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तंबाकू उत्पादों पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने सुनाया ये फैसला, सही ठहराया केंद्र सरकार का यह कदम

कोर्ट ने तंबाकू निर्माताओं के समूह तरफ से लगाई गई याचिकाओं को खारिज कर दिया जिसमें केंद्र सरकार के इस नियम को चुनौती दी गई थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्लीः कर्नाटक उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि केंद्र सरकार केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) के साथ-साथ तंबाकू और इससे बने उत्पादों पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) लगा सकती है. कोर्ट ने तंबाकू निर्माताओं के समूह तरफ से लगाई गई याचिकाओं को खारिज कर दिया जिसमें केंद्र सरकार के इस नियम को चुनौती दी गई थी. 

अदालत ने सुनाया ये फैसला

न्यायमूर्ति एमआई अरुण ने हालिया फैसले में कहा, "तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी लगाना सार्वजनिक नीति का मामला है और रिट अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए यह अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी. सीजीएसटी स्वयं तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर कर लगाने के अलावा एक्साइज ड्यूटी लगाने पर विचार करता है.

इन कंपनियों ने दायर की थी याचिका

एचसी की धारवाड़ पीठ ने घोडावत पैकर्स एलएलपी, एचआई तंबोली एंड संस, राजनंदिनी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, बालाजी पाउच, घोड़ावत फूड्स इंटरनेशनल लिमिटेड और घोड़ावत इंडस्ट्रीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा वित्त मंत्रालय, भारत संघ और संयुक्त आयुक्त के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई की थी. ज्वाइंट कमिश्नर ने 25 मार्च, 2021 को बेलगावी क्षेत्राधिकार में निर्मित और बेचे जाने वाले तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क और राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क (एनसीसीडी) लगाने का आदेश जारी किया था. 

एक्ट में दिया गया है प्रावधान

सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज (जीएसटी) एक्ट, 2017 से पहले तंबाकू उत्पादों पर सेंट्रल एक्साइज एक्ट के साथ सेंट्रल एक्साइज टैरिफ एक्ट के तहत टैक्स लगता था. संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची में शामिल वस्तुओं को छोड़कर केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम को निरस्त कर दिया गया था. केंद्रीय उत्पाद शुल्क टैरिफ अधिनियम को भी निरस्त कर दिया गया था. हालांकि इसमें तंबाकू और तंबाकू उत्पादों को संविधान की सातवीं अनुसूची में प्रविष्टि 84 के तहत जोड़ा गया था. "इस प्रकार, सीजीएसटी एक्ट, 2017 के प्रावधानों के तहत कर लगाने के अलावा उत्पाद शुल्क लगाया जा सकता है."

हाईकोर्ट ने आगे कहा, "एनसीसीडी एक अधिभार और एक प्रकार की एक्साइज ड्यूटी है जिसे केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी एक्ट, 1944 की चौथी अनुसूची के प्रावधानों के तहत विचाराधीन उत्पाद शुल्क से स्वतंत्र रूप से लगाया जा सकता है. इस प्रकार, उत्पाद शुल्क की वसूली के अभाव में एनसीसीडी की वसूली नहीं की जा सकती है."

देना पड़ेगा जीएसटी के साथ एक्साइज ड्यूटी

याचिकाओं को खारिज करते हुए, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया, "बेहतर स्पष्टीकरण के लिए, केंद्रीय उत्पाद शुल्क एक्ट में संदर्भ दिया गया है. केंद्रीय उत्पाद शुल्क एक्ट को निरस्त करने से सातवीं अनुसूची के तहत निर्धारित एनसीसीडी का भुगतान करने वाले याचिकाकर्ता दोषमुक्त नहीं होते हैं."

VIDEO: एयर इंडिया से आई ये खबर सीनियर सिटीजंस को कर सकती है नाराज

 


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