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वर्कप्लेस हेल्थ पर नया फोकस, एर्गोनॉमिक निवेश से मिलेगा बड़ा फायदा

Vergo की IdeaBaaz पर उपस्थिति ने भारत में कार्यस्थलों पर लंबे समय तक बैठने और खराब सीटिंग से होने वाले स्वास्थ्य एवं उत्पादकता नुकसान पर ध्यान खींचा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

एर्गोनॉमिक फर्नीचर स्टार्टअप Vergo ने Zee TV के लोकप्रिय रियलिटी शो IdeaBaaz में अपनी मौजूदगी से सभी का ध्यान खींचा है. शो के दौरान कंपनी ने भारत के कार्यस्थलों में लंबे समय तक बैठने और खराब एर्गोनॉमिक्स से जुड़ी एक गंभीर लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली समस्या को उजागर किया.

बैठने की आदत से करोड़ों का नुकसान

एपिसोड के दौरान Vergo ने बताया कि भारत में 56% से अधिक ऑफिस कर्मचारी रोजाना आठ घंटे से ज्यादा समय तक बैठे रहते हैं. वहीं, लगभग 72% आईटी प्रोफेशनल्स मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर (MSDs) से प्रभावित हैं, जिसके कारण गैर-हाजिरी की दर आदर्श एर्गोनॉमिक कार्यस्थलों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है. रिसर्च के मुताबिक, खराब सीटिंग के कारण उत्पादकता में आई कमी से भारतीय कंपनियों को हर साल 8,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होता है, जबकि सिर्फ खराब नींद के चलते प्रति कर्मचारी करीब 2.1 लाख रुपये सालाना का नुकसान उठाना पड़ता है. यदि 100 कर्मचारियों के लिए सीटिंग उपयुक्त न हो, तो कुल लागत करीब 28 लाख रुपये तक पहुंच सकती है.

पारंपरिक कुर्सियां बन रही हैं दर्द की वजह

Vergo के फाउंडर ने बताया कि ज्यादातर पारंपरिक ऑफिस कुर्सियां यह मानकर डिजाइन की जाती हैं कि शरीर स्थिर रहता है. इससे रीढ़ की प्राकृतिक गति रुक जाती है और कुछ ही मिनटों में पीठ, गर्दन और कंधों में दर्द शुरू हो जाता है. आंकड़ों के अनुसार, 68% ऑफिस कर्मचारी लोअर बैक पेन, 52% गर्दन दर्द और 45% कंधे दर्द की शिकायत करते हैं, जिसका सीधा संबंध कठोर बैकरेस्ट और फिक्स्ड लंबर सपोर्ट से है.

Vergo का समाधान: शरीर के साथ चलने वाली सीटिंग

Vergo का फोकस ऐसी एडैप्टिव सीटिंग पर है जो यूजर के शरीर, कद और मूवमेंट के अनुसार खुद को ढालती है. रिसर्च बताती है कि डायनामिक पोस्टर को सपोर्ट करने वाली एक्टिव चेयर्स ध्यान से जुड़े कार्यों में गलतियों को 20% तक कम कर सकती हैं, फिर भी भारत के 77% ऑफिस अब भी स्थिर और कठोर कुर्सियों का इस्तेमाल कर रहे हैं. कंपनी ने तीन प्रमुख समाधान बताए, जिनमें एडजस्टेबल चेयर्स, माइक्रो-मूवमेंट को बढ़ावा देने वाले एक्टिव स्टूल और स्प्रिंग या इलास्टोमर तकनीक से लैस डायनामिक चेयर्स शामिल हैं.

Vergo के फाउंडर हर्ष वाधवानी ने कहा, “लोग असुविधा को सामान्य मान लेते हैं क्योंकि नुकसान धीरे-धीरे होता है. लेकिन एक बार जब कोई ऐसी सीटिंग का अनुभव करता है जो शरीर की प्राकृतिक गति को सपोर्ट करती है, तो उसकी उम्मीदें हमेशा के लिए बदल जाती हैं. हमारा लक्ष्य एर्गोनॉमिक्स को इलाज नहीं, बल्कि रोकथाम का जरिया बनाना है. कुर्सियां सिर्फ फर्नीचर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और उत्पादकता के टूल हैं.”

एर्गोनॉमिक्स में निवेश क्यों जरूरी

शो में यह भी बताया गया कि भारत में एर्गोनॉमिक्स को अब भी लग्जरी समझा जाता है, जबकि 68% कर्मचारी मस्कुलोस्केलेटल दर्द से जूझ रहे हैं. स्टडीज के अनुसार, सही एर्गोनॉमिक निवेश पर खर्च किए गए हर एक रुपये पर कंपनियों को हेल्थकेयर में 289 रुपये और गैर-हाजिरी में 241 रुपये की बचत होती है, जो साफ तौर पर बेहतर रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट दिखाता है.

नई सोच की ओर बढ़ता भारत

Vergo ने यह भी समझाया कि कुर्सियों के डिजाइन में 90 डिग्री के कठोर हिप एंगल की जगह 120 डिग्री का एंटीरियर टिल्ट, स्प्लिट सीट पैन, इलास्टोमर लंबर सपोर्ट और डायनामिक आर्मरेस्ट व फुटरेस्ट अपनाने से ग्लूटियल प्रेशर 30% तक कम हो सकता है और रीढ़ की प्राकृतिक स्थिति बनी रहती है.

IdeaBaaz पर Vergo की प्रस्तुति दर्शकों और प्रोफेशनल्स के बीच काफी प्रभावी रही. यह साफ संकेत है कि युवा भारतीय प्रोफेशनल्स अब एर्गोनॉमिक सीटिंग को लग्जरी नहीं, बल्कि सेहत, आराम और लंबी अवधि की उत्पादकता में निवेश के रूप में देखने लगे हैं.

 


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