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नेस्ले इंडिया करने वाली है Stock Split, जानें इसके बारे में सबकुछ
नेस्ले इंडिया के बोर्ड की बैठक 19 अक्टूबर को होने वाली है उसमें स्टॉक स्प्लिट के बारे में फैसला लिया जाएगा,
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
'मैगी' बनाने वाली दिग्गज FMCG कंपनी नेस्ले इंडिया (Nestle India) अपने स्टॉक्स को स्प्लिट करने जा रही है. इस संबंध में फैसला कंपनी की 19 अक्टूबर को होने वाली बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बैठक में कंपनी के 10 रुपए के फेस वैल्यू के शेयरों के स्टॉक स्प्लिट पर फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि हाल ही में ब्रोकरेज फर्म UBS के एनालिस्ट ने नेस्ले इंडिया पर अपनी रेटिंग को 'Buy' से घटाकर 'Neutral' कर दिया था.
कंपनी का मुनाफा बढ़ा
Nestle एक स्विस कंपनी है और नेस्ले इंडिया इसकी सब्सिडियरी कंपनी है, जिसका मुख्यालय हरियाणा के गुरुग्राम में है. भारत में नेस्ले के प्रोडक्ट्स को काफी पसंद किया जाता है. कंपनी की मैगी सबकी चहती बनी हुई है. यही वजह है कि नेस्ले इंडिया का मुनाफा बढ़ा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वित्तवर्ष 2022-23 की अप्रैल-जून तिमाही के मुकाबले वित्तवर्ष 2023-24 की अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का मुनाफा 515 करोड़ रुपए से बढ़कर 698.3 करोड़ रुपए हो गया है. इसी तरह, तिमाही में कंपनी की इनकम 4036.6 करोड़ से बढ़कर 4658.5 करोड़ रुपए हो गई है.
क्या होता है स्टॉक स्प्लिट?
चलिए अब ये भी जान लेते हैं कि आखिर स्टॉक स्प्लिट क्या होता है. जैसा कि नाम से ही स्पष्ट हो रहा है - स्टॉक स्प्लिट का मतलब है शेयर विभाजन. इसके तहत कंपनी अपने शेयरों को विभाजित करती है. सरल शब्दों में कहें तो किसी एक शेयर को तोड़कर दो या उससे ज्यादा बना देना. आमतौर पर ऐसा तब किया जाता है जब कंपनियों को लगता है कि स्टॉक की ज्यादा कीमत के चलते छोटे निवेशक उसके शेयरों में ज्यादा निवेश नहीं कर पा रहे हैं. कंपनी ऐसे निवेशकों को आकर्षित करने और बाजार में मांग बढ़ाने के लिए स्टॉक स्प्लिट का सहारा लेती है.
क्या होता है शेयरधारकों पर असर?
कंपनी द्वारा अपने शेयरों को विभाजित करने पर शेयरधारकों को उनके पास मौजूद हर एक शेयर के लिए एक अतिरिक्त शेयर दिया जाता है. इससे शेयरधारक के पास पहले से मौजूद शेयरों की संख्या दोगुनी हो जाती है. हालांकि, इससे निवेश की वैल्यू पर इससे कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि दो हर एक शेयर को दो शेयरों में स्प्लिट करने से उस एक शेयर की वैल्यू आधी हो जाती है. वहीं, शेयर स्प्लिट से कंपनी के शेयरों की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन इससे कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन प्रभावित नहीं होता. स्टॉक स्प्लिट से शेयरों की कीमत घटती है और इससे छोटे निवेशकों के लिए उनमें निवेश करना आसान हो जाता है.
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