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एमएसएमई और गंतव्य अवसंरचना हैं भारत के पर्यटन आर्थिक इंजन की रीढ़ : क्रिसिल
भारत के पर्यटन क्षेत्र का आर्थिक और सामाजिक महत्व अत्यधिक है. घरेलू पर्यटन और एमएसएमई की मजबूत भागीदारी से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आय का समान वितरण संभव है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
भारत का घरेलू पर्यटन क्षेत्र लाखों लोगों के लिए आजीविका का मुख्य स्रोत है, लेकिन इसकी आर्थिक क्षमता अभी पूरी तरह से उपयोग नहीं हो पा रही है. हाल ही में क्रिसिल इंटेलिजेंस (Crisil) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मजबूत एमएसएमई सशक्तिकरण, गंतव्य अवसंरचना और उच्च-गुणवत्ता सेवा के अभाव के कारण पर्यटन क्षेत्र अपने पूर्ण मूल्य का सृजन नहीं कर पा रहा है. रिपोर्ट बताती है कि यदि इन कमजोरियों को दूर किया जाए, तो पर्यटन न केवल रोजगार और आय का स्थायी स्रोत बन सकता है, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आर्थिक अवसरों का वितरण भी समान रूप से कर सकता है.
एमएसएमई और गंतव्य अवसंरचना की भूमिका
क्रिसिल द्वारा मंगलवार को जारी ‘टूरिज्म फॉर लाइवलीहुड्स: बिल्डिंग सर्किट्स ऑफ ग्रोथ इन इंडिया’ नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), गंतव्य-स्तरीय अवसंरचना और सेवा गुणवत्ता को मजबूत करना बेहद जरूरी है, ताकि अधिक पर्यटक संख्या को उच्च आय और साल भर स्थिर आजीविका में बदला जा सके.
पर्यटन क्षेत्र का वर्तमान परिदृश्य
वर्ष 2024 में पर्यटन भारत का सबसे बड़ा गैर-कृषि रोजगार प्रदाता रहा, जिसमें देश के कुल कार्यबल का 13% से अधिक हिस्सा जुड़ा और 2.96 अरब पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं. हालांकि, इस बड़े पैमाने का अर्थव्यवस्था में अपेक्षित योगदान नहीं दिखा. पर्यटन का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान लगभग 5% रहा, जो वैश्विक औसत 10% से काफी कम है. यह पर्यटक आगमन और वास्तविक आर्थिक मूल्य सृजन के बीच मौजूद अंतर को दर्शाता है.
एमएसएमई का वर्चस्व और सीमाएं
भारत में पर्यटन क्षेत्र पर एमएसएमई का वर्चस्व है, जिनकी प्रमुख भूमिका आवास, परिवहन, गाइडिंग, खाद्य सेवाओं, हस्तशिल्प और स्थानीय अनुभवों में है. यह संरचना आय को शहरों, गांवों और विरासत क्षेत्रों तक व्यापक रूप से पहुंचाने में मदद करती है. लेकिन मूल्य श्रृंखला में ऊपर बढ़ने की सीमित क्षमता के कारण इन इकाइयों की आय, लाभ और साल भर रोजगार सृजन की क्षमता बाधित रहती है.
क्रिसिल इंटेलिजेंस की सीनियर डायरेक्टर और बिजनेस हेड (असेसमेंट्स) बिनैफर जहानी ने कहा, “पर्यटन भारत के लिए पहले से ही एक प्रमुख आजीविका इंजन है, लेकिन इसकी आर्थिक क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है. चुनौती मांग पैदा करने की नहीं, बल्कि गंतव्य-स्तरीय अवसंरचना, सेवा मानक, सुरक्षा की धारणा और यात्रा की सुगमता जैसे सक्षम कारकों को मजबूत कर पैमाने को मूल्य में बदलने की है.”
लक्षित समर्थन की आवश्यकता
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि पर्यटन एमएसएमई को लक्षित समर्थन देना बेहद आवश्यक है, क्योंकि यही इकाइयां आवास, परिवहन, भोजन, गाइडिंग और स्थानीय अनुभवों जैसी सेवाएं प्रदान करती हैं. इनकी क्षमता किसी भी गंतव्य की सेवा गुणवत्ता और टिकाऊ आजीविका सृजन को सीधे प्रभावित करती है.
उच्च-मूल्य आजीविका सृजन और एमएसएमई
क्रिसिल इंटेलिजेंस की एसोसिएट डायरेक्टर मानसी कुलकर्णी ने कहा, “पर्यटन क्षेत्र की उच्च-मूल्य आजीविका सृजन की क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि एमएसएमई को गुणवत्ता अनुभव प्रदान करने के लिए कितनी प्रभावी रूप से सशक्त किया जाता है. वित्त, कौशल और औपचारिक बाजार से मजबूत जुड़ाव के अभाव में कई एमएसएमई कम लाभ वाले कार्यों तक सीमित रह जाते हैं, जिससे वे सेवाओं को उन्नत करने, कर्मचारियों को बनाए रखने और टिकाऊ विस्तार करने में असमर्थ रहते हैं.”
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटन प्रवृत्ति
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन कुल आगमन में उनका हिस्सा 1% से भी कम है. अधिकांश अंतरराष्ट्रीय यात्राएं अल्पकालिक या प्रवासी (डायस्पोरा) यात्राओं तक सीमित हैं, जबकि विकसित देशों से आने वाले अधिक खर्च करने वाले अवकाश पर्यटक अपेक्षतः कम हैं. इसके विपरीत, भारतीयों का विदेश यात्रा पर खर्च तेजी से बढ़ा है, जो देश के भीतर प्रीमियम और अनुभव-आधारित पर्यटन की अधूरी मांग को दर्शाता है.
सुरक्षा और सेवा में सुधार की आवश्यकता
सुरक्षा, स्वच्छता, सेवा गुणवत्ता और गंतव्य प्रबंधन में सुधार से पर्यटकों का खर्च और ठहरने की अवधि बढ़ाई जा सकती है. यह विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं के लिए स्थिर, समावेशी और साल भर की आजीविका सृजन में अहम भूमिका निभा सकता है.
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