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2025 में धातुओं ने रिकॉर्ड उछाल, सोना, चांदी, प्लेटिनम और तांबे में जबरदस्त लाभ
2025 में धातुओं ने रिकॉर्ड रैली लगाई, सोना, चांदी, प्लेटिनम और तांबे में जबरदस्त लाभ दर्ज हुए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
2025 का साल कमोडिटीज के लिए रिकॉर्ड ब्रेकिंग रहा, जिसमें धातुओं ने शानदार रिटर्न दिए. इस साल चांदी और प्लेटिनम लगभग 160% तक बढ़ी, सोना लगभग 70% चढ़ा, और तांबा लगभग 43% उन्नत हुआ, जिससे यह साल वैश्विक धातु बाजार के लिए बेहद खास बन गया.
साल 2025 में सोने ने सुर्ख़ियाँ बटोरी, और पूरे वर्ष में 52 बार रिकॉर्ड उच्च स्तर छुए. साल की शुरुआत में सोने की कीमत लगभग 2,650 डॉलर प्रति औंस थी, मार्च में 3,000 डॉलर, सितंबर में 3,500 डॉलर, अक्टूबर में 4,000 डॉलर और दिसंबर तक 4,550 डॉलर से ऊपर पहुंच गई. भारत में रुपये की गिरावट के कारण सोने की कीमतें और भी बढ़ीं, जो लगभग 79,700 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं. यह सोने के 1979 के बाद सबसे मजबूत वार्षिक लाभ को दर्शाता है, जिसे अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की दर कटौती, केंद्रीय बैंक की भारी खरीद और निवेश प्रवाह ने समर्थित किया.
चांदी ने सोने से भी बेहतर प्रदर्शन किया, अपने छोटे और अधिक अस्थिर बाजार संरचना के कारण. साल की शुरुआत में चांदी की कीमत लगभग 29 डॉलर प्रति औंस थी, जो अक्टूबर तक 50 डॉलर से ऊपर पहुंच गई और दिसंबर में नए रिकॉर्ड उच्च स्तर तक चली गई. भारत में चांदी की कीमत लगभग 87,000 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 2,54,000 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई.
प्लेटिनम ने भी शानदार प्रदर्शन किया, अपने पिछले रिकॉर्ड 2,380 डॉलर प्रति औंस को पार कर 2,500 डॉलर के नए उच्चतम स्तर तक पहुंच गया. यह धातु लगातार तीसरे साल आपूर्ति घाटे और मजबूत ऑटोमोबाइल एवं निवेश मांग से समर्थित है.
तांबा, जिसे अक्सर आर्थिक स्वास्थ्य का सूचक माना जाता है, अमेरिकी, चीनी, लंदन और भारतीय बाजारों में रिकॉर्ड उच्च स्तर तक पहुंचा. इसके लाभ मुख्य रूप से टैरिफ चिंताओं, इलेक्ट्रिक वाहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर की मजबूत मांग, और चिली, पेरू और इंडोनेशिया जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में सीमित आपूर्ति वृद्धि के कारण हुए हैं. ये कारक 2026 में भी कीमतों को सहारा देने की उम्मीद रखते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि 2025 की यह धातुओं की रैली संरचनात्मक और मैक्रोइकॉनॉमिक कारणों जैसे नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती मांग, व्यापार टैरिफ, दुर्लभ पृथ्वी धातु आपूर्ति चिंता, वित्तीयकरण और चीन व अमेरिका की नीतिगत कार्रवाइयों से प्रेरित रही.
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