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अपने कर्मचारियों को गिफ्ट देने वाले हैं Modi, 8वें वेतन आयोग पर क्या है सरकार की तैयारी?

माना जा रहा है कि मोदी सरकार 8वें वेतन आयोग को लेकर जल्द कोई फैसला सुना सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

केंद्र की नई सरकार अस्तित्व में आ चुकी है. प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालते ही PM मोदी ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं. देश के एक करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी भी सरकार की तरफ उम्मीद से देख रहे हैं. उन्हें 8वें वेतन आयोग के गठन का बेसब्री से इंतजार है. चुनाव से पूर्व सामने आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि भले ही 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ हो, लेकिन लोकसभा चुनाव बाद इस पर कोई सकारात्मक खबर सुनने को मिल सकती है. 

सालाना हो सकती है व्यवस्था
मौजूदा व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार हर 10 साल में एक नए वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करती है. देश में पहला वेतन आयोग जनवरी 1946 में लागू किया गया था और आखिरी 7वां वेतन आयोग जनवरी 2016 में लागू हुआ था. अब केंद्रीय कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग का इंतजार है. माना जा रहा है कि 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के मुकाबले 8वें वेतन आयोग में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं. उदाहरण के तौर पर, इसमें फिटमेंट फैक्टर के फॉर्मूले पर सैलरी नहीं बढ़ेगी. बल्कि किसी दूसरे फॉर्मूले के आधार पर सैलरी इंक्रीमेंट दिया जा सकता है. इसके अलावा, 10 साल में एक बार वेतन आयोग के गठन की व्यवस्था को बदलकर सालाना किया जा सकता है.

कितना लग सकता है समय?
8वां वेतन आयोग जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है. हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है. जानकारों का कहना है कि चूंकि भाजपा को चुनाव में पूर्ण बहुमत नहीं मिला है और मोदी गठबंधन की सरकार चला रहे हैं इसलिए जनहितैषी फैसले ज्यादा होंगे. ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों को खुश करने के लिए सरकार आयोग के गठन की दिशा में कोई निर्णायक कदम उठा सकती है. वेतन आयोग का गठन हो जाने के बाद आयोग को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने में आमतौर पर 12-18 महीने लगते हैं. 8वां वेतन आयोग लागू होने से लगभग 49 लाख सरकारी कर्मचारियों, 68 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा.

इस तरह के बदलाव संभव 
एक रिपोर्ट बताती है कि 7वें वेतन आयोग के गठन के बाद केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी में सबसे कम इजाफा हुआ था. दरअसल, फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) के हिसाब से सैलरी बढ़ाई गई थी और इसमें इसे 2.57 गुना रखा गया. इससे बेसिक सैलरी 18000 रुपए हो गई. यदि 8वें वेतन आयोग में भी इसी फ़ॉर्मूले को अपनाया जाता है, तो फिटमेंट को 3.68 गुना किया जा सकता है. इस आधार पर कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन में 44.44% की वृद्धि हो सकती है और यह 26000 रुपए हो सकता है. निचले स्तर के कर्मचारियों का सैलरी रिविजन सालाना परफॉर्मेंस के आधार पर किया जा सकता है. जबकि अधिकतम सैलरी वाले कर्मचारियों का रिविजन 3 साल के अंतराल पर निर्धारित किया जा सकता है.

किस आयोग में कितनी वृद्धि?
Pay Commission के हिसाब से देखें, तो चौथे वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों की वेतन वृद्धि 27.6% की गई. पांचवें आयोग में उनकी सैलरी में 31 फीसदी का बड़ा इजाफा हुआ. इसके बाद छठे वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को लागू किया गया. इस उस केन्द्रीय कर्मचारियों को सैलरी में 1.86 गुना मिला. साल 2014 में 7वें वेतन आयोग का गठन हुआ. इसमें भी फिटमेंट फैक्टर को आधार मानते 14.29% वेतन वृद्धि की गई, जिसका कर्मचारियों ने विरोध भी किया. अब कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग का इंतजार है.


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