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जिस कंपनी से भर गया था Modi सरकार का मन, अब वही भर रही उसकी झोली
कुछ वक्त पहले तक मोदी सरकार पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहती थी. अब कंपनी से उसे डिविडेंड के रूप में मोटी रकम मिल रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
मोदी सरकार (Modi Govt) का जिस सरकारी कंपनी से मन भर गया था, अब वही उसकी झोली भर रही है. हम बात कर रहे हैं भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) की. वित्त वर्ष 2022 में मोदी सरकार ने BPCL को बेचने का निर्णय लिया था. सरकार ने इस दिशा में तैयारी भी शुरू कर दी थी, लेकिन मनमुताबिक डील नहीं मिलने पर बात टल गई. इस बीच, BPCL खुद को मजबूत करती रही. जुलाई-सितंबर, 2023 की अवधि में कंपनी फिर से लाभ की स्थिति में आ गई और यह सिलसिला जारी है. अब BPCL सरकार की झोली भर रही है.
केंद्र को मिले 2,413 करोड़
एक रिपोर्ट के अनुसार, BPCL ने सरकार को डिविडेंड के रूप में लगभग 2,413 करोड़ रुपए दिए हैं. निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने बताया है कि सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी बीपीसीएल से करीब 2,413 करोड़ रुपए का लाभांश मिला है.चालू वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार को अब तक केंद्रीय लोक उपक्रमों से डिविडेंड के रूप में कुल 15,389.14 करोड़ मिले हैं. इसमें इंडियन ऑयल कारपोरेशन (IOC) से 5,091 करोड़, इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से 40 करोड़, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन से 554 करोड़ और टेलीकॉम कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड से विशेष लाभांश के रूप में मिले 3,443 करोड़ रुपए शामिल हैं.
दूसरी सबसे बड़ी ऑयल कंपनी
इंडियन ऑयल के बाद बीपीसीएल देश की दूसरी सबसे बड़ी ऑयल मार्केटिंग कंपनी है. लोकसभा चुनाव में मनमाफिक परिणाम न मिलने के बाद से विनिवेश को लेकर मोदी सरकार का रुख कुछ नरम हुआ है. सरकार के गठन के बाद केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि सरकारी स्वामित्व वाली भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के निजीकरण की योजना को फिलहाल टाल दिया गया है. पुरी ने यह भी कहा था कि उच्च राजस्व अर्जित करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बेचने की जरूरत नहीं है. पुरी ने आगे कहा था कि BPCL ने पहली तीन तिमाहियों में जो मुनाफा कमाया है, वो उसकी हिस्सेदारी बेचकर मिलने वाली राशि से अधिक है.
इन्होंने दिखाई थी दिलचस्पी
बीपीसीएल ने वित्त वर्ष 2024 की पहली छमाही में 19000 करोड़ रुपए से अधिक का शुद्ध लाभ दर्ज किया था.कंपनी लगातार अपनी आर्थिक सेहत में सुधार कर रही है. सरकार जब BPCL में अपनी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश में लगी थी, तब अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता (Vedanta), अपोलो ग्लोबल (Apollo Global) और आई स्क्वायर्ड कैपिटल एडवाइजर्स (I Squared Capital) ने इसमें दिलचस्पी दिखाई थी. सरकार कंपनी में अपनी 53 फीसदी हिस्सेदारी बेचना चाहती थी. हालांकि, बाद में ये कंपनियां पीछे हट गईं और सरकार को मनमाफिक डील नहीं मिल पाई. अब BPCL की मजबूत आर्थिक सेहत के मद्देनजर सरकार ने इसे बेचने का फैसला टाल दिया है.
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