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ITR फाइल करना ही नही, वेरिफाई करना भी है जरूरी, नहीं तो लगती है बड़ी पेनल्टी
अगर आप 31 जुलाई तक अपना आईटीआर फाइल नहीं करते हैं तो आप पेनल्टी के साथ 31 दिसंबर तक बिलेटेड आईटीआर फाइल कर सकते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
आईटीआर फाइल तो सभी लोग कर देते हैं लेकिन कई बार ज्यादातर टैक्सपेयर उसे वेरिफाई करना भूल जाते हैं. इसका नतीजा ये होता है कि आईटीआर फाइल करने के बावजूद उन्हें पेनल्टी का सामना करना पड़ जाता है. इसे तकनीकी भाषा में ई वेरिफिकेशन के नाम से जाना जाता है. ई वेरिफिकेशन ये बताता है कि आपने जो जानकारी दर्ज की है वो सही है.
आईटीआर को समय पर वेरिफाई करना बेहद जरूरी
जब भी आप आईटीआर डेटा इलेक्ट्रॉनिक रूप से ट्रांसमिट और ई वेरिफाई किया जाता है ITR-V ट्रांसमिशन के 30 दिनों के भीतर जमा किया जाता है तो इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन को रिटर्न फाइल करने की तारीख कहा जाता है. लेकिन अगर आईटीआर इलेक्ट्रानिक रूप से ट्रांसमिट किया जाता है और ई वेरिफिकेशन को आईटीआर वी 30 दिन की सीमा के बाद किया जाता है तो ई वेरिफिकेशन या आईटीआरवी की तारीख को फाइलिंग की तारीख माना जाएगा. आयकर के कानून की भाषा में इसे देरी से फाइल किया माना जाएगा. ई वेरिफिकेशन की तारीख को आपकी रिटर्न फाइल करने की तारीख माना जाएगा ना कि मूल फाइलिंग की तारीख को. इस देरी के लिए आपको पेनल्टी भी चुकानी पड़ सकती है.
कितना जरूरी है ई वेरिफिकेशन
ई वेरिफिकेशन की जरूरत को आप ऐसे भी समझ सकते है कि अगर ये ई वेरिफाई नहीं है तो इसे अमान्य भी माना जा सकता है. इसे ऐसे मान लिया जाता है कि जैसे आपने कभी फाइल किया ही नहीं हो. इससे भविष्य में परेशानियां और पैदा हो सकती हैं.
कितनी देनी पड़ सकती है पेनल्टी
अगर आप 31 जुलाई तक अपना आईटीआर फाइल नहीं करते हैं तो आप पेनल्टी के साथ 31 दिसंबर तक बिलेटेड आईटीआर फाइल कर सकते हैं. 31 जुलाई 2024 से लेकर 31 दिसंबर 2024 के बाद अपना आईटीआर फाइल करते हैं तो आपको 5000 रुपये तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है. इसलिए इस जुर्माने से बचने के लिए जरूरी है कि आप समय से आईटीआर फाइल भी करें और उसे वेरिफाई भी करें.
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