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अब सरकार की पोर्ट प्राइवेटजाइशेन योजना में अवसर तलाश रही है JSW, इस पोर्ट पर है नजर
कंपनी ने दो साल पहले ही कंटेनर लिक्विड क्षेत्र में कदम रखा है. कंपनी फुजैरा पोर्ट पर 465000 क्यूबिक मीटर क्षमता की तरल भंडारण सुविधा का अधिग्रहण करने वाली है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
बीते कई सालों से पोर्ट सेक्टर में काम कर रही है JSW Infrastructure की नजर सरकार की पोर्ट प्राइवेटाइजेशन योजना पर है. कंपनी की नजर निकोबार द्वीप में गैलाथिया खाड़ी में मेगा ट्रांसशिप पोर्ट पर है. हाल ही इसके संयुक्त प्रबंध निदेशक ने हाल ही में एक साक्षात्कार में इसे लेकर अहम बात कही थी. कंपनी इसकी तलाश जरूर कर रही है लेकिन उसका कहना है कि ये निश्चित नहीं है हम 100 प्रतिशत इसके साथ आगे बढ़ेंगे.
क्या बोले JSW के सीईओ?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, JSW के सीईओ अरुण माहेश्वरी ने कहा कि जिस तरह से भारत सरकार अवसर खोल रही है ये अहम है. इस अवसर के बीच हम भी अपनी मजबूत बैलेंस शीट और इस क्षेत्र के तेजी से बढ़ते दायरे के बीच हर संभव अवसर को देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम गैलाथिया की ओर देख तो रहे हैं लेकिन उसके साथ जाएंगे ये अभी 100 फीसदी कंफर्म नहीं है. JSW उन 10 कंपनियों में एक है जिन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए इच्छा जताई है. इन सभी कंपनियों में प्रमुख तौर पर रॉयल बोस्कलिस वेस्टमिंस्टर एनवी, रेल विकास निगम लिमिटेड, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और एस्सार पोर्टस लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं.
इतनी है इस प्रोजेक्ट की लागत
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की लागत 65000 से 85000 करोड़ रुपये है. मौजूदा समय में JSW देश के नौ राज्य बंदरगाहों पर स्थित पोर्ट का संचालन कर रही है. अगर आज कंपनी के कारोबार पर नजर डालें तो मौजूदा समय में वो थोक बाजार से ज्यादा कारोबार कर रही है. लेकिन कंपनी आने वाले समय में तरल पोर्टफोलियो को लेकर भी काम करना चाहती है, जिससे उसकी बैलेंस शीट में इसका एक तिहाई हिस्सा शामिल हो सके. कंपनी अभी दो साल पहले ही कंटेनर और लिक्विड सेगमेंट में शामिल हुई है. ये कारोबार अभी हमारे कारोबार का केवल दो प्रतिशत है.
फुजैरा एक सोच समझकर किया गया निवेश
कंपनी ने हाल ही एमपीटी कमोडिटीज लिमिटेड के साथ शेयर परचेज एग्रीमेंट के जरिए फुजैरा बंदरगाह पर 465000 क्यूबिक मीटर क्षमता की तरल भंडारण सुविधा का अधिग्रहण करेगा. कंपनी का मानना है कि ये उसका सोच समझक उठाया गया कदम है. इसके जरिए वो मल्टी पोर्टफोलियो में शामिल होने की रणनीति की ओर आगे बढ़ रही है. फुजैरा समूची दुनिया में तीसरा सबसे सबसे बड़ा ऑयल टैंकर सेंटर है. कंपनी का कहना है कि इसे उससे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा.
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