ब्रिक्स से पहले मोदी-पुतिन की मुलाकात, व्यापार से रक्षा तक कई मुद्दों पर होगी चर्चा

11 सितंबर को मोदी-पुतिन की मुलाकात संभव, व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर हो सकती है चर्चा

Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2026
BWHindi

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे. क्रेमलिन ने मंगलवार को पुतिन की भारत यात्रा की पुष्टि की. इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे. दोनों नेताओं की मुलाकात 11 सितंबर को होने की संभावना है, जबकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा.

मोदी-पुतिन की यह बैठक शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर दोनों नेताओं के बीच हुई हालिया मुलाकात के कुछ ही समय बाद होगी. बिश्केक में हुई बैठक के दौरान मोदी और पुतिन ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की थी. दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया था.

व्यापार और आर्थिक सहयोग पर रहेगा जोर

मोदी और पुतिन की आगामी बैठक में व्यापार और आर्थिक सहयोग प्रमुख मुद्दों में शामिल रहने की उम्मीद है. व्यापक भू-राजनीतिक और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच दोनों देश द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं. बैठक में रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की भी समीक्षा हो सकती है. दोनों देशों के बीच हालिया चर्चाओं में रक्षा सहयोग को व्यापक बनाने पर जोर दिया गया है. भारत रूस के साथ उन्नत लड़ाकू विमान और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहता है.

अंतर-सरकारी आयोग की बैठक के नतीजों की भी समीक्षा

एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान हुई पिछली बैठक में मोदी और पुतिन ने 24 अगस्त को मॉस्को में हुई भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की व्यापार, आर्थिक और सांस्कृतिक मामलों से संबंधित बैठक के नतीजों की भी समीक्षा की थी. दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए लगातार संपर्क में रहने पर सहमति जताई थी.

12-13 सितंबर को होगा ब्रिक्स सम्मेलन

पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है. भारत ने 1 जनवरी 2026 को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी. इस सम्मेलन में विस्तारित ब्रिक्स समूह के सदस्य देशों के नेता हिस्सा लेंगे.

पुतिन की यात्रा के दौरान मोदी के साथ बैठक में ब्रिक्स के ढांचे के तहत भारत-रूस सहयोग पर भी चर्चा होने की उम्मीद है. अगस्त में हुई मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत द्विपक्षीय जुड़ाव पर विचार साझा किए थे. इसके अलावा समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी.

रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा से ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का कूटनीतिक महत्व और बढ़ गया है. भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ आर्थिक, राजनीतिक और वैश्विक शासन से जुड़े मुद्दों पर संवाद को आगे बढ़ा रहा है. ऐसे में मोदी-पुतिन की द्विपक्षीय वार्ता शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली अहम उच्चस्तरीय बैठकों में शामिल होगी.
 


L&T टोकनाइज्ड बॉन्ड के जरिए जुटाएगी 500 करोड़ रुपये, निजी क्षेत्र में पहली कंपनी बनने की तैयारी

आरईसी के बाद एलएंडटी टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में उतरने वाली पहली निजी क्षेत्र की कंपनी होगी

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 08 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2026
BWHindia

लार्सन एंड टुब्रो (L&T) भारत के उभरते टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में कदम रखने की तैयारी कर रही है. कंपनी ब्लॉकचेन आधारित टोकनाइज्ड बॉन्ड जारी कर करीब 500 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. ऐसा होने पर एलएंडटी इस तरह के बॉन्ड जारी करने वाली भारत की पहली निजी क्षेत्र की कंपनी बन जाएगी.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित बॉन्ड की अवधि तीन साल हो सकती है और इस पर करीब 7.40 फीसदी कूपन दर रहने की उम्मीद है. इस लेनदेन में ब्लॉकचेन आधारित बुनियादी ढांचे के साथ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) का इस्तेमाल सेटलमेंट के लिए किया जा सकता है.

यह कदम सरकारी स्वामित्व वाली आरईसी लिमिटेड के भारत के पहले टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड लेनदेन के जरिए 500 करोड़ रुपये जुटाने के कुछ ही समय बाद सामने आया है. आरईसी के बॉन्ड पर 7.30 फीसदी कूपन दर थी और इसे करीब आठ गुना अधिक सब्सक्रिप्शन मिला था.

आरईसी के बाद एलएंडटी की टोकनाइज्ड डेट में एंट्री

टोकनाइज्ड बॉन्ड पारंपरिक डेट सिक्योरिटीज होते हैं, लेकिन इनके स्वामित्व और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड ब्लॉकचेन या अन्य डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर तकनीक पर दर्ज किए जाते हैं. इस तकनीक से सेटलमेंट प्रक्रिया को तेज करने, लेनदेन की लागत घटाने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

एलएंडटी के लिए यह प्रस्तावित लेनदेन वित्तीय व्यवस्था में नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में एक और कदम है. कंपनी इससे पहले भी भारत के तेजी से विकसित हो रहे सस्टेनेबल डेट मार्केट में सक्रिय रही है. एलएंडटी ने सेबी के ईएसजी डेट फ्रेमवर्क के तहत 500 करोड़ रुपये का सस्टेनेबिलिटी-लिंक्ड बॉन्ड भी जारी किया था.

सीबीडीसी से तेज हो सकता है सेटलमेंट

टोकनाइज्ड बॉन्ड की संरचना में डिजिटल सेटलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर एक अहम भूमिका निभाता है. भारत में परीक्षण किए जा रहे इस मॉडल के तहत जरूरी सीबीडीसी और डीमैट सुविधाओं वाले पात्र संस्थागत निवेशक लेनदेन में हिस्सा ले सकते हैं और उसी दिन इसका सेटलमेंट किया जा सकता है.

यह ढांचा भारतीय प्रतिभूति बाजार के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने और मुख्यधारा के पूंजी बाजार में डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं को तलाशने की नियामकीय कोशिशों का हिस्सा है. आरईसी का हालिया लेनदेन कॉरपोरेट डेट में इस मॉडल के बड़े स्तर पर इस्तेमाल का पहला उदाहरण बना है.

