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SEBI कानूनों में बड़ा बदलाव: लोकसभा में पेश हुआ सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल 2025
SMC बिल 2025 के लागू होने से शेयर बाजार के नियम सरल, पारदर्शी और सिद्धांत-आधारित होंगे. पुराने कानूनों का एकीकरण, SEBI की प्रक्रिया में स्पष्टता और निवेशकों के संरक्षण के उपाय इसे भारतीय पूंजी बाजार में दशकों का सबसे बड़ा सुधार बनाते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
लोकसभा में गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड (SMC) बिल 2025 पेश किया. यह बिल शेयर बाजार से जुड़े नियमों में दशकों बाद सबसे बड़ा सुधार लाने वाला है. बिल का उद्देश्य तीन पुराने कानूनों को खत्म करके एक नया एकीकृत कानून बनाना है, जिससे नियमों को सरल, स्पष्ट और सिद्धांत-आधारित बनाया जा सके.
पुराने कानूनों का समापन और नया कोड
SMC बिल 2025 से सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1956, SEBI एक्ट, 1992 और डिपॉजिटरीज एक्ट, 1996 को खत्म कर एक नया एकीकृत कानून लागू किया जाएगा. इसका मकसद बाजार नियमों में अनावश्यक जटिलताओं और दोहराव को हटाना और कंप्लायंस का बोझ कम करना है.
SEBI की जांच और कार्रवाई में स्पष्ट अलगाव
बिल में SEBI की जांच और कार्रवाई के बीच स्पष्ट दूरी तय की गई है. अब जांच-पड़ताल और शो-कॉज नोटिस या निर्णय लेने की प्रक्रिया अलग होगी. इसके अलावा, जांच और अंतरिम आदेशों के लिए समय सीमा भी निर्धारित की गई है, जिससे नियामक प्रक्रिया में निश्चितता बढ़ेगी.
SEBI बोर्ड और बाजार संस्थाओं में सुधार
बिल के अनुसार SEBI बोर्ड के सदस्य बढ़ाकर 15 तक किए जा सकते हैं, और सदस्यों को किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हित का खुलासा करना अनिवार्य होगा. साथ ही, स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन और डिपॉजिटरीज को आधिकारिक मान्यता और अपने बाय-लॉज बनाने का अधिकार मिलेगा, जिससे पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित होंगे.
सख्ती और सिविल जुर्माने का संतुलन
कुछ उल्लंघनों को अब अपराध की श्रेणी से हटा कर सिविल जुर्माना लगाया जाएगा, खासकर प्रक्रियात्मक या तकनीकी मामलों में. गंभीर और बाजार में गड़बड़ी वाले मामलों में सख्ती बरती जाएगी, जिन पर सिविल और आपराधिक कार्रवाई दोनों हो सकती हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार नए कोड में समय सीमा निश्चित करना ढांचे को बेहतर बनाता है, लेकिन लंबी अनिश्चितता की संभावना बनी रहेगी. स्वतंत्र वकील व्यापक देसाई ने कहा कि जुर्माने और नियमों में व्यापक और विवेकाधीन अधिकार हैं, जो अलग-अलग व्याख्या की गुंजाइश छोड़ते हैं. वित्त मंत्री ने कहा कि बिल को संसद की वित्तीय स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा, जो अपनी रिपोर्ट अगले सत्र के पहले दिन प्रस्तुत करेगी. विपक्षी नेताओं ने कुछ चिंताएं जताईं, लेकिन सीतारमण ने बताया कि विधायी अधिकार और नियामक हस्तक्षेप पर विस्तार से चर्चा समिति में होगी.
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