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Year Ender 2023: 2023 में इंश्‍योरेंस सेक्‍टर में हुए कई बदलावों ने बदल दी दिशा

देश में इंश्योरेंस इंडस्ट्री में किए गए बदलावों में से, हमने 'एनीव्हेयर कैशलेस' हेल्थ इंश्योरेंस रही. पूरा इकोसिस्टम जल्द ही 100% कैशलेस सेटलमेंट्स को जीवन में लाने के लिए मिलकर काम कर रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

तरुण माथुर 

रेगुलेटरी ट्रांसफोर्मेशन और इनोवेशन को अपनाते हुए, वर्ष 2023 इंश्योरेंस इंडस्ट्री के महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने से कम नहीं था. इंश्योरेंस इंडस्ट्री ने ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में ऱखते हुए इंश्योरेंस पॉलिसी में कई बदलाव किए है  जो ग्राहकों के लिए उत्पाद को बेहतर बनाने पर केंद्रित थे. नियामक प्राधिकरण पहले से ही ट्रिनिटी जैसी पहल के साथ इस क्षेत्र को इंश्योरेंस 2.0 की ओर ले जा रहा है. इस पहल से इंश्योरेंस और अधिक सुलभ बन रहा है साथ ही लोगों तक इसकी पहुंच भी बढ़ रही है।

सहज ग्राहक अनुभव प्रदान करने के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने से लेकर क्लेम सेटलमेंट में बदलाव तक, इस साल बीमा परिदृश्य को फिर से परिभाषित करने के लिए कई सफल प्रयास देखे गए. IRDAI का प्रेरक उद्देश्य प्रत्येक हितधारक को 2047 तक पूरी तरह से इंश्योर्ड भारत के मिशन में एकजुट करना है, जिसके प्रयास पहले से ही दिखाई दे रहे हैं.

आइए इनमें से कुछ असाधारण पहलों पर गौर करें जिन्होंने इस वर्ष इंडस्ट्री के उद्देश्य को परिभाषित किया.

ईओएम में संशोधन और आयोग का डिरेगुलेशन
IRDAI ने नियम बनाने के तरीकों में काफी बदलाव किया है अब IRDAI सख्त नियमों के बजाय सामान्य सिद्धांतों का पालन करते हैं. एक हालिया बदलाव यह है कि वे प्रबंधन के खर्चों (ईओएम) को कैसे संभालते हैं, जिससे इंश्योरेंस इंड्स्ट्री को अधिक स्वतंत्रता मिलती है. यह बदलाव इंड्स्ट्री को कई तरह से मदद करता है.
बीमा कंपनियां अब अपनी निश्चित लागत और कमीशन को संभालने का सबसे उपयुक्त तरीका चुन सकती हैं. जैसे-जैसे हितधारकों को अपने खर्चों के प्रबंधन पर बेहतर पकड़ मिलेगी और वितरण की लागत कम होगी, इससे बेहतर मूल्य निर्धारण संरचना तैयार होगी और अंततः अंतिम उपभोक्ता को लाभ होगा. यह भारत में लोगों की सुरक्षा में अंतर को दूर करने के लिए इंडस्ट्री के प्रयासों को एक साथ लाएगा.

अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क का एकीकरण
हालांकि, कुछ साल पहले पेश की गई एक और महत्वपूर्ण पहल जिसने इस साल लोकप्रियता हासिल की है वह है 'अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क', जिसमें RBI द्वारा रेगुलेटिड एक इकाई वित्तीय संस्थानों के बीच व्यक्तियों से सहमति डाटा साझा कर सकती है. यह पहल न केवल बढ़ी हुई सुरक्षा प्रदान करती है बल्कि अंतिम उपभोक्ता को लंबे समय के लिए सुविधा भी प्रदान करती है. यह फ्रेमवर्क किसी व्यक्ति की वित्तीय जानकारी को उनके मौजूदा वित्तीय संस्थान तक पहुंचने के लिए सहमति एकत्र करता है और इसे सुरक्षित तरीके से सेवा प्रदान करने वाले वित्तीय संस्थान को ट्रांसफर करता है.
इंश्योरटेक को इस कंसेंट बेस्ड फ्रेमवर्क को एकीकृत करने की मंजूरी मिलने से जानकारी साझा करना उतना ही आसान हो जाता है जितना कि यूपीआई से चीजों के लिए भुगतान करना आसान हो जाता है. जानकारी साझा करने का एक सुरक्षित और संरक्षित तरीका होना वास्तव में महत्वपूर्ण है, और RBI द्वारा रेगुलेटिड फ्रेमवर्क ऐसा करने में मदद करता है. यह पूरी प्रक्रिया को और भी अधिक सहज और परेशानी मुक्त बनाता है. डिजिटल डाटा तक सुरक्षित और बिना किसी परेशानी के पहुंच के साथ, अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क ने उपभोक्ता के लिए पॉलिसी जारी करने की प्रक्रिया को बहुत सरल और टैंपर प्रुफ बना दिया है. कम ड्रॉप-ऑफ रेट और तेजी से पॉलिसी जारी करने से भारत में टर्म इंश्योरेंस की पहुंच भी बढ़ेगी.

उपयोग और फाइल प्रक्रिया के साथ फास्टट्रैकिंग इनोवेशन

इस साल IRDAI ने लाइफ इंश्योरेंस इंडस्ट्री के लिए एक नियम में बदलाव किया है. उन्होंने इंश्योरेंस कंपनियों के लिए नए उत्पाद पेश करना आसान बना दिया. पहले, यह नियम केवल सामान्य इंश्योरेसं प्रोडक्ट्स के लिए था, लेकिन अब इसमें पर्सनल और ग्रुप लिंक्ड प्रोडक्ट शामिल है. इस बदलाव का मतलब है कि कंपनियां अब तेजी से और कम कागजी कार्रवाई के साथ नई बीमा योजनाएं बाजार में ला सकती हैं. यह एक अच्छी बात है क्योंकि यह नए और बेहतर इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के विकास को प्रोत्साहित करता है और इंश्योरेंस विकल्पों को अधिक व्यापक बनाता है.

व्यापक नीतियां, सरल शब्दांकन
वे दिन गए जब पॉलिसीधारकों को जो इंश्योरेंस पॉलिसियां वे खरीद रहे हैं या खरीदने पर विचार कर रहे हैं उन्हें समझने के लिए लंबे, जटिल दस्तावेजों को समझने की आवश्यकता होती थी. इस साल अक्टूबर में जारी हुई नई IRDAI की गाइडलाइन्स के अनुसार,  इंश्योरेंस कंपनियों को 1 जनवरी से एक संशोधित ग्राहक सूचना पत्र (CIS) जारी करना होगा.

यह शीट इंश्योरेंस पॉलिसी की डिटेल्स को सरल भाषा में 'स्नैपशॉट के रूप में' पेश करेगी. इसमें कवरेज की लिमिट, एक्सक्लूशन, मेंडेट्स, वेटिंग पीरियड आदि जैसे सरल शब्दों में मुख्य विवरण शामिल होंगे. साथ ही, इसमें माइग्रेशन, क्लेम फाइल करने की प्रक्रिया, पोर्टेबिलिटी या फ्री लुक कैंसिलेशन जैसी बेहतर अवधारणाओं का विवरण होगा.
इतना ही नहीं, सभी इंश्योरेंस कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पॉलिसीधारकों ने इस सूचना पत्र की समीक्षा की है और इस पर हस्ताक्षर किए हैं. इससे पहले, रेगुलरेटर ने मुश्किल इंश्योरेंस पॉलिसी शब्दों को सरल बनाने के तरीके खोजने के लिए 12 सदस्यीय समिति का भी गठन किया था.

अनिवार्य रूप से, इसका मतलब है सूचित पॉलिसीधारक होने से, इंश्योरेंस इंडस्ट्री में अधिक विश्वास पैदा होगा और ग्राहको को होने वाली परेशानियों की संख्या भी कम होगी, जिससे निश्चित रूप से, पॉलिसीधारकों को एक सहज अनुभव मिलेगा.

कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस - कभी भी, कहीं भी-
देश में इंश्योरेंस इंडस्ट्री में अब तक लाए गए सबसे नए बदलावों में से, हमने 'एनीव्हेयर कैशलेस' हेल्थ इंश्योरेंस का उद्भव देखा. पूरा हेल्थ इंश्योरेंस इकोसिस्टम जल्द ही 100% कैशलेस सेटलमेंट्स को जीवन में लाने के लिए मिलकर काम कर रहा है. जब पॉलिसीधारकों के सामने आने वाली क्लेम सेटलमेंट चुनौतियों की बात आती है तो यह संभावित रूप से सभी परेशानियों को दूर कर सकता है. अब वे देश के किसी भी अस्पताल में कैशलेस इलाज का लाभ उठा सकते हैं, भले ही वह अस्पताल उस इंश्योरेंस कंपनी के नेटवर्क अस्पताल श्रेणी में आता हो या नहीं.

अब किसी भी व्यक्ति को क्लेम राशि प्राप्त करने की मुश्किल कागजी कार्रवाई से नहीं गुजरना पड़ेगा. कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस सुविधा की वजह से अब पॉलिसीधारक को इस बात से घबराने की जरूरत नहीं है कि जिस अस्पताल में वह इलाज करा रहे है वह अस्पातल इंश्योरेसं कंपनी के नेटवर्क का हिस्सा है या नहीं. इंश्योरेंस इंडस्ट्री का यह बड़ा बदलाव ग्राहकों की अस्पताल बिल को लेकर होने वाली चिंता को दूर करने में मदद करेगा.

संकट के दौरान बचाव के लिए आसान और तुरंत क्लेम सेटलमेंट-
'एनीव्हेयर कैशलेस' क्लेम सुविधा क्लेम के अनुभव को बदलने वाली एकमात्र पहल नहीं है. कुछ असाधारण घटनाओं में, ऐसे उदाहरण भी हैं जहां पॉलिसीधारकों या उनके नामांकित व्यक्तियों द्वारा दायर किए जाने से पहले ही क्लेम पर कार्रवाई की गई है.

हाल ही में, IRDAI ने इंश्योरेंस कंपनियों से ओडिशा ट्रेन त्रासदी पीड़ितों के इंश्योरेंस क्लेम को 'स्वतः' निपटाने के लिए कहा. बीमाकर्ताओं को निर्देश दिया गया था कि अगर बीमाधारक की पहचान घायल/मृतक और उसी ट्रेन में यात्रा करने पर की जाती है तो क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया को सरल और तेज किया जाए. प्रभावित लोगों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए स्पेशल कैंप और हेल्पलाइन भी स्थापित की गईं थी.

यह सुविधा चक्रवात बिपरजॉय और हालिया चक्रवात मिचौंग से प्रभावित पॉलिसीधारकों के लिए भी की गई थी. बीमाकर्ताओं को कई राज्यों में चक्रवात से प्रभावित लोगों, घरों, इमारतों को हुए नुकसान का सर्वेक्षण और जांच के लिए अपने संसाधनों को तुरंत सक्रिय करके क्लेम का जल्दी निपटान करने के लिए कहा गया था.

यह कहना उचित है कि 2023 भारतीय इंश्योरेंस इंडस्ट्री के विकास के लिए एक उत्तम मंच तैयार करेगा. जिस प्रकार से इंडस्ट्री डिजिटलीकरण को अपनाकर और ग्राहक अनुभवों को बढ़ाने के लिए प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर रही है,  बदलाव और विकास के इस सफर में यह एक महत्वपूर्ण साल साबित हो सकता है.

नोट- इस लेख के लेखक तरूण माथुर, को-फाउंडर और सीबीओ-जनरल इंश्योरेंस, पॉलिसीबाजार डॉट कॉम हैं. 


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