500 करोड़ रुपये की रकम छोटी, लेकिन बाजार के लिए बड़ा संकेत

एलएंडटी के कुल वित्तपोषण की जरूरतों की तुलना में 500 करोड़ रुपये की रकम भले ही छोटी हो, लेकिन प्रस्तावित बॉन्ड इश्यू भारत के कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

एलएंडटी की स्टैंडअलोन कुल आय वित्त वर्ष 2025-26 में सालाना आधार पर 8.68 फीसदी बढ़कर 1.61 लाख करोड़ रुपये रही. 31 मार्च 2026 तक कंपनी के बकाया नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर 9,800 करोड़ रुपये थे. इसके अलावा कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लिस्टेड कमर्शियल पेपर के जरिए 14,600 करोड़ रुपये भी जुटाए.

ऐसे में एलएंडटी का प्रस्तावित टोकनाइज्ड बॉन्ड इश्यू सिर्फ 500 करोड़ रुपये जुटाने तक सीमित नहीं है. इसका बड़ा उद्देश्य कॉरपोरेट उधारी के लिए एक नए माध्यम की व्यवहारिकता को परखना है. अगर ऐसे लेनदेन संचालन के लिहाज से प्रभावी और बड़े स्तर पर लागू करने योग्य साबित होते हैं, तो आने वाले समय में टोकनाइजेशन भारत के डेट मार्केट के बुनियादी ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है.
 


मिनिमैक सिस्टम्स ने रेनमैटर से जुटाए 30 करोड़ रुपये, लुब्रिकेंट रीसाइक्लिंग कारोबार बढ़ाने की तैयारी

फंडिंग का इस्तेमाल डीप-टेक आरएंडडी, ‘रीसाइक्लिंग ऑन व्हील्स’ हब और ‘लुब्रिकेंट्स ऐज अ सर्विस’ को विस्तार देने में होगा

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 08 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2026
BWHindia

औद्योगिक क्षेत्र में लुब्रिकेंट के लाइफसाइकिल मैनेजमेंट पर काम करने वाली कंपनी मिनिमैक सिस्टम्स (Minimac Systems) ने 30 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई है. इस फंडिंग राउंड की अगुआई जेरोधा की रेनमैटर (Rainmatter) ने की है, जबकि कुछ चुनिंदा वेंचर कैपिटल फर्मों ने भी इसमें हिस्सा लिया है. कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल डीप-टेक रिसर्च एंड डेवलपमेंट, रीसाइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘लुब्रिकेंट्स ऐज अ सर्विस’ कारोबार को विस्तार देने में करेगी. आईआईटी धनबाद और आईआईएम इंदौर के पूर्व छात्र अंशुमान अग्रवाल द्वारा स्थापित मिनिमैक सिस्टम्स शुरुआत से ही बूटस्ट्रैप्ड और मुनाफे में रही है.

5 मिलियन टन से ज्यादा लुब्रिकेंट की खपत

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लुब्रिकेंट बाजार है. देश में हर साल 5 मिलियन टन से अधिक लुब्रिकेंट और ग्रीस की खपत होती है. हालांकि, लुब्रिकेंट बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल बेस ऑयल की 60% से अधिक जरूरत आयात से पूरी होती है. भारत का सालाना बेस ऑयल आयात बिल 2.7 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुका है.

कंपनी के मुताबिक, अगले पांच वर्षों में लुब्रिकेंट की मांग सालाना 4-5% की दर से बढ़ने की उम्मीद है. ऐसे में इस्तेमाल किए गए लुब्रिकेंट को दोबारा उपयोग योग्य बनाने और रीसाइक्लिंग की क्षमता बढ़ाने की जरूरत भी बढ़ेगी.

तीन स्तरों पर काम करता है मिनिमैक का मॉडल

मिनिमैक लुब्रिकेंट के पूरे लाइफसाइकिल को तीन स्तरों में मैनेज करता है. पहले स्तर पर कंडीशन मॉनिटरिंग, कंटैमिनेशन कंट्रोल और फ्लूइड-हेल्थ एनालिटिक्स के जरिए मशीन के अंदर मौजूद लुब्रिकेंट की गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर दिया जाता है. दूसरे स्तर पर प्लांट में मौजूद इस्तेमाल किए गए लुब्रिकेंट से दूषित पदार्थ, नमी और डिग्रेडेशन से बने अवशेष हटाकर उसे दोबारा इस्तेमाल के योग्य बनाया जाता है. तीसरे स्तर पर ऐसे तेल को, जिसे सुरक्षित तरीके से बहाल नहीं किया जा सकता, पंजीकृत री-रिफाइनर्स तक पहुंचाया जाता है. वहां इसे री-रिफाइंड बेस ऑयल में बदला जाता है.

‘रीसाइक्लिंग ऑन व्हील्स’ से प्लांट तक पहुंचेगी सुविधा

कंपनी का ‘रीसाइक्लिंग ऑन व्हील्स’ एक मोबाइल ट्रीटमेंट सिस्टम है, जिसकी प्रोसेसिंग क्षमता करीब 10 से 4,000 लीटर प्रति मिनट तक है. यह सिस्टम प्लांट पर ही लुब्रिकेंट की जांच, ट्रीटमेंट और दोबारा उपयोग की सुविधा उपलब्ध कराता है.

इसके अलावा, कंपनी ‘लुब्रिकेंट्स ऐज अ सर्विस’ मॉडल के तहत प्लांट के भीतर लुब्रिकेंट की सप्लाई, मॉनिटरिंग, रिस्टोरेशन, अनुपालन और इस्तेमाल के बाद रिकवरी जैसी सेवाओं को एक साथ मैनेज करने की योजना बना रही है.

2,500 से ज्यादा सिस्टम तैनात

मिनिमैक के मुताबिक, कंपनी अब तक 2,500 से अधिक मिनिएचराइज्ड फ्लूइड-ट्रीटमेंट सिस्टम तैनात कर चुकी है. इनकी कुल स्थापित प्रोसेसिंग क्षमता 3 लाख लीटर प्रति मिनट से अधिक है. कंपनी ने 2,200 से अधिक औद्योगिक परिसंपत्तियों के साथ काम किया है और भारत तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में 1.4 करोड़ लीटर से अधिक लुब्रिकेंट को प्रोसेस किया है.

इसके ग्राहकों में एनटीपीसी, अडानी पावर, जेएसडब्ल्यू स्टील, टाटा स्टील, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, रिलायंस इंडस्ट्रीज, शेल, एक्सॉनमोबिल, लार्सन एंड टुब्रो, जीई पावर, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स, सीमेंस एनर्जी, कैटरपिलर और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स जैसी कंपनियां शामिल हैं.

