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सोनी से डील टूटने के बाद बढ़ी MF’s की चिंता,  जी बोर्ड और प्रबंधन से की मुलाकात

सोनी मर्जर डील खत्म होने के बाद Mutual fund’s के अधिकारियों ने जी बोर्ड और प्रबंधन से मुलाकात की. MF’s ने जी से डील खत्म होने के कारण और आगे की रणनीति पर जवाब मांगा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

सोनी से समझौता (डील) टूटने के बाद जी की परेशानियां बढ़ती चली जा रही हैं. 22 जनवरी को सोनी द्वारा डील रद्द करने के बाद सोमवार को पहली बार जी एंटरटेनमेंट में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले भारत के सबसे बड़े म्यूचुअल फंड्स (Mutual Fund’s) के वरिष्ठ अधिकारी जी के बोर्ड सदस्यों और प्रबंधन से मुलाकात करेंगे. जी के लगभग 100 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डरों ने इस समझौते के पक्ष में मतदान किया था, जो सोनी के पीछे हटने से टूट गया. सूत्रों के अनुसार बड़े शेयर होल्डर अब कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए प्रबंधन से अपनी आगे की रणनीति समझने के लिए बैठक कर रहे हैं. हालांकि यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि म्यूचुअल फंड्स जी में मैनेजमेंट बदलने की योजना बना रहे हैं, लेकिन उनकी ओर से अभी तक ऐसा कोई कदम उठाया नहीं  गया है. 

सोनी से डील खत्म होने के बाद गिरे जी के शेयर

जी के शेयर की कीमत अपने 52 वीक के हाई लेवल से 40 प्रतिशत से भी नीचे आ गई है. यह गिरावट सोनी द्वारा 22 जनवरी को डील खत्म करने की घोषणा के बाद आई. समझौता खत्म करने को लेकर सोनी की कई मांगों में से एक प्रमुख मांग यह थी कि जी के एमडी और सीईओ पुनित गोयनका ने अपने पद और बोर्ड से इस्तीफा दे दें. हालांकि  जी का कहना है कि सोनी की दूसरी मांगों के कारण यह डील खत्म हुई है.

जी से एमएफ की मांग  
जी के शेयर की कीमत में गिरावट के बाद एमएफ के अधिकारी जी के बोर्ड और प्रबंधन से मुलाकात कर यह समझना चाहते हैं कि उसने समझौता पूरा करने के लिए सोनी की मांगों का पालन क्यों नहीं किया? इसके अलावा आर्थिक नुकसान की समीक्षा भी चाहते हैं, क्योंकि सोनी ने समझौता समाप्ति लागत में 90 मिलियन अमरीकी डालर की मांग की थी. वहीं, जी ने भी समझौता रद्द करने के लिए सोनी से मुआवजे की मांग करते हुए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में अपना आवेदन दायर किया है. एमएफ जी में किसी बड़े निवेशक या मर्जर के बिना बिजनेस की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रबंधन और बोर्ड की रणनीति भी जानना चाहते हैं. वहीं, देखा जाए तो बिना किसी बड़े निवेशक के जी 18-20 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ भारत की दूसरी सबसे बड़ी मनोरंजन कंपनी बनी रहेगी. इसकी तुलना में मर्जर की गई इकाई रिलायंस जियो और डिजनी (Jio-Disney) के मार्केट शेयर 33 प्रतिशत से 35 प्रतिशत के बीच होंगे,  जिसकी कुल कीमत लगभग 70,000 करोड़ रुपये है, जबकि जी के मौजूदा शेयर की कीमत 15,500 करोड़ रुपये है.

जी बोर्ड की जांच समिति कर रही आरोपों की समीक्षा

जी के बोर्ड ने 27 फरवरी को हुई अपनी बैठक में 23 फरवरी 2024 को गठित 'इंडिपेंडेंट एडवायजरी कमेटी' का नाम बदलकर 'इंडिपेंडेंट इनवेस्टिगेशन कमेटी' कर दिया था. इस जांच समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज सतीश चंद्रा से इनपुट मांगने के बाद चेयरमैन आर. गोपालन के नेतृत्व में जी के बोर्ड ने इंडिपेंडेंट इनवेस्टिगेशन कमेटी को मंजूरी देकर उन पर लगे आरोपों की गहन समीक्षा करने की सलाह दी है.  वहीं, जी प्रबंधन और प्रमोटरों के खिलाफ सेबी का अगला आदेश अप्रैल में आने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार उससे पहले जी की आंतरिक समिति की रिपोर्ट भी आ जाएगी, जिससे चीजें स्पष्ट हो जाएंगी. पिछले साल अगस्त में जी के प्रमोटर पुनित गोयनका को कंपनी के एमडी और सीईओ के रूप में बहाल किया गया था, जब securities Appellate tribunal (SAT) ने कथित तौर पर कंपनी के रुपयों की हेराफेरी के लिए SEBI द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को हटा दिया था. सैट ने नोट किया था कि सेबी ने अभी तक रुपयों के हेरफेर को साबित नहीं किया है.

ये हैं जी के बड़े एमएफ निवेशक

जी के बड़े एमएफ निवेशकों में एचएसबीसी वैल्यू फंड, टाटा लार्ज कैप और मिड-कैप फंड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ ट्रस्टी, आदित्य बिड़ला सन लाइफ आर्बिट्राज फंड, कोटक इक्विटी आर्बिट्राज फंड, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड- एचडीएफसी मिड-कैप अपॉर्चुनिटीज फंड, निप्पॉन लाइफ इंडिया ट्रस्टी लिमिटेड-ए/सी निप्पॉन इंडिया मल्टी कैप फंड, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल वैल्यू डिस्कवरी फंड शामिल हैं. इसके अलावा एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस और लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया बड़े इन्श्योरेंस प्लेयर्स में से हैं, जिनके पास इसकी पर्याप्त हिस्सेदारी है.


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