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कर्नाटक का बड़ा प्रस्ताव: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लग सकती है रोक
कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार भी चिंतित है. सरकार की 2025–26 की आर्थिक समीक्षा में भी युवाओं के बीच बढ़ती डिजिटल लत को गंभीर चुनौती बताया गया था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
डिजिटल लत और बच्चों पर बढ़ते प्रभाव को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है. राज्य के मुख्यमंत्री ने बजट में घोषणा की है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की नीति तैयार की जाएगी. यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो कर्नाटक ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन सकता है.
सिद्धारमैया ने 2026–27 का राज्य बजट पेश करते हुए कहा कि बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की नीति तैयार करेगी. हालांकि सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह प्रतिबंध किस तरीके से लागू किया जाएगा और इसकी शुरुआत कब से होगी.
दूसरे राज्यों में भी चल रही चर्चा
सोशल मीडिया पर उम्र आधारित प्रतिबंध को लेकर देश के अन्य राज्यों में भी चर्चा तेज हो रही है. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने भी कहा है कि उनकी सरकार 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाने के विकल्पों पर विचार कर रही है. उन्होंने बताया कि राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश द्वारा सुझाए गए प्रस्ताव पर सरकार काम कर रही है और संभव है कि इस संबंध में लगभग 90 दिनों के भीतर कोई कार्यक्रम शुरू किया जाए. साथ ही 13 से 16 वर्ष की आयु के किशोरों के लिए संभावित नियमों पर भी चर्चा चल रही है.
केंद्र सरकार भी कर रही विचार
कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार भी चिंतित है. अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा था कि बच्चों पर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए तय उम्र से कम आयु के बच्चों के लिए इसके उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का विचार दुनिया के कई देशों में लोकप्रिय हो रहा है. उन्होंने बताया कि उम्र आधारित नियमन की अवधारणा भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून से भी जुड़ी हुई है.
आर्थिक समीक्षा में भी उठी थी चिंता
सरकार की 2025–26 की आर्थिक समीक्षा में भी युवाओं के बीच बढ़ती डिजिटल लत को गंभीर चुनौती बताया गया था. समीक्षा में सुझाव दिया गया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन गेमिंग और गैंबलिंग ऐप्स के लिए उम्र सत्यापन की सख्त व्यवस्था होनी चाहिए. साथ ही प्लेटफॉर्मों को ऑटो-प्ले फीचर और लक्षित विज्ञापनों जैसे पहलुओं में भी उम्र आधारित नियंत्रण लागू करना चाहिए.
टेक कंपनियों की प्रतिक्रिया
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कर्नाटक के प्रस्ताव पर सोशल मीडिया कंपनियों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. Meta ने कहा कि अगर सरकार प्रतिबंध लागू करती है तो कंपनी उसका पालन करेगी, लेकिन ऐसे नियम सभी प्लेटफॉर्म पर समान रूप से लागू होने चाहिए. कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा कि सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे कदमों से किशोर उपयोगकर्ता कम सुरक्षित या बिना नियमन वाले प्लेटफॉर्म की ओर न चले जाएं.
नीति विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी तरह प्रतिबंध लागू करना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है. उनका कहना है कि बच्चों पर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव को लेकर चिंता सही है, लेकिन प्रतिबंध लगाने के बजाय जागरूकता और डिजिटल शिक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है. वहीं कुछ नीति विशेषज्ञों का मानना है कि अगर राज्य स्तर पर अलग-अलग नियम बनाए गए तो उनका टकराव केंद्र सरकार के कानूनों से भी हो सकता है, जिससे लागू करने में व्यावहारिक समस्याएं पैदा होंगी.
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