इस्तेमाल किए गए तेल की रीसाइक्लिंग पर बढ़ रहा नियामकीय जोर

भारत में अप्रैल 2024 से लागू एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) व्यवस्था के तहत बेस ऑयल और लुब्रिकेंट के उत्पादकों तथा आयातकों को रीसाइक्लिंग लक्ष्य पूरा करना होता है. वित्त वर्ष 2026-27 में यह रीसाइक्लिंग लक्ष्य 20% है, जिसे वित्त वर्ष 2030-31 से बढ़ाकर 50% किया जाना है. अनुपालन पंजीकृत रीसाइक्लर्स द्वारा जारी EPR सर्टिफिकेट से जुड़ा हुआ है.

फंड का इस्तेमाल तकनीक और विस्तार पर

मिनिमैक फंडिंग का इस्तेमाल अगली पीढ़ी के मिनिएचराइज्ड ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्लीट ऑटोमेशन और फ्लूइड एनालिटिक्स से जुड़े डीप-टेक आरएंडडी को आगे बढ़ाने में करेगी. इसके साथ ही कंपनी प्रमुख औद्योगिक क्लस्टर्स में क्षेत्रीय हब बनाकर ‘रीसाइक्लिंग ऑन व्हील्स’ नेटवर्क का विस्तार करेगी. ‘लुब्रिकेंट्स ऐज अ सर्विस’ को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए कंपनी अपने कमर्शियल, डिजिटल और ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत करेगी.

मिनिमैक सिस्टम्स के संस्थापक और प्रबंध निदेशक अंशुमान अग्रवाल ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य लुब्रिकेंट को लंबे समय तक इस्तेमाल में बनाए रखना और नए बेस ऑयल की जरूरत कम करना है. उन्होंने कहा कि कंपनी ने अब तक अपने पूंजी के दम पर मुनाफे के साथ कारोबार खड़ा किया है और नई फंडिंग से भारत के अधिक औद्योगिक संयंत्रों तक रिस्टोरेशन और रीसाइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचाने में मदद मिलेगी.

रेनमैटर बाय जेरोधा के लीड-क्लाइमेट एंड डीप टेक अभिनव नेगी ने कहा कि मिनिमैक आयात पर निर्भरता, खतरनाक कचरे और औद्योगिक उपकरणों की उम्र से जुड़ी समस्याओं पर काम कर रही है. उनके मुताबिक, कंपनी ने पुणे से बूटस्ट्रैप्ड तरीके से शुरुआत की और मुनाफे के साथ अपना कारोबार खड़ा किया है. नई पूंजी से रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी को मजबूत करने और प्लांट तक पहुंचने वाली सेवाओं का विस्तार करने में मदद मिलेगी.


2030 तक $10.1 अरब का हो सकता है भारत का सीनियर लिविंग मार्केट, 74,000 यूनिट्स की क्षमता: रिपोर्ट

जून 2026 तक संगठित सीनियर लिविंग स्टॉक 25,050 यूनिट्स, 2030 तक 7.7 अरब डॉलर के निवेश की संभावना; बढ़ती बुजुर्ग आबादी से असिस्टेड लिविंग की मांग भी बढ़ेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 08 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2026
BWHindia

भारत में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी अब केवल सामाजिक चुनौती नहीं, बल्कि रियल एस्टेट और केयर इकोनॉमी के लिए बड़ा कारोबारी अवसर बन रही है. एसोसिएशन ऑफ सीनियर लीविंग इंडिया (ASLI) और जेएलएल की रिपोर्ट ‘इंडियाज सिल्वर इकोनॉमी: फ्रॉम निच टू नेसेसिटी’ के मुताबिक, देश का सीनियर लिविंग बाजार 2030 तक करीब 10.1 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. नीति आधारित विकास की स्थिति में इस क्षेत्र में करीब 7.7 अरब डॉलर के पूंजी निवेश की जरूरत पड़ सकती है.

रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक देश में संगठित सीनियर लिविंग स्टॉक करीब 25,050 यूनिट्स था. भारत में इसकी बाजार पैठ अभी लगभग 1.5% है, जबकि अमेरिका में यह 6-7% और न्यूजीलैंड में 14-15% के स्तर पर है. इससे संकेत मिलता है कि भारत में इस क्षेत्र के विस्तार की काफी गुंजाइश मौजूद है.

2050 तक 34.6 करोड़ हो सकती है 60 वर्ष से अधिक आबादी

भारत में 60 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी फिलहाल करीब 16.69 करोड़ है, जिसके 2050 तक बढ़कर लगभग 34.6 करोड़ होने का अनुमान है. इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से स्वतंत्र वरिष्ठ नागरिक परिवारों की संख्या 2026 में करीब 17 लाख से बढ़कर 2030 तक 21 लाख तक पहुंच सकती है.

रिपोर्ट के अनुसार, सीनियर लिविंग क्षेत्र ने 2024 से जून 2026 के बीच करीब 14.2% की सालाना वृद्धि दर दर्ज की है, जो 2019-2023 के दौरान दर्ज 8.5% की वृद्धि दर से काफी अधिक है. बेहतर तरीके से संचालित सीनियर लिविंग सुविधाओं में ऑक्यूपेंसी 80-85% तक पहुंच रही है.

असिस्टेड लिविंग में बड़ी कमी

असिस्टेड लिविंग सेगमेंट में मांग और उपलब्ध क्षमता के बीच बड़ा अंतर है. वर्तमान में देश में करीब 2,100 असिस्टेड लिविंग बेड उपलब्ध हैं, जबकि 2030 तक करीब 11,000 बेड की जरूरत होने का अनुमान है. खासतौर पर 75 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी में 7.8% की सालाना वृद्धि इस मांग को और बढ़ा सकती है.

जेएलएल के सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर करण सिंह सोढ़ी के मुताबिक, भारत का सीनियर लिविंग सेक्टर मौजूदा करीब 25,050 यूनिट्स से बढ़कर 2030 तक लगभग 74,000 यूनिट्स तक पहुंच सकता है. इसके लिए बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश और नीतिगत समर्थन की जरूरत होगी.

तीन संभावित परिदृश्य

रिपोर्ट ने सीनियर लिविंग बाजार के लिए तीन संभावित विकास परिदृश्य बताए हैं. बेसलाइन स्थिति में 2030 तक करीब 51,000 यूनिट्स और लगभग 4.5 अरब डॉलर का बाजार बनने का अनुमान है. तेज विकास की स्थिति में यह संख्या करीब 63,000 यूनिट्स और बाजार 6.2 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. वहीं, नीति आधारित विकास की स्थिति में करीब 74,000 यूनिट्स और 7.7 अरब डॉलर के पूंजी निवेश की संभावना जताई गई है.

