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Mark Zuckerberg ने लिया बड़ा फैसला, Meta प्लेटफॉर्म पर फैक्ट चेकिंग प्रोग्राम किया बंद

मेटा ने अपना 8 साल पुराना फैक्ट चेक प्रोग्राम बंद कर दिया. इस फैसले के पीछे मेटा ने एक्सपर्ट फैक्ट चेकर की कुछ कमियों को बताया हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने बड़ा ऐलान करते हुए अपनी कंटेट मॉडरेशन नीति में बड़ा बदलाव किया है. कंपनी ने कहा कि वह अमेरिका में थर्ड-पार्टी फैक्ट चेकिंग प्रोग्राम को बंद कर रही है. मेटा के फाउंडर और CEO मार्क जुकरबर्ग ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "हम फैक्ट-चेकर्स से पीछा छुड़वाने जा रहे हैं और उन्हें X (पूर्व में ट्विटर) की तरह कम्युनिटी नोट्स से बदल रहे हैं. इसकी शुरुआत अमेरिका से होगी."

कम्युनिटी नोट्स का क्या मतलब?

अभी तक फेसबुक थर्ड-पार्टी प्रोग्राम से फैक्ट-चेकिंग करती थी. जुकरबर्ग के इस ऐलान के बाद यह प्रोग्राम बंद हो जाएगा और इसकी जगह कम्युनिटी नोट्स आ जाएंगे. यह फीचर अभी एक्स पर मौजूद है. इसमें यूजर्स ही किसी गलत जानकारी की फैक्ट चेकिंग करते हैं. इसके बाद अगर कोई गलत जानकारी वाली पोस्ट करता है तो उसके नीचे उसका खंडन और पूरा संदर्भ आ जाता है.

फैक्ट-चेकिंग यूनिट क्यों बंद कर रही है कंपनी?

जुकरबर्ग ने कहा कि फैक्ट-चेकर्स राजनीतिक रुप से बहुत पक्षपाती रहे हैं, खासकर अमेरिका में और उन्होंने भरोसा जीतने की बजाय भरोसा खोया है. अपने ऐलान में जुकबर्ग ने फैक्ट-चेकिंग प्रोग्राम की कई उन शिकायतों के बारे में बात की, जिनके बारे में रिपब्लिकन और एक्स के मालिक एलन मस्क कई बार खुले तौर पर बोल चुके हैं. वो उन्हें सेंसरशिप के तौर पर देखते हैं. जुकरबर्ग ने यह भी कहा कि फेसबुक और इंस्टाग्राम अपनी कंटेट पॉलिसी को आसान करेगी और इमिग्रेशन और जेंडर आदि के मुद्दों पर लगी पाबंदी को खत्म करेगी.

ट्रंप के साथ सुलह की कोशिश में जुकरबर्ग

मेटा के ये फैसले जुकरबर्ग की ट्रंप के साथ सुलह की कोशिशों के तौर पर देखे जा रहे हैं. दरअसल, ट्रंप पिछले काफी समय से मेटा के मुखर आलोचक रहे हैं और उन्होंने कंपनी पर उदार नीतियों को सपोर्ट करने और कंजर्वेटिव्स के खिलाफ पक्षपाती रहने का आरोप लगाया है. इसे देखते हुए जुकरबर्ग ने हाल ही में ट्रंप के इनॉगरेशन फंड में डोनेशन दिया है. इसके अलावा उन्होंने ट्रंप के सहयोगियों को भी कंपनी में जगह दी है.
 


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