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Budget 2023: वित्त मंत्री ने बजट में जिस 'श्री अन्न' का किया जिक्र, जानें क्या है वो

'भारत के परंपरागत समाज में मोटे अनाज पहले से ही खानपान में शामिल हैं, लेकिन इनका उत्पादन बढ़ाकर इसे दुनियाभर में निर्यात करने की योजना है'.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बजट पेश किया. बजट पेश करने के दौरान वित्त मंत्री ने 'श्री अन्न' का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि श्री अन्न को बढ़ावा देने के लिए एक योजना शुरू की जाएगी. इसके बाद से श्री अन्न पर चर्चा शुरू हो गई है. दरअसल, मोटे अनाज (मिलेट्स) को श्री अन्न नाम दिया गया है. इसे देवान्न भी कहा जाता है. बता दें कि श्री अन्न को अनाज में सर्वश्रेष्ठ और सेहत के लिए लाभदायक माना जाता है.

ये है योजना का मकसद
निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा कि बाजरा, कोदो, सामा, कुटकी, रागी और रामदाना जैसे मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार 'श्री अन्न' योजना शुरू कर रही है. उन्होंने कहा कि भारत के परंपरागत समाज में मोटे अनाज पहले से ही खानपान में शामिल हैं, लेकिन इनका उत्पादन बढ़ाकर इसे दुनियाभर में निर्यात करने की योजना है. वित्त मंत्री ने आगे कहा, 'हम अच्छा स्वास्थ्य देने वाले इन भोज्य पदार्थ की मदद से दुनिया को भारत की परंपरा से अवगत करा सकते हैं'.

अब मिल रहा अच्छा दाम
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि किसानों को प्रोत्साहित कर उनकी मदद के लिए राष्ट्रीय मिलेट्स संस्थान का गठन किया जाएगा. कृषि क्षेत्र के लिए स्टोरेज क्षमता भी बढ़ाई जाएगी, जिससे किसान अपनी कृषि उपज को संभालकर रख सकें. गौरतलब है कि कोरोना संकट में मोटे अनाजों से मिलने वाली ताकत की खूब चर्चा हुई थी, इसके बाद श्री अन्न के प्रयोग में वृद्धि हुई है. एक रिपोर्ट बताती है कि छत्तीसगढ़ मिलेट मिशन के चलते राज्य में कोदो, कुटकी और रागी की खेती को लेकर किसानों का रुझान बदला है. पहले उनके उपज का सही भाव नहीं मिल पाता था, लेकिन अब यह अच्छे दाम में बिकने लगा है.

श्री अन्न ही क्यों?
मोटे अनाज का नाम श्री अन्न ही क्यों रखा गया, इसकी भी एक वजह है. दरअसल, सरकार इस साल अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष मना रही है. चूंकि इसे भारतीय संस्कृति और परंपरा से जोड़ते हुए नई पहल की शुरुआत की गई है. अनाज को संस्कृत में अन्नम और हिन्दी में अन्न कहा जाता है. जबकि श्री शब्द का प्रयोग किसी शुभ शुरुआत या वस्तु के लिए किया जाता है. इसलिए इस पहल को 'श्री अन्न' नाम दिया गया है. इसके जरिए सरकार मोटे अनाज को बढ़ावा देगी.  


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