महाराष्ट्र और हरियाणा से मिल सकता है मॉडल

रिपोर्ट में महाराष्ट्र और हरियाणा को सीनियर लिविंग क्षेत्र में नीतिगत पहल के उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है. महाराष्ट्र में सीनियर लिविंग को प्लानिंग मानकों और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़कर औपचारिक पहचान देने की दिशा में कदम उठाए गए हैं. वहीं, हरियाणा में अनुमति प्रक्रिया को स्पष्ट करने और अतिरिक्त एफएआर जैसे प्रोत्साहनों से इस क्षेत्र को बढ़ावा देने की कोशिश की गई है.

‘घर से अमीर, नकद से गरीब’ बुजुर्गों के लिए वित्तीय समाधान जरूरी

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में बड़ी संख्या में बुजुर्गों के पास घर और संपत्ति तो है, लेकिन नियमित नकदी प्रवाह सीमित है. ऐसे में ‘घर से अमीर, नकद से गरीब’ की स्थिति सीनियर लिविंग की अफोर्डेबिलिटी के सामने बड़ी चुनौती है. रिवर्स मॉर्गेज और बीमा से जुड़े उत्पाद इस समस्या का समाधान करने में मदद कर सकते हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में सीनियर लिविंग का मॉडल केवल प्रॉपर्टी बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा. केयर और सर्विस आधारित मॉडल, खासकर किराये पर उपलब्ध सुविधाएं, अगले तीन से पांच वर्षों में तेजी से बढ़ सकती हैं.

टेक्नोलॉजी और केयर मॉडल पर बढ़ेगा जोर

सीनियर लिविंग के साथ मेमोरी केयर, कंटीन्यूम ऑफ केयर, इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड, वियरेबल डिवाइस और टेलीमेडिसिन जैसी सेवाओं का महत्व भी बढ़ने की उम्मीद है. हालांकि, प्रशिक्षित केयरगिवर्स की कमी और रियल एस्टेट की ऊंची लागत इस क्षेत्र के विस्तार में बड़ी बाधा बनी हुई है.

रिपोर्ट में सीनियर लिविंग सेवाओं पर जीएसटी व्यवस्था को सरल बनाने, रिवर्स मॉर्गेज को बढ़ावा देने, बीमा उत्पादों को सीनियर लिविंग से जोड़ने और अस्पतालों के साथ लंबी अवधि की लीज या एसेट-लाइट साझेदारी को प्रोत्साहित करने जैसे उपाय सुझाए गए हैं. साथ ही, इस पूरे क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट नीति ढांचा तैयार करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है. बढ़ती उम्र की आबादी के साथ भारत में सीनियर लिविंग अब एक सीमित रियल एस्टेट सेगमेंट नहीं रह गया है. आने वाले वर्षों में यह आवास, स्वास्थ्य सेवा, देखभाल, बीमा और वित्तीय सेवाओं को जोड़ने वाली एक बड़ी ‘सिल्वर इकोनॉमी’ का आधार बन सकता है.


ICICI लोम्बार्ड पर IRDAI का ₹1 करोड़ जुर्माना, आउटसोर्सिंग और वेंडर मैनेजमेंट में मिली खामियां

बीमा नियामक ने 2019 की जांच के आधार पर की कार्रवाई, इवेंट मैनेजमेंट गतिविधियों की रिपोर्टिंग और दस्तावेजों को लेकर उठाए सवाल

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 08 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2026
BWHindia

बीमा नियामक भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने ICICI लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस पर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया है. नियामक की यह कार्रवाई 2019 में हुई जांच के दौरान कंपनी की आउटसोर्सिंग प्रैक्टिस, वेंडर मैनेजमेंट और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़ी कुछ कमियों के आधार पर की गई है. मामला कंपनी की सेल्स, मार्केटिंग और बिजनेस सपोर्ट गतिविधियों से जुड़े भुगतान और इवेंट मैनेजमेंट सेवाओं की रिपोर्टिंग से संबंधित है.

₹709.57 करोड़ के खर्च से जुड़ा मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2019 में ICICI लोम्बार्ड ने 'सेल्स, मार्केटिंग और बिजनेस सपोर्ट' के तहत ₹709.57 करोड़ खर्च किए थे. कंपनी के अनुसार, इसमें से करीब ₹35-37 करोड़ का भुगतान अन्य बीमा कंपनियों से जुड़े व्यक्तिगत एजेंटों को किया गया था.

IRDAI की जांच में इन भुगतानों और उनसे जुड़ी गतिविधियों को लेकर कंपनी की आउटसोर्सिंग व्यवस्था की समीक्षा की गई. नियामक ने पाया कि इवेंट मैनेजमेंट गतिविधियों में दूसरी बीमा कंपनियों के एजेंटों का इस्तेमाल किया गया था.

इवेंट मैनेजमेंट की रिपोर्टिंग पर सवाल

IRDAI के मुताबिक, कंपनी इन गतिविधियों को पर्याप्त सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स के साथ स्थापित करने में नाकाम रही. साथ ही, इन गतिविधियों को आउटसोर्स की गई गतिविधियों के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया गया और संबंधित खर्चों की आउटसोर्सिंग रिटर्न में भी रिपोर्टिंग नहीं की गई.

बीमा नियामक ने 7 सितंबर को जारी अपने आदेश में कहा कि इवेंट मैनेजमेंट सेवाओं को आउटसोर्स गतिविधि के तौर पर वर्गीकृत नहीं किए जाने के कारण कंपनी इन खर्चों को आउटसोर्सिंग रिटर्न में रिपोर्ट करने में विफल रही. नियामक के अनुसार, इससे समय पर रेगुलेटरी जांच नहीं हो सकी.

आउटसोर्सिंग और कॉरपोरेट गवर्नेंस पर फोकस

IRDAI की कार्रवाई से बीमा कंपनियों के लिए आउटसोर्सिंग गतिविधियों की उचित पहचान, दस्तावेजीकरण और नियामकीय रिपोर्टिंग की अहमियत सामने आती है. नियामक लगातार बीमा कंपनियों के वेंडर मैनेजमेंट, आउटसोर्सिंग व्यवस्था और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े नियमों के अनुपालन पर जोर देता रहा है.
 


