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बजट 2027 में खेती का नया रोडमैप : कृषि में हाई-वैल्यू फसलों और ग्रामीण उद्यमों पर फोकस
विशेषज्ञों के अनुसार यह बजट भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और उच्च गुणवत्ता वाले फ्रेगरेंस और फ्लेवर उत्पादों के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ाने वाला है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2027 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए कृषि क्षेत्र में पारंपरिक फसल-आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर उच्च मूल्य वाली नकदी फसलों और संबद्ध गतिविधियों पर विशेष जोर दिया है. इस बजट में नारियल, कोको, काजू और चंदन जैसी बागान फसलों के साथ-साथ मत्स्य पालन और पशुपालन को किसानों की आय बढ़ाने का अहम माध्यम बताया गया है.
कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए 7.1% वृद्धि का अनुमान
बजट दस्तावेजों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों के लिए 7.1 फीसदी की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जो वित्त वर्ष 2026 के संशोधित अनुमान से अधिक है. हालांकि, कुल मिलाकर इस क्षेत्र पर होने वाला खर्च बजट अनुमान 2026 की तुलना में 4.4 फीसदी कम रहने का अनुमान है, जिसे लेकर विशेषज्ञों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
उच्च मूल्य वाली खेती और ग्रामीण उद्यमों पर जोर
वित्त मंत्री ने बजट भाषण में उच्च मूल्य वाली कृषि, पशुपालन, पशु चिकित्सा सेवाओं और खासतौर पर महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहलों की घोषणा की. तटीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन की वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की योजना पेश की गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
पशुपालन और एग्री-टेक को मिलेगा बढ़ावा
पशुपालन क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष उद्यम विकास योजना का ऐलान किया गया है. इसके साथ ही 150 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ ‘भारत-विस्तार’ नामक एक बहुभाषी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल लॉन्च करने की घोषणा की गई है, जो एग्रीस्टैक पोर्टल को आईसीएआर के कृषि पद्धति पैकेज से जोड़ेगा.
तटीय इलाकों में नकदी फसलों से बढ़ेगी आय
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार कृषि में विविधता लाने, उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय में इजाफा करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहित करेगी.
हाई-वैल्यू फसलों को मिला समर्थन
बजट 2026 को लेकर इंडस्ट्री जगत ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है. सचीरोम के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ परफ्यूमर मनोज अरोड़ा का कहना है कि इस बजट में स्वास्थ्य, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग पर मजबूत फोकस देखने को मिलता है, जो भारत के वेलनेस और एग्री-आधारित उद्योगों के लिए लंबी अवधि में फायदेमंद साबित होगा.
मनोज अरोड़ा ने कहा, “केंद्रीय बजट 2026 में स्वास्थ्य, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग पर मजबूत फोकस दिखता है. 10,000 करोड़ रुपये की बायोफार्मा शक्ति योजना, नए मेडिकल हब और आयुष के विस्तार से भारत का वेलनेस इकोसिस्टम और मजबूत होगा, जिसका सीधा संबंध फ्रेगरेंस और फ्लेवर इंडस्ट्री से है. नारियल, कोको, काजू और चंदन जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को समर्थन देना बेहद उत्साहजनक है, क्योंकि ये महत्वपूर्ण कच्चा माल हैं और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करते हैं. सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के कदम लंबे समय के लिए भरोसा पैदा करते हैं. कुल मिलाकर, यह बजट भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और उच्च गुणवत्ता वाले फ्रेगरेंस और फ्लेवर उत्पादों के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ाने वाला है.”
तिलहन-दलहन पर चुप्पी, विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले साल के बजट में तिलहन और दलहन उत्पादन बढ़ाने को लेकर कई अहम घोषणाएं की गई थीं, लेकिन इस बार बजट में इन फसलों का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है. इसे लेकर किसान संगठनों ने निराशा जताई है. भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि कृषि पूरी तरह उत्पादकता पर निर्भर है, लेकिन किसान की आय सिर्फ उत्पादन बढ़ने से नहीं, बल्कि फसलों का उचित मूल्य मिलने से भी बढ़ती है. उनके मुताबिक, यह बजट इस अहम पहलू को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं कर पाया है.
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