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मिडिल ईस्ट संकट गहराया: हॉर्मुज में जाम, भारत ने तेल-गैस के लिए बैकअप प्लान तेज किया
700 से अधिक टैंकर फंसे, वैश्विक सप्लाई पर दबाव; भारत सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों और आपात उपायों पर काम शुरू किया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाला तेल प्रवाह बुरी तरह प्रभावित हुआ है. पूर्व-पश्चिम कच्चे तेल यातायात में करीब 86 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है और सैकड़ों टैंकर जलडमरूमध्य के दोनों ओर खड़े हैं. इससे ऊर्जा बाजारों में तीखी प्रतिक्रिया दिखी और सप्लाई शृंखला पर अनिश्चितता बढ़ी है.
समुद्री विश्लेषण आंकड़ों के मुताबिक 1 मार्च को केवल तीन टैंकर हॉर्मुज पार कर सके, जो इस साल के औसत से बहुत कम है. 2 मार्च की सुबह तक मुख्य मार्गों से महज एक छोटा टैंकर और एक कार्गो जहाज गुजरा. कुल 700 से अधिक गैर-ईरानी टैंकर कतार में हैं, जबकि कई जहाज ओमान की खाड़ी में रुके हुए हैं.
बाजार में उछाल, बीमा और मालभाड़ा महंगा
तनाव बढ़ने के साथ ब्रेंट क्रूड करीब 10 प्रतिशत उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया. सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी और कतर के एलएनजी संयंत्र पर हमलों के बाद यूरोपीय गैस कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई. खाड़ी क्षेत्र के लिए युद्ध-जोखिम बीमा और मालभाड़ा दरें बढ़ने से ईंधन लागत पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है.
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेताया है कि संघर्ष “दिनों नहीं, हफ्तों” तक चल सकता है, जिससे आपूर्ति सामान्य होने में देरी की आशंका बढ़ गई है.
भारत अलर्ट मोड पर, वैकल्पिक आपूर्ति की तलाश
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एशिया और यूरोप के रिफाइनर अमेरिका की खाड़ी, पश्चिम अफ्रीका, ब्राजील और रूस से वैकल्पिक आपूर्ति की कोशिश कर रहे हैं. खाड़ी क्षेत्र के तेल पर अत्यधिक निर्भर चीन और भारत जैसे देशों पर तत्काल दबाव है. नई दिल्ली में अधिकारी आपात कदमों पर विचार कर रहे हैं. विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यदि व्यवधान लंबा खिंचता है तो भारत घरेलू आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए पेट्रोल और डीजल के निर्यात में कटौती कर सकता है, रूसी कच्चे तेल के आयात को बढ़ा सकता है और एलपीजी की राशनिंग जैसे मांग-प्रबंधन उपाय लागू कर सकता है. हालांकि इन संभावित कदमों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
तेल मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, “हम विकसित हो रही स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और देश में प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और वहनीयता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.”
एलपीजी और एलएनजी पर सबसे ज्यादा दबाव
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 80–85 प्रतिशत आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा खाड़ी से हॉर्मुज के जरिए आता है. यदि नई खेप नहीं पहुंचती तो मौजूदा स्टॉक दो सप्ताह से कम खपत कवर कर सकता है. सरकारी रिफाइनरियां इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल कुछ इकाइयों में एलपीजी उत्पादन बढ़ा रही हैं.
नेचुरल गैस के मोर्चे पर दबाव ज्यादा है. भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ता कतर द्वारा एलएनजी उत्पादन रोकने की खबरों के बाद सीमित स्टॉक बचा है और कुछ औद्योगिक ग्राहकों को गैस आपूर्ति घटाई गई है. जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक देशों से स्पॉट कार्गो मंगाने की तैयारी है.
भंडार की स्थिति और आगे की रणनीति
सरकारी आकलन के अनुसार रणनीतिक भंडार, रिफाइनरियों, बंदरगाहों और फ्लोटिंग स्टोरेज सहित कुल उपलब्धता लगभग 74 दिनों की मांग के बराबर है. इसमें समर्पित कच्चा तेल भंडार और रिफाइंड उत्पादों का स्टॉक शामिल है, जबकि एलएनजी स्टोरेज अपेक्षाकृत कम अवधि कवर करता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्री मार्ग जल्दी सामान्य नहीं हुए तो एशिया और यूरोप के रिफाइनर अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका, ब्राजील और रूस से वैकल्पिक बैरल की ओर शिफ्ट होंगे. भारत के लिए प्राथमिकता घरेलू ईंधन सुरक्षा बनाए रखना और महंगाई पर असर सीमित रखना होगी.
फिलहाल ऊर्जा बाजार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है और कीमतों की दिशा क्षेत्रीय घटनाक्रम तथा शिपिंग बहाली की रफ्तार पर निर्भर करेगी.
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