रिलायंस का बड़ा बॉन्ड इश्यू, 7.47% ब्याज के साथ जुटाएगी ₹12,500 करोड़

रिलायंस इंडस्ट्रीज पांच साल की अवधि वाले बॉन्ड के जरिए करीब ₹12,500 करोड़ जुटाने की तैयारी में है. इस इश्यू पर कंपनी 7.47% सालाना ब्याज की पेशकश करेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 08 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2026
BWHindia

रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) घरेलू बॉन्ड बाजार में करीब तीन साल बाद बड़ी वापसी की तैयारी में है. मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी पांच साल की अवधि वाले बॉन्ड जारी कर करीब ₹12,500 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है. इन बॉन्ड्स पर निवेशकों को 7.47% सालाना ब्याज मिलने की उम्मीद है. कंपनी की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब डॉलर में कर्ज की लागत के मुकाबले घरेलू रुपये में फंड जुटाना अपेक्षाकृत सस्ता पड़ रहा है.

पांच साल के बॉन्ड से जुटाएगी ₹12,500 करोड़

रिलायंस इंडस्ट्रीज पांच साल की अवधि वाले बॉन्ड के जरिए करीब ₹12,500 करोड़ जुटाने की तैयारी में है. इस इश्यू पर कंपनी 7.47% सालाना ब्याज की पेशकश करेगी. जानकारी के मुताबिक, 18 सितंबर को खत्म होने वाले सप्ताह में संस्थागत और अन्य पात्र निवेशकों से बॉन्ड के लिए बोलियां मंगाई जा सकती हैं. अगर यह इश्यू पूरा होता है तो नवंबर 2023 के बाद किसी रेटेड गैर-वित्तीय कंपनी की ओर से एक बार में जुटाई जाने वाली यह बड़ी रकम में से एक होगी. इससे घरेलू कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में रिलायंस की वापसी भी होगी.

डॉलर में कर्ज के मुकाबले रुपये में फंडिंग सस्ती

रिलायंस का घरेलू बाजार से कर्ज जुटाने का फैसला ब्याज दरों और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए अहम माना जा रहा है. हाल के महीनों में भारत में पांच साल की अवधि वाले बॉन्ड की यील्ड में गिरावट आई है. जून की शुरुआत से अब तक पांच साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड करीब 33 बेसिस पॉइंट नीचे आई है. दूसरी ओर, अमेरिका में ट्रेजरी यील्ड ऊंची बनी हुई है. ऐसे में भारतीय कंपनियों के लिए डॉलर में कर्ज लेना महंगा पड़ रहा है. इसके मुकाबले रुपये में घरेलू बाजार से फंड जुटाना रिलायंस के लिए ज्यादा किफायती विकल्प बन सकता है.

बड़े निजी बैंक होंगे इश्यू के अरेंजर

इस बॉन्ड इश्यू को पूरा करने के लिए देश के प्रमुख निजी बैंक अरेंजर की भूमिका निभाएंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से कुछ बैंक खुद भी बॉन्ड के एक हिस्से को सब्सक्राइब कर सकते हैं. इससे इश्यू को संस्थागत निवेशकों के बीच मजबूत मांग मिलने की संभावना है.

10 साल के बॉन्ड पर भी विचार

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पांच साल के बॉन्ड के अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज लंबी अवधि के कर्ज जुटाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है. जानकारी के अनुसार, कंपनी 10 साल की मैच्योरिटी वाले बॉन्ड जारी करने की संभावना तलाश रही है. इसके लिए कंपनी की बैंकरों और संभावित बड़े निवेशकों के साथ बातचीत जारी है. कंपनी की यह रणनीति उसके वित्तीय पोर्टफोलियो में विविधता लाने और लंबी अवधि की फंडिंग जरूरतों को पूरा करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है.


मजबूत मैक्रो ग्रोथ के बावजूद आधी भारतीय कंपनियों के प्रदर्शन में नहीं आया सुधार: CII सर्वे

दूसरी तिमाही में कारोबारी भरोसा बढ़ा, लेकिन कई कंपनियों ने कहा- जमीनी स्तर पर सुधार आर्थिक आंकड़ों की तुलना में कमजोर

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 08 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2026
BWHindia

भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक वृद्धि का असर देश की करीब आधी कंपनियों के कारोबारी प्रदर्शन पर या तो नहीं पड़ा है या फिर इसका लाभ सीमित रूप से मिला है. भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के ताजा बिजनेस आउटलुक सर्वे में यह बात सामने आई है. सर्वे के नतीजे ऐसे समय आए हैं जब इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या आर्थिक वृद्धि के प्रमुख आंकड़े जमीनी स्तर पर कारोबारियों की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह दर्शा रहे हैं.

सीआईआई के सर्वे के मुताबिक, 13.4 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि मजबूत व्यापक आर्थिक आंकड़ों के बावजूद जमीनी कारोबारी परिस्थितियां कमजोर बनी हुई हैं. वहीं, 36.6 प्रतिशत कंपनियों ने कुछ सुधार की बात कही, लेकिन उनके मुताबिक यह सुधार व्यापक आर्थिक संकेतकों की तुलना में कम है. इस तरह दोनों वर्गों को मिलाकर कुल 50 प्रतिशत कंपनियों ने अर्थव्यवस्था की मजबूती और अपने कारोबारी प्रदर्शन के बीच अंतर की ओर इशारा किया.

दूसरी तिमाही में बढ़ा कारोबारी भरोसा

मैक्रो आर्थिक वृद्धि के कारोबार तक सीमित असर को लेकर चिंता के बावजूद जुलाई-सितंबर तिमाही में कारोबारी धारणा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. सीआईआई का समग्र कारोबारी भरोसा सूचकांक, जो मौजूदा कारोबारी परिस्थितियों और भविष्य की उम्मीदों दोनों को दर्शाता है, वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में बढ़कर 66 पर पहुंच गया. पहली तिमाही में यह 60.8 था. हालांकि, दूसरी तिमाही का यह स्तर पिछले साल की समान तिमाही के बराबर है. सीआईआई के अनुसार, तिमाही आधार पर भरोसे में आई तेज वृद्धि की प्रमुख वजह पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी बाधाओं में कमी रही.

