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मानसून के मौसम में IPO की बरसात, 6 को खुलेगा यूनिकॉमर्स ई-सॉल्यूशंस का इश्यू
सॉफ्टवेयर कंपनी यूनिकॉमर्स ई-सॉल्यूशंस लिमिटेड का आईपीओ आ रहा है. इससे पहले ओला इलेक्ट्रिक का आईपीओ भी खुला है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
मानसून के मौसम में शेयर बाजार में आईपीओ बरस रहे हैं. कई कंपनियों के आईपीओ आ चुके हैं और कई आने को तैयार हैं. इसी कड़ी में सॉफ्टवेयर कंपनी यूनिकॉमर्स ई-सॉल्यूशंस लिमिटेड (Unicommerce eSolutions Limited) भी छह अगस्त को इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) लेकर आ रही है. इस IPO में 6 से 8 अगस्त तक बोली लगाई जा सकेगी. 9 अगस्त को कंपनी के शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्ट हो सकते हैं.
इतना बड़ा है आईपीओ
यूनिकॉमर्स ई-सॉल्यूशंस अपने आईपीओ के जरिए 276.57 करोड़ जुटाना चाहती है. आईपीओ के तहत 276.57 करोड़ रुपए के 25,608,512 फ्रेश शेयर जारी किए जाएंगे. यहां गौर करने वाली बात यह है कि कंपनी के मौजूदा निवेशक ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए एक भी शेयर नहीं बेच रहे हैं. यूनिकॉमर्स ई-सॉल्यूशंस लिमिटेड ने इस इश्यू का प्राइज बैंड 102 रुपए से 108 रुपए तय किया है. आपको कम से कम एक लॉट के लिए बोली लगानी होगी, जिसमें 138 शेयर हैं. जबकि अधिकतम 13 लॉट के लिए बोली लगाई जा सकती है.
लिस्टिंग का ये अनुमान
ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयर की परफॉरमेंस को देखते हुए माना जा रहा है कि इसकी लिस्टिंग 138 पर हो सकती है. यूनिकॉमर्स ई-सॉल्यूशंस ने इश्यू का 75% हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB), 10% हिस्सा रिटेल निवेशक और शेष 15% हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) के लिए आरक्षित रखा है. 2012 में अस्तित्व में आई यूनिकॉमर्स ई-सॉल्यूशंस लिमिटेड एक सॉफ्टवेयर कंपनी है जो Saas यानी सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस प्लेटफार्म, ब्रैंड, सेलर्स और लॉजिस्टिक्स प्रोवाइडर्स के लिए ई-कॉमर्स ऑपरेशंस मैनेज करती है. इस कंपनी में सॉफ्टबैंक का भी निवेश है.
आखिर क्या होता है IPO?
जब कोई कंपनी इक्विटी मार्केट से यानी शेयर बाजार से पैसे जुटाना चाहती है तो उसके पास बहुत से तरीके होते हैं. उसी में से एक तरीका होता है IPO. दूसरे शब्दों में कहें तो जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर पब्लिक में बेचने के लिए ऑफर करती है, तो उसे Initial Public Offering या IPO कहते हैं. ये शेयर BSE और NSE जैसे स्टॉक एक्सचेंज के जरिए निवेशकों की खरीद के लिए रखे जाते हैं. जब ये शेयर निवेशकों द्वारा खरीद लिए जाते हैं तो वो कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हो जाती है. सरल शब्दों में कहें तो कंपनी शेयरों के रूप में अपनी कुछ हिस्सेदार निवेशकों को बेच देती है और उससे पैसा जुटाती है.
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