारी वाला मॉडल जिम्मेदार और पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देता है. सिक्किम का नियंत्रित पर्यटन और स्थिरता पर फोकस यह दिखाता है कि सही नियमन से किसी गंतव्य की गुणवत्ता को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है.
ऑरेंज इकोनॉमी को रफ्तार देने के सुझाव
आर्थिक समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि लाइव कार्यक्रमों के लिए अनुमतियों को सरल बनाया जाए, विरासत स्थलों को ऐसे आयोजनों के लिए खोला जाए और विदेशी कलाकारों की भागीदारी को आसान किया जाए. साथ ही लंबी दूरी की हाइकिंग ट्रेल्स और राष्ट्रीय मरीना विकास नीति जैसे विशेष पर्यटन खंडों पर भी काम करने की जरूरत बताई गई है. इससे कॉन्सर्ट इकॉनमी और ऑरेंज इकोनॉमी की पूरी क्षमता को साकार किया जा सकेगा.
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