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अब खत्म हो जाएगा Go First एयरलाइन का वजूद! NCLT ने दी संपत्ति बेचकर कर्ज चुकाने की मंजूरी
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने बंद पड़ी बजट एयरलाइन Go First के लिक्विडेशन को मंजूरी दे दी है. एयरलाइन कंपनी अपनी संपत्ति बेचकर कर्ज का भुगतान करेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने पिछले दो साल से बंद पड़ी बजट एयरलाइन गो फर्स्ट (Go First) के लिक्विडेशन को मंजूरी दे दी है. यह निर्णय न्यायिक सदस्य महेंद्र खंडेलवाल और तकनीकी सदस्य डॉ. संजीव रंजन की पीठ द्वारा लिया गया है, जिन्होंने एयरलाइन की लेंडर्स समिति (COO) द्वारा प्रस्तुत आवेदन के पक्ष में फैसला सुनाया. बता दें, लिक्विडेशन के तहत किसी कंपनी की संपत्तियों को बेचकर उसके कर्ज और देनदारियों का भुगतान किया जाता है. इस प्रक्रिया के बाद कंपनी का वजूद भी खत्म हो जाता है, इसका मतलब अब गो फर्स्ट एयरलाइन कभी उड़ान नहीं भरेगी और एक इतिहास बनकर रह जाएगी. तो आइए जानते हैं कंपनी पर कितना कर्ज है?
स्वेच्छा से की थी दिवाला कार्यवाही की मांग
वाडिया समूह के स्वामित्व वाली गो फर्स्ट ने 2 मई, 2023 को परिचालन बंद कर दिया था और दिवालियापन संहिता (IBC) की धारा 10 के तहत 10 मई को स्वेच्छा से दिवाला कार्यवाही की मांग की थी. कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) में प्रवेश के बाद एयरलाइन की संपत्ति और संचालन की देखरेख के लिए एक रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) नियुक्त किया गया था. हालांकि, सीओसी ने विमान और परिचालन संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए सितंबर 2024 में निर्धारित किया कि एयरलाइन के पास रिवाइवल का कोई और रास्ता नहीं है और लिक्विडेशन के लिए दायर किया गया था. यह निर्णय न्यायिक सदस्य महेंद्र खंडेलवाल और तकनीकी सदस्य डॉ. संजीव रंजन की पीठ ने किया.
कंपनी के ऊपर 11 हजार करोड़ का कर्ज
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एयरलाइन पर कुल लगभग 11,000 करोड़ रुपये का कर्ज है. इस पर बैंकों का 6,521 करोड़ रुपये बकाया है. इसमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया 1,987 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा लेंडर है, इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा 1,430 करोड़ रुपये, ड्यूश बैंक 1,320 करोड़ रुपये और आईडीबीआई बैंक 58 करोड़ रुपये है. इसके अलावा, एयरलाइन पर विमान लीज पर देने वालों का 2,000 करोड़ रुपये, विक्रेताओं का 1,000 करोड़ रुपये, ट्रैवल एजेंटों का 600 करोड़ रुपये और ग्राहकों का रिफंड 500 रुपये करोड़ बकाया है. वहीं, गो फर्स्ट ने COVID-19 महामारी के दौरान शुरू की गई सरकार की इमरजेंसी लोन स्कीम के तहत 1,292 करोड़ रुपये का उधार भी लिया. एयरलाइन की टॉप संपत्तियों में ठाणे में 94 एकड़ जमीन का पार्सल, जिसकी कीमत लगभग 3,000 करोड़ रुपये है. मुंबई में एक एयरबस ट्रेनिंग फैसिलिटी और इसका मुख्यालय शामिल है.
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