होम / बिजनेस / Vi में निवेश पर JSW ग्रुप की नजर, टेलीकॉम ऑपरेटर को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार चाहती है मजबूत निवेशक

Vi में निवेश पर JSW ग्रुप की नजर, टेलीकॉम ऑपरेटर को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार चाहती है मजबूत निवेशक

अगर संभावित निवेश आगे बढ़ता है तो इसमें नई इक्विटी जारी करना शामिल हो सकता है. आदित्य बिड़ला ग्रुप ने कहा कि वह अपनी हिस्सेदारी बेचने को लेकर किसी बातचीत में शामिल नहीं है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

पलक शाह  

भारत की आर्थिक रूप से दबाव में चल रही टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (Vi) को स्थिर करने के प्रयासों के बीच बड़े घरेलू कॉरपोरेट समूहों की दिलचस्पी सामने आ सकती है. मामले से परिचित लोगों के अनुसार JSW ग्रुप के चेयरमैन सज्जन जिंदल कंपनी में संभावित निवेश का आकलन कर रहे हैं.

बताया जा रहा है कि यह बातचीत अभी शुरुआती स्तर पर है और संभावित निवेश लगभग 45,000 करोड़ से 60,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकता है. हालांकि अभी तक कोई औपचारिक प्रस्ताव या लेनदेन की संरचना तय नहीं की गई है.

यह संभावित दिलचस्पी ऐसे समय में सामने आई है जब भारत सरकार, जो फिलहाल लगभग 48.99 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ वोडाफोन आइडिया की सबसे बड़ी शेयरधारक है, चाहती है कि कोई वित्तीय रूप से मजबूत रणनीतिक निवेशक कंपनी में आए. ऐसा निवेशक पूंजी निवेश कर कंपनी के पुनर्गठन की दिशा में नेतृत्व दे सके.

नीतिनिर्माताओं को लंबे समय से इस बात की चिंता रही है कि यदि वोडाफोन आइडिया का पतन होता है तो भारत का टेलीकॉम सेक्टर प्रभावी रूप से केवल दो निजी ऑपरेटर रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के प्रभुत्व में आ सकता है. इससे दुनिया के सबसे बड़े टेलीकॉम बाजारों में से एक में प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंता बढ़ सकती है.

विश्लेषकों का कहना है कि हाल के वर्षों में मौजूदा प्रमोटरों द्वारा अपेक्षाकृत सीमित पूंजी निवेश के कारण कंपनी के पुनर्जीवन में बाधा आई है. इसी दौरान कंपनी को बड़े नियामकीय दायित्वों और नेटवर्क निवेश की जरूरतों से भी जूझना पड़ा है.

मामले से परिचित लोगों के अनुसार एक संभावित ढांचे पर भी विचार किया जा रहा है, जिसके तहत वोडाफोन आइडिया JSW ग्रुप से जुड़ी इकाइयों को नए शेयर जारी कर सकती है. इससे समूह को कंपनी में एक महत्वपूर्ण शेयरधारक के रूप में प्रवेश करने का अवसर मिल सकता है.

यदि ऐसा निवेश होता है तो नई इक्विटी जारी होने से पूंजी जुटाने के आकार और शर्तों के आधार पर मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी कम हो सकती है.

JSW ग्रुप को इस विषय पर टिप्पणी के लिए दो बार भेजे गए सवालों का प्रकाशन के समय तक कोई जवाब नहीं मिला. वोडाफोन आइडिया में प्रमोटर शेयरधारक आदित्य बिड़ला ग्रुप ने कहा है कि वह कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने को लेकर किसी चर्चा में शामिल नहीं है.

हालांकि सूत्रों का कहना है कि नए निवेशकों की एंट्री संभवतः नए शेयर जारी करने के माध्यम से ही होगी. इससे प्रतिशत के हिसाब से सरकार और मौजूदा प्रमोटरों की हिस्सेदारी कम हो सकती है और संभावित नए निवेशक को मजबूत हिस्सेदारी मिल सकती है. इस रिपोर्ट की जानकारी आंतरिक चर्चाओं से परिचित लोगों से हुई बातचीत पर आधारित है और इसे किसी आधिकारिक फाइलिंग या घोषणा के जरिए पुष्टि नहीं मिली है.

एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार मार्च 2025 में स्पेक्ट्रम बकाया को इक्विटी में बदलने के बाद भारत सरकार के पास वोडाफोन आइडिया में लगभग 48.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है. प्रमोटर समूह (आदित्य बिड़ला ग्रुप और वोडाफोन पीएलसी शामिल हैं) के पास संयुक्त रूप से लगभग 25.57 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि बाकी शेयर पब्लिक निवेशकों के पास हैं.

नीतिगत राहत और सरकारी समर्थन

संभावित निवेशकों की दिलचस्पी ऐसे समय में सामने आई है जब वोडाफोन आइडिया की वित्तीय स्थिति को राहत देने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए गए हैं.

दिसंबर 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) भुगतान पर पांच साल की मोहलत को मंजूरी दी थी. इसके तहत भुगतान वित्त वर्ष 2031–32 से शुरू होंगे, जिससे निकट अवधि में नकदी दबाव कम होगा.

अधिकारियों द्वारा AGR देनदारियों में लाइसेंस शुल्क वाले हिस्से की भी समीक्षा की जा रही है. उद्योग के अनुमान के अनुसार यदि ब्याज और जुर्माने से जुड़े घटकों में समायोजन किया जाता है तो कुल देनदारी में उल्लेखनीय कमी आ सकती है.

इससे पहले मार्च 2025 में सरकार ने 36,950 करोड़ रुपये के स्पेक्ट्रम बकाया को इक्विटी में बदल दिया था, जिससे वह कंपनी की सबसे बड़ी शेयरधारक बन गई.

निवेश का रणनीतिक महत्व

करीब 20 करोड़ ग्राहकों के साथ वोडाफोन आइडिया भारत की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बनी हुई है. हालांकि नेटवर्क विस्तार और बड़े प्रतिस्पर्धियों से मुकाबले के लिए पूंजी जुटाने में उसे लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी बड़े रणनीतिक निवेशक की एंट्री होती है तो कंपनी की बैलेंस शीट काफी मजबूत हो सकती है. हालांकि अभी यह निश्चित नहीं है कि प्रारंभिक स्तर की ये बातचीत किसी औपचारिक सौदे तक पहुंचेगी.

इस तरह की चर्चाएं अक्सर समय के साथ बदलती रहती हैं, उनकी संरचना में बदलाव हो सकता है या वे किसी सौदे में तब्दील भी नहीं हो पातीं. किसी भी संभावित निवेश के लिए कॉरपोरेट मंजूरी, नियामकीय स्वीकृति और अंतिम व्यावसायिक बातचीत जरूरी होगी.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के निडर लेखक हैं. मुंबई में लगभग दो दशकों की ग्राउंड रिपोर्टिंग के अनुभव के साथ, पालक ने खुद को एक अडिग सच की खोज करने वाले पत्रकार के रूप में स्थापित किया है, जो पैसे, सत्ता और नियमन के गठजोड़ की तहों में गहराई तक जाते हैं. उनके लेख भारत के सबसे प्रतिष्ठित वित्तीय अखबारों जैसे The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line में प्रकाशित हुए हैं जहां उनकी तीखी रिपोर्टिंग ने नरेटिव गढ़े और कॉर्पोरेट बोर्डरूम्स को हिला कर रख दिया.

19 साल की उम्र में ही अपराध पत्रकारिता की ओर खिंचाव महसूस करने वाले पालक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के मुंबई के गिरोह युद्ध अब एक और अधिक चिकने, लेकिन कहीं अधिक खतरनाक संगठित अपराध यानी कॉर्पोरेट टावरों में रची जाने वाली सफेदपोश साजिशों में बदल चुके हैं. यह अहसास ही उन्हें फाइनेंशियल जर्नलिज्म की ओर ले गया, जहां उन्होंने भारत की ‘सफेद धन’ अर्थव्यवस्था की जटिल चालों को वर्षों तक समझा और उजागर किया है. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामक खामियों तक, पलक का काम हाई-फाइनेंस की चमक-दमक से पर्दा हटाकर दिखाता है कि असली धागे खींच कौन रहा है.)

