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LTFH ने इस इंटरनेशनल कंपनी के साथ किया समझौता, इतने मिलियन का मिलेगा लोन 

भारत की लगभग 90 फीसदी गरीब आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है, जहां इनकम ग्रोथ रेट में और गिरावट आई है. खासकर कोविड-19 के बाद, जिससे गरीबी एक गंभीर मसला बन गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

देश की लीडिंग नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों में शामिल, एलएंडटी फाइनेंस होल्डिंग्स लिमिटेड (एलटीएफएच) ने भारत में ग्रामीण और छोटे शहरी क्षेत्रों में, खासतौर से महिला कर्जदारों को फाइनेंसिंग (वित्तपोषण) का फायदा देने के लिए जेआईसीए (जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी) के साथ 125 मिलियन अमेरिकी डॉलर के फाइनेंसिंग पैक्ट (वित्तपोषण समझौते) पर हस्ताक्षर किए हैं. 

40 फीसदी महिलाओं को मिलेगा लाभ 
पिछले साल नवंबर में, एलटीएफएच ने एशियाई विकास बैंक (एडीबी) से 125 मिलियन अमेरिकी डॉलर का लोन लिया था, और को-फाइनेंसिंग समझौते के हिस्से के रूप में, अतिरिक्त 125 मिलियन अमेरिकी डॉलर का लोन अब जेआईसीए से लिया है. इससे होने वाली आय का कम से कम 40 फीसदी महिला उधारकर्ताओं के लिए आवंटित किया जाएगा, जबकि बाकी किसानों और एमएसएमई के समर्थन के लिए आवंटित किया जाएगा. साथ ही इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों सहित नए दोपहिया वाहन खरीदने के लिए लोन आवंटित किया जाएगा.

क्‍या बोले एलटीएफएच के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर
एमओयू पर साइन करने के बाद एलटीएफएच के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर, सचिन जोशी ने कहा कि, ‘जेआईसीए के साथ हमारा सहयोग स्थिरता और सकारात्मक व्यावसायिक प्रभाव को बढ़ावा देने की हमारी प्रतिबद्धता के साथ से मेल खाता है. हम इस साझेदारी को फाइनेंशियल गैप (वित्तीय अंतर) को भरने और स्थिरता केंद्रित लोन (सस्टेनेबिलिटी फोकस्ड लोन) के माध्यम से देश भर में ऐसे आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखते हैं, जिसमें हर वर्ग को समान अवसर मिले. ये लॉन्‍ग टर्म लोन हमें कंपनी के लिए फंडिंग सोर्स में विविधता लाने की हमारी चल रही रणनीति को आगे बढ़ाने में भी मदद करता है. 

क्‍या बोले एलटीएफएच में कंपनी सेक्रेटरी? 
एलटीएफएच में कंपनी सेक्रेटरी एंड चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर, अपूर्वा राठौड़ ने कहा, ‘स्थिर ग्रामीण आर्थिक विकास के बावजूद, वित्तीय सेवाओं तक पहुंच ग्रामीण समुदायों के लिए एक चुनौती बनी हुई है. सीमांत किसानों के एक बड़ी आबादी के पास लोन तक औपचारिक पहुंच का अभाव है, महिलाओं पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. हम जिन समुदायों की सेवा करते हैं, उन उन सभी तक फाइनेंशियल प्रोडक्ट की पहुंच के गहरे प्रभाव को समझते हैं. इसलिए, विशेष रूप से वंचित क्षेत्रों और पिछड़े राज्यों में अपनी लोन गतिविधियों के माध्यम से, हमारा लक्ष्य व्यक्तियों, विशेष रूप से महिलाओं, किसानों और एमएसएमई को सशक्त बनाना है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा हो.

JICE ने कही ये बात 
जेआईसीए ने अपने कहा कि, ‘ग्रामीण भारत, देश की लगभग 65 फीसदी आबादी का घर है और राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 46 फीसदी हिस्सा बनाए रखते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है. भारत की लगभग 90 फीसदी गरीब आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है, जहां इनकम ग्रोथ रेट में और गिरावट आई है. खासकर कोविड-19 के बाद, जिससे गरीबी एक गंभीर मसला बन गई है. जेआईसीए में हमारा मानना है कि यह सहयोग एलटीएफएच के पूरे देश में ब्रॉन्‍च ऑफिस नेटवर्क की ताकत का लाभ उठाकर ग्रामीण असमानताओं को दूर करने और देश के आर्थिक विकास को बनाए रखने में मदद करेगा. पिछड़े राज्यों में एलटीएफएच लोन गतिविधियां सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (एसडीजी) लक्ष्य 1 (गरीबी नहीं), लक्ष्य 5 (लिंग समानता), लक्ष्य 8 (अच्‍छे काम और आर्थिक विकास) और लक्ष्य 17 (लक्ष्य के लिए साझेदारी) में योगदान देंगी.

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