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भारत में लगभग 7.5 करोड़ कामकाजी महिलाएँ वित्तीय प्रणाली से अभी भी वंचित: रिपोर्ट

जैसे-जैसे भारत का वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र परिपक्व होता है, वास्तविक समावेशन इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पाद “वन-साइज़-फिट्स-ऑल” डिज़ाइन से बाहर निकलकर महिलाओं के वास्तविक वित्तीय व्यवहार, घर, समुदाय और जीवन-चरणों के अनुसार ढाले जाएँ.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

डिजिटल तकनीक और वित्तीय सेवाओं की बढ़ती पहुंच के बावजूद भारत की बड़ी संख्या में कामकाजी महिलाएँ अभी भी औपचारिक वित्तीय प्रणाली से पूरी तरह जुड़ी नहीं हैं. यह बात रेडसीअर कंसल्टिंग की नई रिपोर्ट में सामने आई है, जिसने वित्तीय पहुंच और वास्तविक उपयोग के बीच मौजूद अंतर को उजागर किया है. 

डिजिटल पहुंच बढ़ी, पर क्रेडिट और निवेश में भागीदारी सीमित

पिछले सात वर्षों में भारत का वित्तीय समावेशन सूचकांक लगातार बढ़ा है, जो बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और क्रेडिट की गहरी पैठ को दर्शाता है. लेकिन कई महिलाओं के लिए भागीदारी केवल बुनियादी पहुंच तक सीमित रह जाती है. महिलाएँ पुरुषों की तुलना में क्रेडिट कार्ड रखने, व्यक्तिगत लोन लेने या म्यूचुअल फंड में सक्रिय निवेश करने की संभावना कम होती है, भले ही डिजिटल टूल्स का ज्ञान बढ़ रहा हो.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि महिलाएँ क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत लोन उपयोगकर्ताओं का केवल एक छोटा हिस्सा हैं और म्यूचुअल फंड की संपत्ति का लगभग एक तिहाई हिस्सा ही उनके पास है. जबकि अब भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में महिलाएँ लगभग आधी हैं और डिजिटल भुगतान की अपनाने की दर पुरुषों से अधिक है.

परिवार और जीवन-दौर की भूमिका

रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की वित्तीय भागीदारी की बाधा रुचि की कमी नहीं, बल्कि वित्तीय उत्पादों के डिज़ाइन और संचार में है. अधिकतर उत्पाद स्वतंत्र निर्णय और जोखिम लेने की क्षमता को मानकर बनाए जाते हैं, जबकि महिलाओं के वित्तीय विकल्प अक्सर परिवार की जिम्मेदारियों, जीवन-चरण की जरूरतों और आश्वासन की आवश्यकता से प्रभावित होते हैं.

कई महिलाओं के लिए वित्तीय यात्रा की शुरुआत सामुदायिक संपर्क से होती है, सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स, बचत सर्कल या सहकर्मी नेटवर्क के माध्यम से. लेकिन वास्तविक निर्णय तब ही आते हैं जब परिवार के सदस्य उस निर्णय के साथ सहज होते हैं. रिपोर्ट में उद्धृत सर्वेक्षण डेटा के अनुसार लगभग पांच में से चार महिलाएँ वित्तीय निर्णय लेने में परिवार की सलाह पर निर्भर करती हैं, चाहे आय या उम्र कुछ भी हो.

वित्तीय संस्थानों के लिए अवसर

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि महिलाओं को वित्तीय संस्थानों के लिए सबसे मजबूत ग्राहक वर्ग माना जा सकता है. महिलाओं के ऋण लेने वालों के क्रेडिट स्कोर बेहतर और डिफॉल्ट दरें कम होती हैं, जबकि निवेशक महिलाओं की पोर्टफोलियो वृद्धि हाल के वर्षों में तेजी से हुई है, जो दीर्घकालिक जुड़ाव और स्थिरता का संकेत देती है.

रेडसीअर के अनुमान अनुसार भारत में लगभग 7.5 करोड़ कामकाजी महिलाएँ हैं, जो बचत, क्रेडिट और बीमा में महत्वपूर्ण लेकिन कम इस्तेमाल किए गए अवसर का प्रतिनिधित्व करती हैं. वित्तीय उत्पादों को बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, व्यवसाय निर्माण और रिटायरमेंट योजना जैसी रोज़मर्रा की जरूरतों से जोड़ने पर घरेलू संपत्ति में वृद्धि हो सकती है.

उत्पाद डिजाइन और संचार में सुधार की जरूरत

रिपोर्ट यह सुझाव देती है कि महिलाओं के लिए नए उत्पाद लॉन्च करने के बजाय मौजूदा उत्पादों के फ्रेम को फिर से सोचना चाहिए. लक्ष्य आधारित संचार, स्पष्ट जानकारी और ऐसी विशेषताएँ जो महिलाओं को परिवार के सदस्यों को निर्णय में शामिल करने की अनुमति दें, विश्वास और भागीदारी बढ़ा सकती हैं.


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