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MSME सेक्टर को नई रफ्तार: सरकार ने सिडबी को 5,000 करोड़ की इक्विटी सहायता दी मंजूरी

सरकार का यह कदम MSME सेक्टर के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन साबित हो सकता है. सिडबी को मजबूत करने से कर्ज की उपलब्धता बढ़ेगी, नए उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

केंद्र सरकार ने MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर को मजबूत करने के लिए एक अहम फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देने की मंजूरी दी गई है. सरकार का मानना है कि इस कदम से MSME को कर्ज उपलब्धता बढ़ेगी और उन्हें कम ब्याज दर पर वित्तीय मदद मिल सकेगी, जिससे कारोबार को नई गति मिलेगी.

सरकार का लक्ष्य: MSME को सस्ते कर्ज तक आसान पहुंच

सरकार ने इस फैसले के पीछे यह तर्क रखा है कि SIDBI को अतिरिक्त पूंजी मिलने से वह बाजार से कम लागत पर संसाधन जुटा सकेगा. इससे बैंक MSME सेक्टर को अधिक प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर कर्ज दे पाएगा.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 5,000 करोड़ रुपये की यह राशि वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के माध्यम से तीन किश्तों में SIDBI में डाली जाएगी.

1. वित्त वर्ष 2025-26 में 3,000 करोड़
2. वित्त वर्ष 2026-27 में 1,000 करोड़
3. वित्त वर्ष 2027-28 में 1,000 करोड़

पहली किश्त की कीमत 31 मार्च 2025 की बुक वैल्यू (568.65 रुपये प्रति शेयर) के आधार पर तय की जाएगी. बाकी दो किश्तों की कीमत संबंधित वित्त वर्ष के पिछले साल की 31 मार्च की बुक वैल्यू के आधार पर तय होगी.

MSME सेक्टर: देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़

सरकार का कहना है कि MSME देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और रोजगार सृजन में इनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण है. इस इक्विटी निवेश के बाद SIDBI के जरिए वित्तीय सहायता मिलने वाले MSME की संख्या बढ़ने की संभावना है.

वित्त वर्ष 2024-25 के अंत तक SIDBI के माध्यम से 76.26 लाख MSME को वित्तीय सहायता मिल रही है. सरकार के अनुमान के अनुसार, यह संख्या वित्त वर्ष 2027-28 के अंत तक 1.02 करोड़ तक पहुंच सकती है, यानी लगभग 25.74 लाख नए MSME इस वित्तीय प्रणाली से जुड़ेंगे.

रोजगार में भी बढ़ोतरी का अनुमान

सरकार की उम्मीद है कि इस पहल से रोजगार के अवसरों में भी तेजी आएगी. अनुमान है कि 2027-28 के अंत तक करीब 1.12 करोड़ नए रोजगार पैदा हो सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि SIDBI को मजबूत करने का यह फैसला मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी समर्थन देगा. सस्ता और आसान कर्ज मिलने से छोटे कारोबारी नई तकनीक अपनाने, उत्पादन बढ़ाने और नए बाजारों में विस्तार करने में सक्षम होंगे, जिससे देश की समग्र आर्थिक वृद्धि को बल मिलेगा.

 


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