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परिवर्तन केवल एक थीम न रहे, इसे एक वैश्विक आंदोलन बनने दें : भूपेंद्र यादव

टेरी के 25वें विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन का शुभारंभ, ‘हिम-कनेक्ट’ और WSDS आर्काइवल पॉकेटबुक का विमोचन

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) के वार्षिक प्रमुख मंच, विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (WSDS) का उद्घाटन किया. 
यह आयोजन जलवायु और विकास से जुड़े परिवर्तनकारी कार्यों के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए दुनिया भर के नेताओं, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों, शोधकर्ताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को एक साथ लाता है.

इस मौके पर भूपेंद्र यादव ने कहा समानता, लचीलापन और सतत विकास पर भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया. उन्होंने जोर दिया कि WSDS अब एक ऐसा मंच बन चुका है जो सरकारों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों और समुदायों को एक साथ लाकर 'स्थिरता के विज्ञान' को धरातल पर व्यावहारिक कार्रवाई में बदलने का कार्य करता है.  

यादव ने कहा, “आज का दिन केवल एक विरासत का उत्सव नहीं है, बल्कि यह मानवता और इस ग्रह के लिए निर्णायक क्षण है. इस शिखर सम्मेलन की मुख्य थीम  ट्रांसफॉर्मेशन्स: विजन, वॉयस और वैल्यूज फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट एक रणनीतिक जरूरत है. लेकिन नेतृत्व के लिए धैर्य और दृष्टि दोनों आवश्यक हैं. सम्मेलन में रेखांकित 'परिवर्तन का सिद्धांत'  कंस्ट्रक्टिविज्म, लर्निंग और ट्रांसफॉर्मेशन हमें याद दिलाता है कि मानक और नियम संवाद के माध्यम से विकसित होते हैं. उन्होंने कहा “अगले 25 वर्ष केवल क्रियान्वयन के होने चाहिए. हमें प्रतिज्ञाओं से प्रदर्शन की ओर, लक्ष्यों से प्रगति-पथ की ओर और महत्वाकांक्षा से जवाबदेही की ओर बढ़ना होगा. यह सम्मेलन उस आयोजन के रूप में याद किया जाए जहाँ विजन व्यावहारिक बने, आवाजें समावेशी हुईं और मूल्य संस्थागत बने. परिवर्तन केवल एक विषय नहीं, बल्कि एक वैश्विक आंदोलन बन जाए.”

शिखर सम्मेलन की थीम और महत्व

परिवर्तन | ट्रांसफॉर्मेशन्स: सतत विकास के लिए दृष्टि, स्वर और मूल्य” की थीम के अंतर्गत आयोजित इस 25वें WSDS संस्करण को शिखर सम्मेलन की विरासत में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है. यह सम्मेलन ग्लोबल साउथ में आधारित सतत विकास पर स्वतंत्र रूप से आयोजित होने वाला दुनिया का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय मंच है.

टेरी के अध्यक्ष, नितिन देसाई ने स्वागत संबोधन में कहा कि आज की दुनिया में चुनौती जागरूकता की नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई की है. उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन अब सिर्फ चर्चा का मंच नहीं, बल्कि स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए क्रियान्वयन की दिशा में विचारों को जोड़ने वाला मंच बन चुका है.

टेरी की महानिदेशक, डॉ. विभा धवन ने अपने थीम संबोधन में कहा कि WSDS वैश्विक दक्षिण के लिए जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर विमर्श को दिशा देने वाला एकमात्र स्वतंत्र मंच बन गया है. उन्होंने कहा कि अब हमें सिर्फ चर्चाओं तक सीमित नहीं रहकर भारत और वैश्विक स्तर पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है.

प्रधानमंत्री का संदेश

सत्र के दौरान, डॉ. धवन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश पढ़कर सुनाया. प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘अंत्योदय’ के दृष्टिकोण से जलवायु कार्रवाई का केंद्र सबसे कमजोर और वंचित वर्ग होना चाहिए. उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को पृथ्वी की सुरक्षा के साथ गरीबी और भूख का उन्मूलन करना होगा और विकसित देशों की जिम्मेदारी है कि वे तकनीक और वित्त उपलब्ध कराएं. प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन सहयोग को मजबूत करेगा और हमारे ग्रह के लिए सतत भविष्य सुनिश्चित करेगा.

हिम-कनेक्ट और आर्काइवल पॉकेटबुक

उद्घाटन दिवस का एक मुख्य आकर्षण 'हिम-कनेक्ट' का शुभारंभ था. यह पहल 'हिमालय से और हिमालय के लिए' केंद्रित है और राष्ट्रीय हिमालय अध्ययन मिशन के तहत विकसित तकनीकों को स्टार्टअप्स, उद्यमियों और निवेशकों से जोड़ती है. इसका उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र में सतत विकास, हरित आजीविका और नवाचार-आधारित विकास को गति देना है.

टेरी ने WSDS के रजत जयंती अवसर पर आर्काइवल प्रकाशन का विमोचन किया, जिसका शीर्षक है: “विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (2001–2026): सतत विकास पर महत्वाकांक्षा और कार्रवाई को आगे बढ़ाने के 25 संस्करण – एक आर्काइवल पॉकेटबुक.” यह पुस्तक WSDS के 25 वर्षों के वैश्विक संवाद, नेतृत्व और साझेदारियों का दस्तावेजीकरण करती है.

डॉ. शैली केडिया, क्यूरेटर, WSDS ने कहा, “यह आर्काइवल पुस्तक 25 संस्करणों की सामूहिक यात्रा का दस्तावेज है. यह दर्शाती है कि सम्मेलन कैसे 'एजेंडा तय करने' से लेकर 'समाधान-उन्मुख जुड़ाव' की ओर विकसित हुआ और वैश्विक स्थिरता पर विचारों को नया आकार दिया.”

केंद्रित विषयगत चर्चाएं

दिन की शुरुआत में, WSDS 2026 के अंतर्गत गहन विषयगत सत्र आयोजित किए गए. इनमें भारत और ग्लोबल साउथ की प्रमुख प्राथमिकताओं जैसे जलवायु वित्त, स्वच्छ ऊर्जा, प्रदूषण नियंत्रण, संसाधन सुरक्षा और वैश्विक शासन पर चर्चा हुई. इन सुझावों को अगले दो दिनों में होने वाले मुख्य पूर्ण सत्रों में शामिल किया जाएगा, जिससे अमल में लाई जा सकने वाली साझेदारियों और नीतिगत सिफारिशों को बल मिलेगा.

 


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