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एलपीजी संकट ने फूड डिलीवरी को किया प्रभावित, गिग वर्कर्स की आमदनी घटी

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एलपीजी सप्लाई की स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर लाखों गिग वर्कर्स की आजीविका पर पड़ सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत के फूड डिलीवरी सेक्टर पर भी दिखाई देने लगा है. कमर्शियल एलपीजी (LPG) की सप्लाई में आई बाधाओं के कारण कई रेस्तरां और किचन प्रभावित हो रहे हैं, जिससे फूड डिलीवरी ऑर्डर में तेज गिरावट देखी जा रही है. गिग वर्कर्स यूनियन ने गुरुवार को चेतावनी दी कि इस स्थिति के कारण डिलीवरी पार्टनर्स की आमदनी पर गंभीर असर पड़ रहा है.

एलपीजी की कमी से रेस्तरां और किचन प्रभावित

गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) के अनुसार, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी के कारण कई रेस्तरां, ढाबे, क्लाउड किचन, कैटरिंग सेवाएं और स्ट्रीट फूड विक्रेता या तो अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं या फिर उन्हें अपने संचालन को कम करना पड़ा है.

इसका सीधा असर फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर पड़ रहा है. यूनियन का कहना है कि जब रेस्तरां में खाना बनना कम हो रहा है तो स्वाभाविक रूप से डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर ऑर्डर की संख्या भी घट रही है.

ऑर्डर में गिरावट, डिलीवरी वर्कर्स की आय प्रभावित

यूनियन के मुताबिक प्रमुख फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर ऑर्डर में करीब 50–60 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है. इससे डिलीवरी पार्टनर्स को पहले की तुलना में काफी कम ऑर्डर मिल रहे हैं और उनकी दैनिक कमाई घट रही है. GIPSWU के प्रवक्ता निर्मल गोराना ने कहा कि इस स्थिति से देशभर में लगभग एक करोड़ श्रमिक प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें बड़ी संख्या गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की है. उन्होंने कहा, “हमारे कई सदस्य बेहद मुश्किल हालात में हैं. सैकड़ों लोग हमसे संपर्क कर चुके हैं—कुछ परिवारों को खाना तक छोड़ना पड़ रहा है और बच्चों को भूखा रहना पड़ रहा है.”

दिल्ली के एक डिलीवरी वर्कर का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि पहले जहां वह रोज करीब 30 डिलीवरी करता था, वहीं अब यह संख्या घटकर 5–10 रह गई है. इसके साथ ही प्लेटफॉर्म कंपनियों की ओर से आईडी डिएक्टिवेट करने की चेतावनी भी दी जा रही है.

सामाजिक सुरक्षा के अभाव में बढ़ी परेशानी

यूनियन का कहना है कि गिग वर्कर्स को न तो तय वेतन मिलता है और न ही सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं उपलब्ध हैं. ऐसे में किसी भी तरह की सप्लाई बाधा या आर्थिक झटका उनके लिए तुरंत आय संकट का कारण बन जाता है. कुछ शहरों जैसे पुणे, मुंबई और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी फूड डिलीवरी सेवाओं से जुड़े रेस्तरां प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं.

सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

GIPSWU ने इस मुद्दे पर केंद्रीय श्रम मंत्री को पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है. यूनियन ने सरकार से प्लेटफॉर्म कंपनियों और तेल कंपनियों के साथ आपात बैठक बुलाने की अपील भी की है.

यूनियन की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं.

1. देशभर के फूड बिजनेस के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित की जाए.
2. फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स से प्रभावित वर्कर्स को तुरंत 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए.
3. डिलीवरी पार्टनर्स की आईडी डिएक्टिवेशन पर तीन महीने की रोक लगाई जाए.
4. डिलीवरी वर्कर्स के लिए न्यूनतम दैनिक इंसेंटिव तय किया जाए.
5. गिग वर्कर्स को कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के तहत पूरी तरह शामिल किया जाए.

राइड-हेलिंग ड्राइवर भी हो सकते हैं प्रभावित

इस बीच तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स ने भी चेतावनी दी है कि अगर ईंधन की सप्लाई में बाधा जारी रहती है तो ऐप-बेस्ड टैक्सी सेवाओं से जुड़े हजारों ड्राइवर भी प्रभावित हो सकते हैं.

Ola, Uber और Rapido जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले कई ड्राइवर एलपीजी और सीएनजी वाहनों पर निर्भर हैं. यूनियनों के अनुसार, अगर सप्लाई बाधित हुई तो पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग सकती हैं, जिससे ट्रिप्स कम होंगी और ड्राइवरों की आय पर तुरंत असर पड़ेगा.

गिग इकोनॉमी पर मंडरा रहा व्यापक संकट

यूनियनों का कहना है कि गिग और प्लेटफॉर्म आधारित अर्थव्यवस्था ईंधन की उपलब्धता पर काफी निर्भर है. इसलिए अल्पकालिक कमी भी कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है, जिनमें राइड-हेलिंग सेवाएं, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म, कूरियर सेवाएं और छोटे रेस्तरां शामिल हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एलपीजी सप्लाई की स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर लाखों गिग वर्कर्स की आजीविका पर पड़ सकता है.


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