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मोबाइल और इंटरनेट सब बंद, वित्त मंत्रालय में शुरू हुआ गुप्तावास, जानिए क्यों?

हलवा सेरेमनी के बाद वित्त मंत्रालय के कर्मचारियों का लॉक-इन प्रोसेस शुरू हो गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 23 जुलाई को लोकसभा में आम बजट पेश करेंगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

परंपरागत हलवा सेरेमनी के साथ ही बजट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. हर साल बजट की तैयारी के लिए वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) द्वारा गुप्तावास (lock-in process) से पहले हलवा सेरेमनी का आयोजन किया जाता है. हलवा सेरेमनी के बाद वित्त मंत्रालय के कुछ चुनिंदा अधिकारी नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में ही रहते हैं. इन लोगों को वित्त मंत्री का बजट भाषण होने के बाद ही बाहर निकलने की अनुमति होती है. आइए जानते हैं इन अधिकारियों को गुप्तावास में क्यों रखा जाता है ?   

एक हफ्ते तक रहेंगे लॉक इन

बजट बनाने की प्रक्रिया में शामिल वित्त मंत्रालय के कुछ चुनिंदा अधिकारी का लॉक इन पीरियड शुरू हो गया है. अब एक हफ्ते यानी बजट पेश होने तक इन सभी अधिकारियों को नजरबंद रखा जाएगा. इस दौरान ये अधिकारी पूरी तरह बाहर की दुनिया से कटे रहेंगे. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के संसद में बजट पेश करने के बाद ही इन लोगों को अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों से मिलने की अनुमति मिलेगी.

क्यों होता है ये लॉक इन प्रोसेस?

आपको बता दें, बजट बनाने की प्रक्रिया को पूरी तरह से गुप्त रखा जाता है और इसी गोपनीयता को बनाए रखने के लिए बजट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को लॉक इन प्रोसेस का सामना करना पड़ता है. बजट बनने के एक महीने पहले से ही वित्त मंत्रालय में मीडिया की एंट्री बंद हो जाती है. इसकी वजह यह है कि बजट से जुड़ी गोपनीय जानकारी के लीक होने से देश की इकॉनमी को नुकसान हो सकता है. बजट बनाने की प्रक्रिया में कौन शामिल होगा, इसका खुलासा भी नहीं किया जाता है. भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में बजट बनाने वाले अधिकारियों को 'लॉक इन' में रखा जाता है. उन पर लगातार खुफिया विभाग की नजर बनी रहती है.

बिना मोबाइल और इंटरनेट के बाहरी दुनिया से रहेंगे दूर

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत वित्त मंत्री को हर साल संसद में   बजट पेश करना पड़ता है. इसे गुप्त रखने के लिए पूरी जांच पड़ताल के बाद करीब 100 अधिकारियों और कर्मचारियों को इस काम पर लगाया जाता है उन्हें नॉर्थ ब्लॉक में एक गुप्त जगह पर रखा जा सकता है. इन्हें एक हफ्ते तक अपने घर परिवार से दूर रहना पड़ता है. इस दौरान उन्हें मोबाइल, ईमेल, फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती है, यानी वे पूरी तरह बाहरी दुनिया से कटे रहते हैं.

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केवल लैंडलाइन फोन रहता है मौजूद

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बजट को अंतिम रूप देने वाले लोग मोबाइल नहीं रख सकते हैं और न ही उन्हें अपने घर पर बात करने की अनुमति होती है. नॉर्थ ब्लॉक के प्रिंटिंग रूम में केवल एक लैंडलाइन फोन होता है. उसमें भी केवल इनकमिंग की सुविधा होती है. केवल इमरजेंसी की स्थिति में घर पर बात की जा सकती है, लेकिन उसकी बात सुनने के लिए इंटेलिजेंस विभाग का एक आदमी हमेशा वहां सतर्क रहता है. वहां डॉक्टरों की एक टीम भी मौजूद रहती है ताकि किसी कर्मचारी की तबीयत खराब होने की स्थिति में उसका इलाज किया जा सके.

कड़ी निगरानी में रहते हैं अधिकारी और कर्मचारी

इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी बजट के दौरान वित्त मंत्रालय पर हर समय बारीकी नजर रखते हैं. बजट से जुड़े प्रमुख लोगों का फोन भी टेप किया जाता है। वित्त मंत्रालय में आने-जाने वाले हर आदमी पर सीसीटीवी के जरिए कड़ी निगरानी रखी जाती है. सभी कर्मचारी सीसीटीवी कैमरे की रेंज में रहते हैं। अगर इमरजेंसी में किसी प्रिंटिंग कर्मचारी को गुप्त कमरे से बाहर निकलता है तो उसके साथ इंटेलिजेंस विभाग और दिल्ली पुलिस का आदमी हमेशा साथ रहता है. वित्त मंत्रालय के प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वालों को दिए जाने वाले खाने की भी गहराई से जांच होती है.

 


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