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NSE ने BSE पर करोड़ों रुपये का बकाया न चुकाने का लगाया आरोप, लिक्विड एसेट्स में आई गिरावट

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE की क्लियरिंग कॉरपोरेशन की लिक्विड एसेट्स निर्धारित न्यूनतम स्तर से नीचे गिर गई है. इसका खुलासा NSE ने तिमाही नतीजे के साथ किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने एशिया के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर गंभीर आरोप लगाया है. एनएसई  का कहना है कि बीएसई ने उसका बकाया नहीं चुकाया है, जिसके कारण इसकी क्लियरिंग कॉरपोरेशन की लिक्विड एसेट्स निर्धारित न्यूनतम स्तर से नीचे गिर गई हैं. इस मामले को लेकर NSE ने तिमाही नतीजों में जानकारी दी है और इसे तत्काल सुधारने की आवश्यकता बताई है. तो आइए जानते हैं आखिर ये मामला क्या है और बीएसई पर एनएसई का कितना बकाया है?

एनएसई ने लगाया ये आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस समय एनएसई एक नियम को पूरा नहीं कर पा रहा है और इसे लेकर इसने बीएसई पर आरोप लगाया है. एनएसई का कहना है कि इसकी क्लियरिंग कॉरपोरेशन इकाई एनएसई क्लियरिंग लिमिटेड (NCL) का टोटल लिक्विड एसेट्स गिरकर अहम लेवल के भी नीचे आ गया, जिसे नियमों के मुताबिक बनाए रखना जरूरी है. एनएसई का कहना है कि इसका लिक्विड एसेट्स न्यूनतम लेवल से नीचे इसलिए आया क्योंकि बीएसई ने इसे 312.37 करोड़ रुपये के बकाए का भुगतान नहीं किया है. यह जानकारी एनएसई ने दिसंबर तिमाही के नतीजे के साथ में दी है.

मिनिमम लेवल बनाए रखना जरूरी  
लिक्विड एसेट्स का मिनिमम लेवल बनाए रखना इसलिए जरूरी है क्योंकि सभी लेन-देन को क्लियर और सेटल करने का काम क्लियरिंग कॉरपोरेशन का होता है. इसके अलावा एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर जो भी ट्रेड एग्जेक्यूट हो रहे हैं, उन सभी के लिए काउंटर-पार्टी गारंटी मुहैया कराती है. यह मिनिमम लिमिट बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने सेट की है. एनएसई ने तिमाही नतीजे के साथ खुलासा किया कि एनएसई क्लियरिंग ने सेबी को 9 जनवरी 2025 को ही बता दिया था कि मिनिमम लिक्लिड एसेट्स से इसके पास 176.65 करोड़ रुपये कम हैं और इसकी वजह ये है कि बीएसई ने 312.37 करोड़ रुपये का बकाया नहीं चुकाया है. अब इसकी भरपाई मार्च 2025 तक आंतरिक जुटान या रिसीवेबल्स की रिकवरी के जरिए की जाएगी. इसके अलावा एनएसई क्लियरिंग ने इस डेफिसिट का कैलकुलेशन करते समय 31 दिसंबर 2024 तक 424.35 करोड़ रुपये के अर्जित ब्याज को शामिल नहीं किया था.

कैश मार्केट में NSE की 94 प्रतिशत हिस्सेदारी
एनएसई देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है, जिसकी कैश मार्केट में 94 प्रतिशत हिस्सेदारी है. इक्विटी फ्चूयर्स में तो इसकी 99.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है और दिसंबर तिमाही के आंकड़ों के अनुसार इक्विटी ऑप्शंस में 87.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है. दिसंबर तिमाही में कैश और इक्विटी फ्यूचर्स 30 प्रतिशत से अधिक बढ़े और करेंसी फ्यूचर्स में इसका 93 मार्केट पर कब्जा है. वैश्विक मार्केट में बात करें तो कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या के हिसाब से एनएसई दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज है और ट्रेड्स की संख्या के हिसाब से दूसरा, पिछले साल 2024 में एनएसई पर एशिया में सबसे अधिक आईपीओ आए और दुनिया भर में सबसे अधिक इक्विटी कैपिटल जुटाया. नतीजे की बात करें तो अप्रैल-दिसंबर 2024 में एनएसई ने एसटीटी के रूप में सरकार को 37,271 करोड़ रुपये दिए. इसके अलावा इसने सरकार को 3,639 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स और जीएसटी और 2,976 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी दी.


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