कंपनियों को मिला असमान लाभ

सर्वे में यह भी सामने आया कि कुछ कंपनियों की वृद्धि व्यापक अर्थव्यवस्था की गति के अनुरूप रही है. करीब 11.3 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि उनके कारोबार की वृद्धि व्यापक आर्थिक गति के बराबर या उससे अधिक रही. वहीं, 29.4 प्रतिशत कंपनियों ने आर्थिक सुधार का स्पष्ट लाभ मिलने की बात कही, लेकिन यह लाभ समग्र आर्थिक वृद्धि की तुलना में कुछ कम रहा.

सर्वे में शामिल बाकी 9.3 प्रतिशत कंपनियों ने व्यापक आर्थिक वृद्धि और अपने कारोबारी प्रदर्शन के बीच संबंध को किस तरह देखा, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है.

सीआईआई ने बताया कि इस सर्वे में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की 238 कंपनियों को शामिल किया गया. इसमें सभी उद्योग क्षेत्रों की सूक्ष्म, लघु, मध्यम और बड़ी कंपनियां तथा विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां शामिल थीं.

घरेलू मांग को लेकर बढ़ा भरोसा

घरेलू मांग को लेकर कंपनियों का रुख अपेक्षाकृत सकारात्मक रहा. सर्वे में शामिल 61 प्रतिशत कंपनियों को वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में घरेलू मांग बढ़ने की उम्मीद है. केवल 9.6 प्रतिशत कंपनियों ने मांग में कमी आने का अनुमान जताया है. इससे संकेत मिलता है कि पिछली तिमाही की तुलना में कंपनियों का मांग को लेकर भरोसा मजबूत हुआ है.

मांग में तेज वृद्धि की उम्मीद रखने वाली कंपनियों का अनुपात भी बढ़ा है. करीब 16 प्रतिशत कंपनियों ने दूसरी तिमाही में घरेलू मांग में 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की उम्मीद जताई. पहली तिमाही में ऐसा मानने वाली कंपनियों का अनुपात 12.9 प्रतिशत था.

कारोबारी माहौल में जोखिम बरकरार

हालांकि, कंपनियों का एक बड़ा वर्ग अभी भी घरेलू मांग में सुधार की उम्मीद नहीं कर रहा है. करीब 29.4 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि दूसरी तिमाही में मांग पहली तिमाही के स्तर पर ही रह सकती है. वहीं, 6.1 प्रतिशत कंपनियों ने मांग में 5-20 प्रतिशत की गिरावट और 3.5 प्रतिशत ने 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट का अनुमान जताया.

सर्वे से भारतीय कारोबारी माहौल की मिली-जुली तस्वीर सामने आती है. एक तरफ कारोबारी भरोसा और मांग की उम्मीदों में सुधार हुआ है, वहीं दूसरी ओर व्यापक आर्थिक मजबूती का लाभ सभी कंपनियों तक समान रूप से नहीं पहुंचा है. इससे संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था के समग्र आंकड़े भले ही सकारात्मक बने हुए हैं, लेकिन कंपनियों के स्तर पर इसका असर अभी भी असमान है.
 


इंडिगो शुरू करेगी गुवाहाटी-बैंकॉक उड़ान, पूर्वोत्तर भारत से पहली अंतरराष्ट्रीय सेवा

27 अक्टूबर से शुरू होगी नई उड़ान, सप्ताह में दो बार गुवाहाटी को सीधे बैंकॉक से जोड़ेगी; पूर्वोत्तर भारत की दक्षिण-पूर्व एशिया तक पहुंच होगी आसान

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 08 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2026
BWHindia

इंडिगो 27 अक्टूबर 2026 से गुवाहाटी और बैंकॉक के बीच नॉन-स्टॉप उड़ान सेवा शुरू करने जा रही है. यह गुवाहाटी से एयरलाइन की पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान होगी. इसके साथ ही पूर्वोत्तर भारत और थाईलैंड के बीच सीधी अंतरराष्ट्रीय हवाई कनेक्टिविटी भी स्थापित होगी.

नई गुवाहाटी-बैंकॉक सेवा सप्ताह में दो बार संचालित की जाएगी. नियमित उड़ानें 31 अक्टूबर से बुधवार और शनिवार को चलेंगी. वहीं, उद्घाटन के लिए 27 अक्टूबर को विशेष उड़ान संचालित की जाएगी. एयरलाइन ने बताया कि उड़ानों का कार्यक्रम नियामकीय मंजूरी के अधीन है.

उद्घाटन उड़ान के तहत बैंकॉक से गुवाहाटी जाने वाली उड़ान 6ई 1086 सुबह 8:50 बजे रवाना होकर 10:25 बजे गुवाहाटी पहुंचेगी. वहीं, गुवाहाटी से बैंकॉक जाने वाली उड़ान 6ई 1085 शाम 6:15 बजे रवाना होगी और रात 10:45 बजे बैंकॉक पहुंचेगी. सभी समय स्थानीय समयानुसार हैं.

पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

इंडिगो के मुताबिक, सीधी उड़ान सेवा से पूर्वोत्तर भारत और थाईलैंड के बीच पर्यटन और कारोबारी यात्राओं के नए अवसर पैदा होंगे. इससे पर्यटन, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. साथ ही, गुवाहाटी की दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक उभरते अंतरराष्ट्रीय हवाई केंद्र के रूप में स्थिति और मजबूत होगी.

गुवाहाटी इंडिगो के नेटवर्क का हिस्सा एयरलाइन के शुरुआती वर्षों से रहा है. वर्ष 2006 में इंडिगो की पहली दिल्ली-गुवाहाटी-इम्फाल उड़ान भी संचालित हुई थी. एयरलाइन ने कहा कि गुवाहाटी से अंतरराष्ट्रीय परिचालन शुरू करना पूर्वोत्तर क्षेत्र में कनेक्टिविटी बेहतर करने की उसकी निरंतर रणनीति का हिस्सा है.

थाईलैंड नेटवर्क का विस्तार

इंडिगो पहले से ही बैंकॉक को बेंगलुरु, भुवनेश्वर, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई से सीधी उड़ानों के जरिए जोड़ती है. इसके अलावा, बेंगलुरु, दिल्ली, कोलकाता और मुंबई से फुकेत के लिए भी सीधी उड़ानें संचालित की जाती हैं. दिल्ली से क्राबी के लिए भी सीधी हवाई सेवा उपलब्ध है.

एयरलाइन 26 अक्टूबर 2026 से गया और बैंकॉक के बीच भी सीधी उड़ान शुरू करेगी. इंडिगो के अनुसार, इस सेवा से बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल गया और थाईलैंड के बीच सीधा हवाई संपर्क स्थापित होगा.

