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CBDT के नए आयकर नियम लागू, 1 अप्रैल से बदलेंगे टैक्स के कई नियम
सरकार का यह कदम बदलती आर्थिक वास्तविकताओं और शहरी खर्चों को ध्यान में रखते हुए कर प्रणाली को अधिक व्यावहारिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में देखा जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने आयकर नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे. ये नियम नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत लाए गए हैं और इनका असर वेतनभोगी कर्मचारियों, कंपनियों और करदाताओं के अनुपालन ढांचे पर व्यापक रूप से पड़ेगा. खासतौर पर हाउस रेंट अलाउंस (HRA), इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) टैक्सेशन, ट्रांसफर प्राइसिंग और विदेशी कर क्रेडिट से जुड़े प्रावधानों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं.
HRA में बड़ा बदलाव: चार नए शहर ‘मेट्रो’ के बराबर
नए नियमों के तहत बेंगलूरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को HRA छूट के मामले में मेट्रो शहरों की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है. अब इन शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को वेतन का 50% तक HRA छूट मिल सकेगी, जो पहले केवल मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई तक सीमित थी. हालांकि, अन्य शहरों के लिए HRA छूट की सीमा 40% ही बनी रहेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम इन उभरते शहरों में बढ़ते किराए के दबाव को स्वीकार करने की दिशा में उठाया गया है, हालांकि नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहर अभी भी इस सूची से बाहर हैं.
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पर टैक्स नियम हुए स्पष्ट
CBDT ने कंपनी द्वारा कर्मचारियों को दिए जाने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों के कराधान को लेकर भी स्पष्टता दी है. नए नियमों के अनुसार, EV को अब छोटी पेट्रोल या डीजल कार के समान माना जाएगा, बशर्ते उसका उपयोग आंशिक रूप से ऑफिस और निजी काम दोनों के लिए हो. इससे यह तय करना आसान होगा कि इस सुविधा से मिलने वाले लाभ का कितना हिस्सा ‘परक्विजिट टैक्स’ (Perquisite Tax) के दायरे में आएगा.
बीमा प्रीमियम रिपोर्टिंग में सख्ती
नए नियमों में वित्तीय लेनदेन रिपोर्टिंग को और सख्त किया गया है. अब बीमा कंपनियों को:
1. 5 लाख रुपये से अधिक के प्रीमियम (जहां PAN उपलब्ध है) की जानकारी देनी होगी.
2. 2.5 लाख रुपये से अधिक** के प्रीमियम (जहां PAN उपलब्ध नहीं है) की रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी.
यह कदम कर अनुपालन को मजबूत करने और उच्च मूल्य के लेनदेन पर निगरानी बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है.
ट्रांसफर प्राइसिंग और विदेशी कर क्रेडिट पर भी असर
नए आयकर नियमों में ट्रांसफर प्राइसिंग और विदेशी कर क्रेडिट (Foreign Tax Credit) के दावों से जुड़े प्रावधानों को भी अपडेट किया गया है. इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय आय वाले करदाताओं के लिए अनुपालन ढांचा अधिक स्पष्ट और संरचित होगा.
क्या होगा असर?
इन नियमों का सीधा असर वेतनभोगी वर्ग, कॉर्पोरेट सेक्टर और उच्च मूल्य के निवेशकों पर पड़ेगा.
1. मेट्रो जैसे शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को HRA में राहत मिलेगी.
2. EV उपयोग को बढ़ावा मिलेगा.
3. टैक्स अनुपालन और पारदर्शिता बढ़ेगी.
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