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भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर की राह आसान करना मंत्रालय का लक्ष्य: सेंथिल राजन
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय नीतिगत बाधाओं को दूर करने, नए बिजनेस मॉडल को बढ़ावा देने और लाइव इवेंट्स व फिल्म निर्माण की प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर कर रहा है काम
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर को 100 अरब डॉलर के उद्योग में बदलने की महत्वाकांक्षा के बीच सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) खुद को केवल नियामक के बजाय उद्योग को आगे बढ़ाने वाले सहयोगी के रूप में देखता है. मंत्रालय का जोर नीतिगत बाधाओं को दूर करने, नए बिजनेस मॉडल को बढ़ावा देने और कारोबार के विस्तार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर है. मंत्रालय के संयुक्त सचिव सेंथिल राजन ने एक उद्योग कार्यक्रम में यह बात कही.
राजन के मुताबिक, भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर को आगे बढ़ाने में निजी क्षेत्र की अहम भूमिका रही है. सरकार की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि बदलते प्लेटफॉर्म, दर्शकों की पसंद और कमाई के नए तरीकों के बीच नियम उद्योग की वृद्धि में बाधा न बनें. उन्होंने कहा, "उद्योग हमें ऐसे सहयोगी के रूप में देखता है, जो आगे बढ़ने का रास्ता आसान बनाता है. हमारा काम रास्ते की बाधाओं को दूर करना है."
राजन ने कहा कि इस क्षेत्र की विकास क्षमता का पूरा लाभ उठाने के लिए किसी एक नीतिगत फैसले पर निर्भर नहीं रहा जा सकता. इसके लिए कई स्तरों पर कदम उठाने होंगे.
टीवी विज्ञापनों के नियमों में बदलाव से ब्रॉडकास्टर्स को राहत
राजन ने नीतिगत बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले लीनियर टेलीविजन चैनलों पर एक घंटे में अधिकतम 12 मिनट के विज्ञापन दिखाने की सीमा थी, जिसे हटा दिया गया है. उनके मुताबिक, इससे टेलीविजन चैनलों को विज्ञापन के जरिए कमाई करने में अधिक लचीलापन मिलेगा.
डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर विज्ञापन खर्च बढ़ने के बीच इस बदलाव से ब्रॉडकास्टर्स को अपने विज्ञापन स्लॉट का बेहतर इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा. राजन ने कहा कि मंत्रालय उद्योग के अलग-अलग क्षेत्रों की चुनौतियों की समीक्षा कर रहा है, ताकि मौजूदा नीतियां कारोबार के विस्तार में बाधा न बनें.
लाइव इवेंट्स और फिल्म निर्माण की प्रक्रिया होगी आसान
मंत्रालय लाइव इवेंट्स के आयोजन और फिल्मों की शूटिंग के लिए जरूरी अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी काम कर रहा है. राजन ने बताया कि लाइव इवेंट्स डेवलपमेंट सेल का दूसरा चरण तैयार किया जा रहा है. इसके तहत राज्य सरकारों के साथ मिलकर मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं.
कई राज्य ऐसे पोर्टल से जुड़ चुके हैं, जहां आयोजक विभिन्न अनुमतियों के लिए आवेदन कर सकते हैं. राजन के मुताबिक, लाइव इवेंट्स का आर्थिक लाभ केवल मनोरंजन क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पर्यटन, होटल और परिवहन जैसे क्षेत्रों को भी फायदा मिलता है.
फिल्म निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए मंत्रालय ने इंडिया सिने हब (India Cine Hub) भी स्थापित किया है. यह एक सिंगल-विंडो पोर्टल है, जिसका उद्देश्य फिल्मों की शूटिंग के लिए जरूरी अनुमतियों को सरल बनाना और विदेशी सहयोग से जुड़ी गतिविधियों को सुविधाजनक करना है.
गेमिंग और एनीमेशन जैसे क्षेत्रों में कौशल विकास पर जोर
मीडिया और एंटरटेनमेंट उद्योग में नई तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच विशेष कौशल वाले पेशेवरों की मांग भी बढ़ रही है. राजन ने बताया कि WAVES समिट के बाद उद्योग के भागीदारों के सहयोग से इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज की स्थापना की गई है.
यह संस्थान गेमिंग, एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स और संबंधित रचनात्मक क्षेत्रों में पेशेवरों को प्रशिक्षित करने पर ध्यान दे रहा है. संस्थान में वर्चुअल रियलिटी (VR), एक्सटेंडेड रियलिटी (XR), प्रोजेक्शन थिएटर और गेमिंग लैब जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं.
राजन ने उद्योग से इन सुविधाओं का लाभ उठाने और भारत के क्रिएटिव टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूत करने की अपील की.
भारतीय कंटेंट को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की जरूरत
राजन ने कहा कि भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट उद्योग को केवल घरेलू दर्शकों या विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उद्योग को ऐसे कंटेंट और बौद्धिक संपदा (IP) विकसित करने की जरूरत है, जिन्हें वैश्विक स्तर पर पसंद किया जाए.
उन्होंने कहा कि भारतीय फिल्मों में पहले 100 करोड़ रुपये की कमाई को बड़ी उपलब्धि माना जाता था, लेकिन बाद में उद्योग ने 1,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को लक्ष्य बनाना शुरू किया. राजन ने 'बाहुबली' की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे बड़े व्यावसायिक लक्ष्य हासिल करने की संभावनाएं सामने आईं.
उनके मुताबिक, भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स, प्रोड्यूसर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति बनानी होगी.
राजन ने कहा, "हमें पूरी वैल्यू चेन को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हर साल भारतीय कंटेंट के कम से कम तीन या चार प्रोडक्ट ऐसे हों, जिन्हें प्रवासी भारतीयों से आगे भी वैश्विक स्तर पर सफलता मिले."
भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर के लिए 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने में सरकार और उद्योग, दोनों की भूमिका अहम होगी. जहां सरकार नीतिगत और परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करने पर काम कर रही है, वहीं उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप कंटेंट और बिजनेस मॉडल विकसित करने होंगे.
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