430 से अधिक विमानों का बेड़ा

इंडिगो वर्तमान में करीब 2,200 दैनिक उड़ानों का संचालन करती है. एयरलाइन के बेड़े में 430 से अधिक विमान हैं. इसका नेटवर्क 95 से अधिक घरेलू और 40 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक फैला हुआ है. वित्त वर्ष 2026 में इंडिगो ने 12.3 करोड़ से अधिक यात्रियों को सेवा दी.
 


युद्ध के बीच भारत की तेल सप्लाई नहीं हुई बाधित, रूस पर बढ़ी निर्भरता; 31 देशों से खरीदा कच्चा तेल

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के प्रमुख तेल सप्लायर्स की सूची में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अमेरिका और नाइजीरिया टॉप 5 सप्लायर्स से बाहर हो गए हैं. उनकी जगह वेनेजुएला और ब्राजील ने ली है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 08 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2026
BWHindia

पश्चिम एशिया में युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत ने कच्चे तेल की आपूर्ति को बनाए रखने के लिए नए रास्ते तलाश लिए हैं. पिछले छह महीनों में भारत ने 31 नए देशों से तेल खरीदने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद आयात का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा देशों पर ही निर्भर रहा. इस दौरान रूस ने भारतीय तेल बाजार में अपनी पकड़ काफी मजबूत कर ली, जबकि इराक से होने वाला आयात तेजी से घट गया.

10 नए देशों से भी खरीदा कच्चा तेल

एनालिटिक्स फर्म केपलर के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च से अगस्त के बीच भारत ने 10 ऐसे देशों से कच्चा तेल खरीदा, जिनसे पिछले छह महीनों में कोई खरीद नहीं हुई थी. हालांकि, वेनेजुएला को छोड़कर इन नए सप्लायर्स का योगदान बेहद सीमित रहा. इन 9 देशों की संयुक्त हिस्सेदारी महज 1.4% रही, जबकि वेनेजुएला ने भारत के कुल कच्चे तेल आयात में करीब 5% हिस्सेदारी हासिल की.

इस अवधि में भारत के कुल तेल आयात में टॉप 5 सप्लायर्स की हिस्सेदारी 76% रही. इससे पहले के छह महीनों में यह आंकड़ा करीब 79% था. यानी नए स्रोत जुड़ने के बावजूद भारत का तेल आयात अभी भी कुछ बड़े सप्लायर्स पर काफी हद तक निर्भर है.

अमेरिका और नाइजीरिया टॉप 5 से बाहर

भारत के प्रमुख तेल सप्लायर्स की सूची में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अमेरिका और नाइजीरिया टॉप 5 सप्लायर्स से बाहर हो गए हैं. उनकी जगह वेनेजुएला और ब्राजील ने ली है. रूस, यूएई और सऊदी अरब अब भी भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं.

सप्लायर्स पर निर्भरता मापने वाले हेरफिंडाल-हिर्शमैन इंडेक्स यानी HHI में भी तेज बढ़ोतरी हुई है. यह मार्च-अगस्त अवधि में 1606 से बढ़कर 2513 हो गया, यानी करीब 56% की वृद्धि. 2500 से ऊपर का HHI अत्यधिक सप्लायर कंसंट्रेशन का संकेत माना जाता है.

रूस से तेल आयात में जबरदस्त उछाल

भारत के कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी पिछले छह महीनों में तेजी से बढ़ी है. यह 29% से बढ़कर 47% तक पहुंच गई. इस दौरान भारत का कुल कच्चा तेल आयात करीब 5% घटकर 4.77 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया. वहीं, इराक से होने वाले आयात में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई. भारत के कुल तेल आयात में इराक की हिस्सेदारी 18% से गिरकर महज 2% रह गई. इराक से करीब 8.20 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी आई, जिसकी भरपाई रूस से आयात बढ़ाकर की गई. रूस से आयात में करीब 7.70 लाख बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी हुई और अब भारत रूस से करीब 2.25 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीद रहा है.

नए सप्लायर्स से सीमित रही सप्लाई

भारत ने इस दौरान ईरान, इक्वाडोर, बहामास, अल्जीरिया और कनाडा समेत कई नए स्रोतों से भी कच्चा तेल खरीदा. हालांकि, इनमें से अधिकांश देशों से सप्लाई लंबे समय तक नहीं चली. कई नए सप्लायर्स ने छह महीनों में सिर्फ एक महीने भारत को कच्चा तेल भेजा.

उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, इसे भारत की स्थायी रणनीतिक शिफ्ट के तौर पर नहीं देखा जा सकता. पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र से संभावित सप्लाई बाधित होने की स्थिति में ग्लोबल ट्रेडर्स ने भारतीय रिफाइनरियों की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों का इस्तेमाल किया.

कच्चे तेल की कीमतें फिर चढ़ीं

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है. मंगलवार सुबह 7 बजे तक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स करीब 97.04 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. यह कीमत करीब छह सप्ताह के उच्चतम स्तर के आसपास है.

भारत के लिए तेल की कीमतों में यह तेजी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी घरेलू जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. ऐसे में सप्लाई के नए स्रोत तलाशने के साथ-साथ रूस जैसे प्रमुख सप्लायर्स पर बढ़ती निर्भरता भी आगे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.


सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले FPI को बड़ी राहत, अब नहीं देना होगा निवेशक समूह का ब्योरा

सेबी का यह बदलाव भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 5 जून, 2026 के परिपत्र के बाद आया है. आरबीआई ने सामान्य रास्ते से सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले एफपीआई के लिए तय कन्संट्रेशन लिमिट की शर्त हटा दी थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 08 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2026
BWHindia

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए अनुपालन नियमों में बड़ी राहत दी है. अब केवल सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले एफपीआई को निवेशक समूह की जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी. सेबी का यह फैसला ऐसे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बॉन्ड बाजार में निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

सभी सरकारी बॉन्ड निवेशकों तक बढ़ाई गई छूट

सेबी ने सोमवार को जारी परिपत्र के जरिए एफपीआई, डेजिग्नेटेड डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स (DDP) और पात्र विदेशी निवेशकों से जुड़े अपने मास्टर सर्कुलर में संशोधन किया है. इससे पहले यह छूट केवल फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले एफपीआई तक सीमित थी. अब इसका दायरा बढ़ाकर उन सभी एफपीआई तक कर दिया गया है, जो केवल सरकारी ऋण प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं.

