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रॉकेट में जल्द लगेंगे ‘मेड इन भारत’ चिप्स, अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी
स्काईरूट के विक्रम-1 मिशन की सफलता के बाद स्वदेशी सेमीकंडक्टर इंटीग्रेशन पर बढ़ा फोकस, भारत के निजी स्पेस सेक्टर को मिलेगी नई रफ्तार
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत जल्द ही अपने अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों (Space Launch Vehicles) में देश में बने सेमीकंडक्टर चिप्स का इस्तेमाल करेगा. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को निजी स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के प्रमुखों से मुलाकात के बाद इसकी जानकारी दी.
वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “‘मेड इन भारत’ चिप्स हमारे रॉकेट्स के लिए... जल्द ही!” यह घोषणा स्काईरूट के विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 की सफलता के बाद आई है, जिसने 18 जुलाई को सफलतापूर्वक कक्षा (Orbit) में प्रवेश किया था. यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट मिशन था.
भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा
अश्विनी वैष्णव की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस ने कहा कि भारत का डीप-टेक इकोसिस्टम तेजी से आगे बढ़ रहा है. कंपनी ने इसके लिए सरकार के सुधारों, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और इनोवेशन के प्रति प्रतिबद्धता को अहम बताया.
स्काईरूट ने कहा, "भारत से वैश्विक स्तर की स्पेस टेक्नोलॉजी तैयार करने में योगदान देना हमारे लिए गर्व की बात है. हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब भारत में बने चिप्स हमारे रॉकेट्स में उड़ान भरेंगे."
पीएम मोदी ने भी की स्काईरूट के संस्थापकों से मुलाकात
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापकों पवन चंदना और नागा भरत डाका से मुलाकात की थी. इस दौरान विक्रम-1 मिशन की सफलता और भारत के निजी स्पेस सेक्टर के भविष्य पर चर्चा हुई.
प्रधानमंत्री मोदी ने X पर पोस्ट कर इस मुलाकात को "बेहतरीन बातचीत" बताया. उन्होंने कहा कि विक्रम-1 की सफलता चर्चा का प्रमुख विषय रही. उन्होंने स्काईरूट के संस्थापकों की यात्रा और अंतरिक्ष क्षेत्र के भविष्य को लेकर उनके विचारों का भी जिक्र किया. मोदी ने कहा, "उनकी ऊर्जा, महत्वाकांक्षा और सकारात्मक सोच भारत के निजी स्पेस इकोसिस्टम की जीवंतता को दर्शाती है. स्काईरूट की पूरी टीम को शुभकामनाएं."
विक्रम-1 ने रचा नया इतिहास
स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 मिशन 18 जुलाई को सफल रहा था. यह भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट की पहली उड़ान थी. मिशन के दौरान रॉकेट ने अपना अंतिम बर्न पूरा किया और पेलोड को करीब 450 किलोमीटर की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया.
इस सफलता के साथ भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास निजी कंपनियों द्वारा विकसित ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता मौजूद है. विक्रम-1 मिशन को भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका
सरकार की अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने की नीति के बाद स्काईरूट जैसी कंपनियां भारत के स्पेस इकोसिस्टम में अहम भूमिका निभा रही हैं. स्वदेशी चिप निर्माण और रॉकेट टेक्नोलॉजी के एकीकरण से भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
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