 
 

 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

अडानी ग्रुप की 5 कंपनियों ने सेबी के साथ निपटाया मामला, चुकाए 1.5 करोड़ रुपये

सेबी के मौजूदा निपटान आदेश में जिन मामलों का निपटारा किया गया है, वे संबंधित पक्ष लेनदेन के खुलासे और ऑडिट रिपोर्ट से जुड़े कथित अनुपालन उल्लंघनों पर केंद्रित हैं.

1 hour ago

भारत की आर्थिक रफ्तार ने बढ़ाया भरोसा, WEF सर्वे में 74% मुख्य अर्थशास्त्रियों को मजबूत ग्रोथ की उम्मीद

WEF के अनुसार, सर्वे में शामिल 98 फीसदी अर्थशास्त्रियों को अगले एक साल में भारत में औसत या उससे बेहतर आर्थिक वृद्धि की उम्मीद है.

1 hour ago

गिफ्ट निफ्टी के कमजोर संकेत, आज सुस्त रह सकता है बाजार; क्रूड में नरमी से मिलेगी राहत

मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स 329.91 अंक यानी 0.44 फीसदी गिरकर 74,529.08 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 85.30 अंक यानी 0.36 फीसदी की गिरावट के साथ 23,329.00 पर रहा.

2 hours ago

भारत, ईयू समेत 7 देशों ने P4M पहल शुरू की, संयुक्त राष्ट्र में सुधार पर दिया जोर

भारत, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील, बारबाडोस और केन्या ने न्यूयॉर्क में शुरू की ‘बहुपक्षवाद के लिए साझेदार’ पहल; अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति और समावेशी विकास के लिए सहयोग बढ़ाने का लक्ष्य

17 hours ago

भारत लॉन्च करेगा ₹1,000 करोड़ का पहला ब्लू बॉन्ड, समुद्री और जल परियोजनाओं को मिलेगा फंड

सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन अगले सप्ताह कर सकता है देश के पहले ब्लू बॉन्ड का इश्यू, पोर्ट कनेक्टिविटी, जहाज निर्माण और तटीय बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं को मिल सकता है वित्त

17 hours ago


बड़ी खबरें

गिफ्ट निफ्टी के कमजोर संकेत, आज सुस्त रह सकता है बाजार; क्रूड में नरमी से मिलेगी राहत

मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स 329.91 अंक यानी 0.44 फीसदी गिरकर 74,529.08 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 85.30 अंक यानी 0.36 फीसदी की गिरावट के साथ 23,329.00 पर रहा.

2 hours ago

अडानी ग्रुप की 5 कंपनियों ने सेबी के साथ निपटाया मामला, चुकाए 1.5 करोड़ रुपये

सेबी के मौजूदा निपटान आदेश में जिन मामलों का निपटारा किया गया है, वे संबंधित पक्ष लेनदेन के खुलासे और ऑडिट रिपोर्ट से जुड़े कथित अनुपालन उल्लंघनों पर केंद्रित हैं.

1 hour ago

भारत की आर्थिक रफ्तार ने बढ़ाया भरोसा, WEF सर्वे में 74% मुख्य अर्थशास्त्रियों को मजबूत ग्रोथ की उम्मीद

WEF के अनुसार, सर्वे में शामिल 98 फीसदी अर्थशास्त्रियों को अगले एक साल में भारत में औसत या उससे बेहतर आर्थिक वृद्धि की उम्मीद है.

1 hour ago

AIF निवेश ने बनाया नया रिकॉर्ड, पहली बार ₹7 लाख करोड़ के पार पहुंचा आंकड़ा

जून 2026 तक AIF में कुल निवेश ₹7.1 लाख करोड़ पहुंचा, सालाना आधार पर निवेश प्रतिबद्धता 23.6% बढ़ी; रियल एस्टेट में पहली बार गिरावट

18 hours ago

भारत, ईयू समेत 7 देशों ने P4M पहल शुरू की, संयुक्त राष्ट्र में सुधार पर दिया जोर

भारत, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील, बारबाडोस और केन्या ने न्यूयॉर्क में शुरू की ‘बहुपक्षवाद के लिए साझेदार’ पहल; अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति और समावेशी विकास के लिए सहयोग बढ़ाने का लक्ष्य

17 hours ago