आरबीआई के फैसले के बाद बदला नियम

सेबी का यह बदलाव भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 5 जून, 2026 के परिपत्र के बाद आया है. आरबीआई ने सामान्य रास्ते से सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले एफपीआई के लिए तय कन्संट्रेशन लिमिट की शर्त हटा दी थी. सेबी के मुताबिक, जब ऐसी कन्संट्रेशन लिमिट ही लागू नहीं है तो इन एफपीआई के लिए निवेशक समूह की पहचान करना भी जरूरी नहीं रह जाता.

तुरंत प्रभाव से लागू हुआ संशोधन

सेबी ने कहा है कि संशोधित प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं. नियामक ने डिपॉजिटरी, कस्टोडियन और डीडीपी को अपने सिस्टम में जरूरी बदलाव करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि नए नियमों को लागू किया जा सके.

विदेशी डेट निवेशकों के लिए अनुपालन होगा आसान

निवेशक समूह का ब्योरा देने की अनिवार्यता हटने से सॉवरिन वेल्थ फंड, केंद्रीय बैंक और भारतीय बॉन्ड बाजार में निवेश करने वाले अन्य बड़े डेट-केंद्रित विदेशी निवेशकों के लिए अनुपालन प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है. सेबी अब तक एफपीआई के बीच मालिकाना हक और नियंत्रण पर नजर रखने के साथ-साथ सेक्टर या किसी कंपनी में निवेश की सीमा लागू करने के लिए निवेशक समूह और लाभार्थी मालिकों से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल करता रहा है.
 


शेयर बाजार में फिर गिरावट, सेंसेक्स 383 अंक टूटा; आज इन बड़े शेयरों पर रहेगी नजर

सोमवार को सेंसेक्स 382.62 अंक यानी 0.50 फीसदी की गिरावट के साथ 76,132.81 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 118 अंक यानी 0.50 फीसदी टूटकर 23,779.15 पर आ गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 08 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2026
BWHindia

पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच घरेलू शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों करीब 0.50 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए. पिछले चार हफ्तों से बाजार पर दबाव बना हुआ है और निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम के साथ-साथ कंपनियों से जुड़े अहम कॉरपोरेट अपडेट पर है.

सेंसेक्स 382 अंक लुढ़का, निफ्टी भी लाल निशान में

सोमवार को कारोबार खत्म होने पर सेंसेक्स 382.62 अंक यानी 0.50 फीसदी की गिरावट के साथ 76,132.81 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 118 अंक यानी 0.50 फीसदी टूटकर 23,779.15 पर आ गया. सेंसेक्स के 30 शेयरों में इन्फोसिस सबसे ज्यादा दबाव में रहा और करीब 3.81 फीसदी की गिरावट के साथ 1,087 रुपये पर बंद हुआ.

इन शेयरों में रही तेजी और गिरावट

बाजार में कुछ चुनिंदा शेयरों ने कमजोरी के बीच बढ़त दर्ज की. सेंसेक्स में लार्सन एंड टुब्रो, भारती एयरटेल और मारुति प्रमुख गेनर्स रहे. वहीं, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा और टाटा स्टील सबसे ज्यादा दबाव में रहे. निफ्टी में अपोलो हॉस्पिटल 1.27 फीसदी की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा. इसके बाद लार्सन एंड टुब्रो 0.88 फीसदी और कोल इंडिया 0.84 फीसदी चढ़े. दूसरी ओर, इन्फोसिस 3.81 फीसदी, एसबीआई लाइफ 2.42 फीसदी और एचडीएफसी लाइफ 2.42 फीसदी टूटे.

शुक्रवार को कैसा रहा था बाजार?

पिछले कारोबारी सत्र यानी 4 सितंबर को सेंसेक्स 76,657.02 के स्तर पर खुला था. कारोबार के दौरान यह 76,883.14 के हाई और 76,515.43 के लो तक गया. अंत में सेंसेक्स 0.48 फीसदी की बढ़त के साथ 76,515.43 पर बंद हुआ था. निफ्टी 23,910.90 पर खुला और 24,005.75 का हाई तथा 23,895.85 का लो बनाया. कारोबार के अंत में निफ्टी 0.10 फीसदी की तेजी के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ था.

गिरावट के पीछे क्या हैं बड़ी वजहें?

घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी के पीछे पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी अहम वजहों में शामिल हैं. वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता का असर निवेशकों के सेंटीमेंट पर पड़ा है. इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और बाजार में लगातार बनी बिकवाली पर भी निवेशकों की नजर है.

आज इन शेयरों पर रखें नजर

मंगलवार के कारोबार में Swiggy, Maruti Suzuki India, Garuda Construction, PVR INOX, Arisinfra Solutions, Asian Energy Services, Adani Power और RBL Bank फोकस में रह सकते हैं. Swiggy अपनी स्टेप-डाउन सब्सिडियरी Lynks Logistics में पूरी हिस्सेदारी Trustroot Internet को शेयर-स्वैप डील के जरिए बेचने वाली है, जबकि Lynks के B2B डिस्ट्रीब्यूशन कारोबार ने वित्त वर्ष 2026 में करीब 668 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया था. Maruti Suzuki India ने चुनिंदा कार मॉडलों की कीमतों में 20,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की है. Garuda Construction की सब्सिडियरी ने जेद्दा में 93 मंजिला टावर के निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन किया है, जिससे अगले पांच वर्षों में करीब 1,800 करोड़ रुपये की अनुमानित आय हो सकती है. PVR INOX ने कथित 200 करोड़ रुपये की किकबैक डील से जुड़े मामले में कहा है कि शुरुआती जांच में रिश्वतखोरी के कोई सबूत नहीं मिले हैं. Arisinfra Solutions की सब्सिडियरी को बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड स्थित Morning Mist रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट के लिए नया ऑर्डर मिला है. Asian Energy Services की सब्सिडियरी Oilmax Energy को अरुणाचल प्रदेश सरकार से Pakro Vanadium and Graphite Block के लिए Composite Licence से जुड़ा Letter of Intent मिला है. वहीं, Adani Power को GVK Energy के अधिग्रहण के लिए Letter of Intent मिला है, जबकि RBL Bank के बोर्ड ने विदेशों से 1 अरब डॉलर तक जुटाने को मंजूरी दी है. 

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)