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Moody’s ने किया आगाह, इस वजह से भारत की साख पर लग सकता है दाग, जानिए क्या है वो कारण?

अमेरिकी रेटिंग एजेंसी ने अपनी एक ऐसी रिपोर्ट पेश की है, जिसमें भारत की हुकूमत को जल संकट को लेकर चेताने का प्रयास किया गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

जलवायु परिवर्तन का असर अब भारत के कई हिस्सों में भी दिखने लगा है. गर्मियों में देश के कई हिस्सों में पानी की कमी हो जा रही है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हालात और भी खराब हो गए हैं. इस बीच रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) ने एक रिपोर्ट के जरिये भारत को आगाह किया है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पानी की बढ़ती कमी से कृषि और उद्योग के विकास पर असर पड़ सकता है. इससे महंगाई बढ़ेगी और सामाजिक अशांति की स्थिति पैदा हो सकती है.

रिपोर्ट में क्या है?

Moody’s ने भारत के समक्ष पर्यावरणीय जोखिम पर एक रिपोर्ट में कहा कि भारत में पानी की कमी बढ़ती जा रही है, क्योंकि तेज आर्थिक वृद्धि तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के कारण लगातार बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के बीच पानी की खपत बढ़ रही है. मूडीज रेटिंग ने रिपोर्ट में कहा कि यह ऋण क्षमता के लिए हानिकारक है, साथ ही उन क्षेत्रों के लिए भी हानिकारक है जो पानी का अत्यधिक उपभोग करते हैं, जैसे कोयला बिजली जनरेटर और इस्पात विनिर्माता. दीर्घावधि में जल प्रबंधन में निवेश संभावित जल की कमी से होने वाले जोखिम को कम कर सकता है.

जलवायु परिवर्तन का हो रहा है असर

इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव तेजी से बढ़ने के कारण जल संकट और भी बदतर हो रहा है, जिसके चलते सूखा, लू तथा बाढ़ जैसी जलवायु संबंधी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. Moody’s ने भारत के समक्ष पर्यावरणीय जोखिम पर एक रिपोर्ट में कहा कि भारत में पानी की कमी बढ़ती जा रही है, क्योंकि तेज आर्थिक वृद्धि तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के कारण लगातार बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के बीच पानी की खपत बढ़ रही है.

दिल्ली जल संकट के बीच आई रिपोर्ट

यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब राष्ट्रीय राजधानी के कुछ हिस्सों में जल संकट एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है. इस मुद्दे पर 21 जून को भूख हड़ताल शुरू करने वाली दिल्ली की जल मंत्री आतिशी को मंगलवार की सुबह तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया. जल संसाधन मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए Moody’s ने कहा कि भारत की प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक जल उपलब्धता 2031 तक घटकर 1,367 क्यूबिक मीटर रह जाने की संभावना है. यह 2021 में पहले से ही कम 1,486 क्यूबिक मीटर है. मंत्रालय के अनुसार, 1,700 क्यूबिक मीटर से कम का स्तर जल संकट को दर्शाता है.
 


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