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अब बासमती चावल को लेकर आई यह खबर, किसानों को मिल सकती है राहत

केन्‍द्र सरकार बासमती चावल के मिनिमम एक्‍सपोर्ट प्राइस में कमी कर सकती है. मौजूदा समय में ये दाम 1200 डॉलर प्रति मीट्रिक टन है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

पिछले कुछ समय से घरेलू बाजार में बासमती चावल की आपूर्ति को बढ़ाने और दामों को न बढ़ने देने के मकसद से कई तरह के प्रतिबंधों को लगाया गया है. इससे पहले केन्‍द्र सरकार ने बासमती चावल के निर्यात में कमी लाने के मकसद से उसके मिनिमम एक्‍सपोर्ट प्राइस में इजाफा कर दिया था. लेकिन अब खबर यह आ रही है कि किसानों की शिकायत के बाद सरकार मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस में कमी ला सकती है. दरअसल सरकार ये फैसला इसलिए ले सकती है, क्योंकि अब बाजार में नई फसल के चावल आ चुके हैं और अब सरकार के पास पर्याप्त मात्रा में चावल उपलब्ध हो सकता है. ऐसे में सरकार बासमती चावल पर मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस 1200 डॉलर प्रति टन से 950 डॉलर प्रति टन तक ला सकती है.

ऊंची कीमत के कारण कम हो रहा था एक्‍सपोर्ट
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दरअसल सरकार मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस में इजाफा तभी करती है जब सरकार चाहती है कि चावल का एक्सपोर्ट देश से कम हो. सरकार दरअसल ऐसा कदम खाद्य सुरक्षा को मध्य नजर रखते हुए उठाती है. इसके कारण किसानों को कब मुनाफा होता है और उन्हें बाजार से अच्छा मूल्य नहीं मिल पाता. सरकार ने पिछली बार इस मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस को $1200 प्रति टन तक पहुंचा दिया था जिसके कारण चावल की डिमांड काम हो गई. लेकिन किसानों के अनुरोध के बाद सरकार अब इसमें कमी लाने की पर सोच सकती है. मीडिया रिपोर्ट कहती है कि सरकार मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस को $1200 प्रति टन से 950 डॉलर प्रति टन तक ला सकती है.

इन देशों में निर्यात होता है भारत का चावल
दरअसल लंबे दोनों वाला बासमती चावल भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में ही पैदा होता है. इन दो देशों के चावल की डिमांड ईरान, इराक, यमन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त  राज्य अमेरिका जैसे देशों में रहती है. इन देशों में 4 मिलियन मीट्रिक टन से भी अधिक बासमती का निर्यात किया जाता है. लेकिन दाम बढ़ाने के कारण इसमें कमी देखने को मिल रही थी.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय चावल निर्यातक महासंघ का कहना है की मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस को कम करने से किसानों और निर्यातकों दोनों को फायदा होगा. उन्हें मौजूदा समय में $1200 प्रति टन के कारण नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि दाम इतना ज्यादा बढ़ गया है कि चावल की खरीद लगभग बंद हो चुकी है. किसानों का कहना है कि अगर यह एक्सपोर्ट खुलता है तो उनका नुकसान कम हो सकता है.

सरकार की ओर से अगस्त में लिया गया था फैसला
देश में चावल की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए सरकार की ओर से 28 अगस्त को गैर बासमती सफेद चावल के निर्यात को कम करने के लिए मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस में इजाफा कर दिया गया था. सरकार की ओर से ऐसा करने के पीछे घरेलू बाजार में कीमतों में हो रहे इजाफे को वजह बताया गया था. अगस्त में सरकार ने मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस को $1200 प्रति टन तक कर दिया था, जिसके बाद से एक्सपोर्ट में काफी कमी आ गई है. इससे पहले सितंबर 2022 में केंद्र ने टूटे चावल के निर्यात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था. इसके बाद अगस्त 2023 में केंद्र सरकार ने उबले हुए गैर बासमती चावल पर 20% निर्यात शुल्क लगाया था.

 


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