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जानिए कैसे ये स्कीम अगले 4 सालों में दे सकती है 2 लाख नौकरी और 4 ट्रिलियन का निवेश
सरकार की ये स्कीम 2021 से चल रही है. इस स्कीम में जहां अब तक 1.03 ट्रिलियन का आवंटन किया जा रहा है वहीं 6 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार दिया जा चुका है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
भारत सरकार की पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव) स्कीम को अब तक बेहतर रिस्पांस देखने को मिला है. कई नए सेक्टरों को सरकार इस योजना में इंसेटिव देकर देश में रोजगार पैदा करने की कोशिश तो कर रही है लेकिन अब आईसीआरए ने इसी पीएलआई स्कीम को लेकर अहम बात कही है. ICRA का कहना है कि सरकार इस स्कीम से अगले 4 सालों में 3 से 4 ट्रिलियन निवेश जुटाने के साथ 200000 लाख लोगों के लिए रोजगार जुटा सकती है. सरकार जिन सेक्टरों में इस स्कीम को लाने पर विचार कर रही है उनमें सेमीकंडक्टर, सोलर और फॉर्मा जैसे सेक्टर शामिल हैं.
क्या बोले आईसीआरए के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट
ICRA के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट और चीफ रेटिंग ऑफिसर के रवीचंद्रन ने इस मौके पर कहा कि जिन सेक्टरों के कैपेक्स में इजाफे की उम्मीद है उनमें तेल, गैस, धातु खनन, अस्पताल, स्वास्थ्य सेवा और सीमेंट क्षेत्रों में निजी क्षेत्र शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में ज्यादा पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी की उम्मीद है. एजेंसी का कहना है कि कैपेक्स को इस लेवल पर ले जाने के लिए जरूरी है कि सरकार को टैक्स में कुछ छूट देकर लोगों के हाथ में कैश देना होगा. उन्होंने कहा कि पीएलआई स्कीम के तहत हमें लगता है कि अलगे 4 सालों में 4 से 5 ट्रिलियन तक का निवेश आ सकता है.
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14 सेक्टर में आई थी पीएलआई स्कीम
प्रोडक्शन लिंक स्कीम 2021 में 14 सेक्टरों में आई थी. इनमें टेलीकम्यूनिकेशन, व्हाइट गुड्स, टेक्सटाइल, मैन्यूफैक्चरिंग ऑफ मेडिकल डिवाइसेस, ऑटोमोबाइल, स्पेशियलिटी स्टील, फूड प्रोडक्ट, हाई एफिशिएंसी सोलर पीवी मॉडल, एडवांस कैमिस्ट्री सेल बैट्रीज, ड्रोन एंड फार्मा, शामिल हैं. सरकार ने तब इसके लिए 1.97 ट्रिलियन से ज्यादा की रकम अलॉट की थी. वहीं अगर 2023 तक अगर इस स्कीम के तहत आवंटन पर नजर डालें 1.03 ट्रिलियन का आवंटन किया गया था. इसके चलते 6 लाख 78 हजार लोगों को नौकरी दी गई.
इन सेक्टरों के कैपेक्स में हो सकता है इजाफा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रविचंद्रन ने कहा कि निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय के संबंध में, तेल और गैस, धातु और खनन अस्पतालों, स्वास्थ्य सेवा और सीमेंट में निजी पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी की उम्मीद है. ये वे क्षेत्र हैं जो मध्यम अवधि में बड़े खर्च की उम्मीद कर रहे हैं. हालाँकि, पिछले वर्षों के विपरीत, इस बार पूंजीगत व्यय हरित ऊर्जा पक्ष, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर अधिक है. उन्होंने कहा कि हमें पूंजीगत व्यय के उच्च स्तर तक पहुंचने के लिए डिमांड (मांग) के मोर्चे पर कुछ करने की जरूरत है. बाजार के निचले स्तर पर, ग्रामीण क्षेत्रों में खपत कम है. मांग के मोर्चे पर, हमें कर प्रोत्साहन के माध्यम से और अधिक करने की जरूरत है.
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