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शिकागो विश्वविद्यालय का एलुमनाई अवॉर्ड पाने वाले पहले भारतीय अर्थशास्त्री बने के.वी. सुब्रमण्यन
शिकागो विश्वविद्यालय की ओर से जारी आधिकारिक प्रशस्ति-पत्र में प्रो. सुब्रमण्यन के नेतृत्व में तैयार भारतीय आर्थिक सर्वेक्षणों को “ऐतिहासिक” दस्तावेज बताया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पूर्व कार्यकारी निदेशक प्रो. कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यन को शिकागो विश्वविद्यालय ने व्यावसायिक उपलब्धि के लिए अपने प्रतिष्ठित एलुमनाई पुरस्कार से सम्मानित किया है. वर्ष 1941 में शुरू हुए इस सम्मान के 85 वर्षों के इतिहास में यह उपलब्धि हासिल करने वाले वे पहले भारतीय अर्थशास्त्री बन गए हैं.
वैश्विक विचारकों की प्रतिष्ठित सूची में शामिल
इस पुरस्कार के साथ प्रो. सुब्रमण्यन उन चुनिंदा पूर्व विजेताओं की श्रेणी में शामिल हो गए हैं, जिनमें अर्थशास्त्र, विज्ञान और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र के कई वैश्विक विचारक और कम से कम 14 नोबेल पुरस्कार विजेता शामिल हैं. इनमें पॉल सैमुएलसन, गैरी बेकर, क्लॉडिया गोल्डिन, कार्ल सागन और फिलिप कोटलर जैसे नाम प्रमुख हैं.
आर्थिक नीतियों में योगदान को मिली वैश्विक मान्यता
शिकागो विश्वविद्यालय की ओर से जारी आधिकारिक प्रशस्ति-पत्र में प्रो. सुब्रमण्यन के नेतृत्व में तैयार भारतीय आर्थिक सर्वेक्षणों को “ऐतिहासिक” दस्तावेज बताया गया है. विश्वविद्यालय के अनुसार इन सर्वेक्षणों ने प्रतिस्पर्धी बाजार, नीतिगत स्वायत्तता और समावेशी विकास पर आधारित भारत के आत्मनिर्भरता दृष्टिकोण की बौद्धिक नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
प्रशस्ति-पत्र में कोविड-19 संकट के दौरान उनके विश्लेषण का भी उल्लेख किया गया है. इसमें कहा गया कि महामारी को आपूर्ति-पक्ष के व्यवधान के रूप में पहचानने और भारत की V-आकार की आर्थिक रिकवरी को लेकर उनके सार्वजनिक विश्लेषण ने देश की आर्थिक मजबूती पर भरोसा बढ़ाने में मदद की.
चुनौतीपूर्ण दौर में नीति निर्माण में अहम भूमिका
मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान प्रो. सुब्रमण्यन ने तीन आर्थिक सर्वेक्षणों का नेतृत्व किया. यह वह दौर था जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिरता के दौर से गुजर रही थी. इस दौरान उन्होंने भारत की समष्टि आर्थिक रणनीति को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में कार्यकारी निदेशक के रूप में उनकी भूमिका ने वैश्विक आर्थिक विमर्श में भारत के दृष्टिकोण को मजबूत किया. उस समय वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव, उभरती अर्थव्यवस्थाओं में ऋण संकट और वैश्वीकरण की नई संरचनाओं पर व्यापक चर्चा चल रही थी.
भारतीय आर्थिक सोच की वैश्विक पहचान
विशेषज्ञों के अनुसार यह सम्मान भारत जैसी बड़ी उभरती अर्थव्यवस्था से निकलने वाले नीतिगत नवाचारों की बढ़ती वैश्विक प्रासंगिकता को भी दर्शाता है. हाल के वर्षों में भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा है, जहां संरचनात्मक सुधार, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और आपूर्ति-श्रृंखला विविधीकरण जैसे कदम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
तीनों मातृ संस्थानों से मिला विशिष्ट सम्मान
प्रो. सुब्रमण्यन को अब अपने तीनों प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों से विशिष्ट पूर्व छात्र सम्मान मिल चुका है. इनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर, भारतीय प्रबंधन संस्थान कलकत्ता और शिकागो विश्वविद्यालय शामिल हैं. वर्तमान में वे इंडियन स्कूल ऑफ बिज़नेस में वित्त के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं.
इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रो. सुब्रमण्यन ने कहा कि इस प्रतिष्ठित शैक्षणिक परंपरा का हिस्सा बनना उनके लिए अत्यंत विनम्रता का अनुभव है. उनके अनुसार यह सम्मान विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत से और भारत के लिए किए गए कार्य की पहचान है. उन्होंने कहा कि भारत में रहकर उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानिकों और विचारकों जैसे सी.वी. रामन, होमी जे. भाभा, विक्रम साराभाई और एम.एस. स्वामीनाथन के पदचिह्नों पर चलना उनके लिए सौभाग्य की बात है.
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