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डिजिटल भुगतान प्रणाली में बड़ा बदलाव: RBI के BPSS की जगह लेगा नया ‘पेमेंट रेगुलेटरी बोर्ड’
पेमेंट सिस्टम में यह बदलाव भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
देश की भुगतान प्रणाली में एक बड़ा बदलाव लाते हुए केंद्र सरकार ने ‘पेमेंट रेगुलेटरी बोर्ड विनियमन, 2025’ को पेश किया है. इसके तहत अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधीन काम करने वाले भुगतान एवं निपटान प्रणाली विनियमन एवं पर्यवेक्षण बोर्ड (BPSS) को हटाकर एक नया स्वतंत्र निकाय पेमेंट रेगुलेटरी बोर्ड (PRB) बनाया जाएगा.
आरबीआई गवर्नर होंगे PRB के चेयरमैन
नई व्यवस्था के तहत PRB का नेतृत्व भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर करेंगे. यह बोर्ड पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 3 के अंतर्गत गठित किया जाएगा. बोर्ड में कुल छह सदस्य होंग, जिनमें से तीन केंद्र सरकार द्वारा नामित किए जाएंगे, जबकि शेष तीन में RBI के डिप्टी गवर्नर (जो भुगतान प्रणाली के प्रभारी होंगे), केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित एक RBI अधिकारी और गवर्नर स्वयं शामिल होंगे.
तकनीकी और कानूनी विशेषज्ञों को भी मिलेगा आमंत्रण
बोर्ड की बैठकों में सूचना प्रौद्योगिकी, कानून और भुगतान प्रणालियों के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जा सकेगा. इसके अलावा, आरबीआई के प्रधान कानूनी सलाहकार को बोर्ड की बैठकों में स्थायी आमंत्रित विशेषज्ञ के रूप में शामिल किया जाएगा.
बढ़ेगा सरकारी प्रतिनिधित्व
BPSS, आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की एक समिति के रूप में कार्य कर रहा था. लेकिन PRB के गठन से सरकारी प्रतिनिधित्व और नियंत्रण में बढ़ोतरी देखी जाएगी. एक उद्योग अधिकारी के अनुसार, “नए बोर्ड में सरकार और RBI की बराबर भागीदारी होगी, लेकिन अंतिम निर्णय का अधिकार गवर्नर के पास रहेगा.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे सरकारी दखल बढ़ सकता है और अब यह देखना होगा कि सरकार किस तरह के सदस्य नामित करती है, सिविल सर्विस से या स्वतंत्र विशेषज्ञों में से.
सदस्यता की शर्तें
राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, PRB के लिए नामित किसी भी सदस्य की अधिकतम आयु 70 वर्ष से अधिक नहीं हो सकती और वह व्यक्ति संसद या किसी राज्य विधानसभा का सदस्य नहीं होना चाहिए.
यह बदलाव देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को अधिक पारदर्शी, संगठित और प्रभावशाली बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. हालांकि, इसका दीर्घकालिक प्रभाव उद्योग और आम जनता दोनों पर कैसा पड़ेगा, यह आने वाला समय बताएगा.
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